कैराना में विपक्ष की घटिया साजिश: बाबा साहेब आंबेडकर को मुस्लिम लीग का पूर्व सांसद बताकर फैलाई जा रही अफवाह
   दिनांक 26-मई-2018
दलित मुस्लिम गठजोड़ करने के लिए बाबा साहेब को बताया जा रहा मुस्लिम लीग का पूर्व सांसद, मुसलमानों को मुजफ्फरनगर जैसे दंगों का डर दिखाकर बनाया जा रहा माहौल
 
 
 
तीन तलाक जैसे मामले पर कानून बनाए जाने से मुस्लिम महिलाओं का बहुत हद तक समर्थन भाजपा को मिला है। विधानसभा चुनावों मे देवबंद जैसी मुस्लिम बहुल सीट पर भाजपा प्रत्याशी का जीतना इसका प्रमाण है, लेकिन विपक्षियों को भाजपा की उपलब्धि रास नहीं आ रही है। इसको देखते हुए कैराना लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में विपक्ष डर बिठाकर भाजपा को हराने की तैयारी में जुटा है। मुसलमानों को मुजफ्फरनगर दंगे का नाम लेकर डराया जा रहा है। साथ ही बाबा साहेब आंबेडकर को मुस्लिम लीग का पूर्व सांसद बताकर दलित मुस्लिम गठजोड़ करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। हिंदू समाज को बांटने की कैराना में पुरजोर कोशिश हो रही है।
 
कैराना में भाजपा को हराने को बना ’पंचशूल’
 
गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा के उप चुनाव में महागठबंधन की जीत ने विपक्षी दलों को एक टोटका दे दिया है। इस टोटके को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चर्चित कैराना लोकसभा और बिजनौर की नूरपुर विधानसभा के उप चुनाव में फिर से आजमाया जा रहा है। कैराना उप चुनाव में भाजपा को हराने के लिए पांच दल एकजुट हो गए हैं। सपा, रालोद, बसपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का यह ’पंचशूल’ किसी भी तरह से भाजपा को हराने की जुगत में लगा है। इसके लिए मुजफ्फरनगर दंगे और कैराना पलायन के लिए भाजपा को जिम्मेदार बताया जा रहा है। मुसलमानों को भाजपा के नाम पर डराया जा रहा हैैै
 
रालोद ने सपा से उधार लिया प्रत्याशी
 
कैराना लोकसभा के उप चुनाव में भाजपा ने स्वर्गीय हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को चुनाव में उतारा है। भाजपा को हराने के लिए राष्ट्रीय लोकदल ने सपा नेत्री व पूर्व सांसद तबस्सुम हसन को अपने दल में लाकर प्रत्याशी बनाया है। कभी अपने उपाध्यक्ष जयंत चैधरी को चुनाव लड़ाने की ख्वाहिश पाले बैठे रालोद मुखिया अजित सिंह को अखिलेश यादव ने करारा झटका दिया और अपना प्रत्याशी रालोद को सौंप दिया। भाजपा को हराने के लिए रालोद के साथ-साथ सपा, कांग्रेस, बसपा और आम आदमी पार्टी भी एकजुट हो गई है।
 
भाजपा को हराने एकजुट हुआ पूरा हसन परिवार
 
2014 के लोकसभा चुनाव में पूर्व सांसद मुनव्वर हसन के बेटे व कैराना विधायक नाहिद हसन ने सपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। जबकि नाहिद के चाचा कंवर हसन ने बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। इस दोनों की भिड़ंत के बीच भाजपा प्रत्याशी हुकुम सिंह ने कमल का फूल खिला दिया था। अब उप चुनाव में रालोद ने मुनव्वर हसन की पत्नी 2009 में कैराना से सांसद चुनी गई तबस्सुम हसन को गठबंधन प्रत्याशी बनाया तो इसके खिलाफ कंवर हसन ने लोकदल के टिकट पर ताल ठोंक दी। अभी तक हसन परिवार के यह सभी लोग एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी ताल ठोंकते आ रहे थे। राजनीति से अलग भी यह लोग एक-दूसरे के विरोधी थी, लेकिन भाजपा को हराने के लिए कंवर हसन ने भी पाला बदल लिया। कंवर रालोद में शामिल होकर अब तबस्सुम के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं। अब पूरा हसन परिवार भाजपा के खिलाफ एकजुट हो गया हैं। तबस्सुम के देवर कंवर हसन के साथ-साथ उनके जेठ कैराना नगर पालिका परिषद के चेयरमैन अनवर हसन भी पुराने मतभेद भुलाकर रालोद में शामिल हो गए। भाजपा की जीत के डर ने सभी को एक मंच पर आने को मजबूर कर दिया।
 
लोगों को दिखाया जा रहा दंगों का डर
 
चुनाव प्रचार में लगे रालोद उपाध्यक्ष जयंत चैधरी, सपा नेता नाहिद हसन खुलेआम 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के लिए भाजपा को जिम्मेदार बता रहे हैं। कैराना पलायन को भी वह भाजपा की ही साजिश बताकर लोगों का मन बदलने की कोशिश में है। पांच दलों के एक साथ आने से अब यहां का चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए नाक की लड़ाई बन गई है। अब तो कैराना उपचुनाव को जीतना न सिर्फ भाजपा के लिए अहम है, बल्कि उसके लिए बड़ी चुनौती भी है। कैराना लोकसभा उपचुनाव में भाजपा एक तरफ और तो उसे टक्कर देने के लिए सारी पार्टियां संयुक्त रूप से दूसरी ओर है। भाजपा को छोड़ दें तो, कैराना में विपक्षी पार्टियों का याराना बढ़ रहा है। दिल्ली की आम आदमी पार्टी ने भी यहां पर सपा-बसपा-रालोद समर्थित उम्मीदवार के समर्थन का ऐलान कर दिया है। इससे पहले ही कांग्रेस ने भी ऐलान किया था कि वह अपने प्रत्याशी को कैराना के मैदान में नहीं उतारेगी और सपा-रालोद-बसपा समर्थित उम्मीदवार को ही अपना समर्थन देगी। कैराना के चुनावी मैदान में अब तो भाजपा चारों तरफ से घिर चुकी है। सभी पार्टियों ने मिलकर भाजपा को हराने के लिए चक्रव्यूह रचा है।
 
जाटों को रालोद की ओर मोड़ने की कोशिश
 
2014 के लोकसभा चुनावों और 2017 के यूपी विधानसभा चुनावों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाटों का रूख भाजपा की ओर रहने से रालोद का सियासी अस्तित्व दांव पर लग गया। इसी कारण कैराना उपचुनाव में जाटों को अपने पाले में लाने के लिए रालोद मुखिया अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चैधरी ने भावनात्मक मुद्दों का सहारा लिया है। इसके लिए वह पूर्व प्रधानमंत्री चैधरी चरण सिंह का खुलकर सहारा ले रहे हैं। चरण सिंह के पुराने मजगर (मुस्लिम, जाट, गुर्जर व राजपूत) फार्मूले को उपचुनाव में भुनाने की कोशिश की जा रही है।
 
मुस्लिम-जाटों को साथ लाने की कोशिश
 
राष्ट्रीय लोकदल के लिए कैराना उप चुनाव अस्तित्व का प्रश्न बन गया है। 2013 के दंगों से बिखर गए अपने पुराने जाट-मुस्लिम गठबंधन को एक करने के लिए रालोद नेता जी-जान से लगे हैं। गौरतलब है कि रालोद की जीत का आधार मुस्लिम-जाट वोटर प्रमुख था। मुजफ्फरनगर और शामली में हुए दंगों के बाद यह गठबंधन बिखर गया। अब अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चैधरी ने भाजपा के खिलाफ जाटों को अपने पक्ष में लाने का अभियान छेड़ा हुआ है। पिछले दो महीने से जयंत चैधरी शामली और मुजफ्फरनगर जनपदों में ही डेरा डाले हुए हैं और भाजपा को हराने को जोड़तोड़ में लगे हैं।