राज्य में पत्थरगड़ी नहीं ‘विकासगड़ी’ की चर्चा है
   दिनांक 28-मई-2018
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ़ रमन सिंह प्रदेश में तीसरी बार विकास यात्रा पर हैं। पहले चरण में अभी तक बस्तर और सरगुजा संभाग की यात्रा पूरी कर चुके मुख्यमंत्री राज्य में पत्थरगड़ी पर उपजे विवाद पर कहते हैं,‘‘ राज्य में आज के समय केवल और केवल ‘विकासगड़ी’ की चर्चा है। निहित स्वार्थी तत्व अलग-अलग मुखौटा लगाकर प्रदेश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं लेकिन उनकी मंशा कभी सफल नहीं होने वाली।’’ पाञ्चजन्य संवाददाता अश्वनी मिश्र ने पत्थरगड़ी सहित विकास यात्रा पर उनसे विस्तृत बात की।
प्रस्तुत हैं बातचीत के संपादित अंश-
 
आपने विकास यात्रा को तीर्थयात्रा कहा है। इसका वास्तविक उद्देश्य क्या है?
 
हमारे वैचारिक प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी कहा करते थे कि गरीब और वंचितजन ही हमारे नारायण हैं। इन्हें जब हम पक्की सड़कें और मकान देंगे, इनके पांवों की बिवाई भरेंगे और मूलभूत सुविधाएं इन तक सुलभ कर पाएंगे तभी हमारा इनसे भ्रातृ भाव व्यक्त होगा। इस दिशा में मैं प्रदेश की ढाई करोड़ जनता से मिलकर,उनका हाल जानकर, उनका सुख-दुख साझा करने का प्रयास इस यात्रा के जरिए कर रहा हूं। यह सभी वनवासी बंधु हमारे लिए नारायण का ही रूप हैं। इसीलिए यह यात्रा मेरे लिए तीर्थ यात्रा है। देखिए, यह हमारी तीसरी विकास यात्रा है। इसके अलावा भी मैं लगातार प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास करता रहता हूं। मेरा उद्देश्य यही होता है कि राज्य के लोगों ने जो काम और जिम्मेदारी मुझे सौंपी हैं, उसका पाई-पाई का हिसाब उनके पास जाकर दूं।

नक्सल आतंक पर हमारी शुरू से नीति रही है कि विकास के अस्त्र से ही हम इसका सफाया करेंगे और इसका असर स्पष्ट तौर पर दिखाई भी दे रहा है। आज राज्य में नक्सल गतिविधियां अंतिम दौर में हैं तो वहीं दूसरी ओर वनवासी क्षेत्रों में लगातार लोगों का विश्वास शासन पर बढ़ रहा है।
विरोधी दल विकास यात्रा में ‘विकास’ खोज रहे हैं। वनवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में राज्य सरकार की वे कौन सी योजनाएं हैं, जिन्हें आप सर्वाधिक प्रभावी मानते हैं?
 
विपक्ष को वस्तुत: अब कांग्रेस को खोजने का अभियान चलाना चाहिए। राजनीति इतनी नकारात्मकता के साथ नहीं होनी चाहिए। जहां तक नक्सल आतंक का सवाल है तो हमारी शुरू से यही नीति रही है कि विकास के अस्त्र से ही इसका सफाया करेंगे और इसका असर भी स्पष्ट रूप से दिख रहा है। प्रदेश के सरगुजा संभाग को पूरी तरह इनके चंगुल से मुक्त कराया जा चुका है। अब बस्तर के कुछ थोड़े से इलाके तक इनकी उपस्थिति है। जल्द ही पूरे प्रदेश को इनसे मुक्ति मिलेगी। रही विकास की बात तो प्रदेश के वनवासी इलाकों में जन वितरण प्रणाली सबसे सुदृढ़ है और हम इसी प्रणाली से चावल, चना, नमक आदि बांटकर गरीबी और नक्सलवाद से लड़ने में सफल हुए हैं। इसके अलावा तेंदू पत्ता बोनस, वनांचल में शिक्षा से लेकर सड़क आदि की श्रेष्ठ व्यवस्था समेत अनेक योजनाओं के माध्यम से इन इलाकों का कायाकल्प हुआ है। प्रदेश के दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे इलाके आज ‘एजुकेशन हब’ रूप में विकसित हो गए हैं। शासन की ‘प्रयास’ योजना से सैकड़ों वनवासी बच्चे डॉक्टर-इंजीनियर बन रहे हैं। शासन की तमाम योजनाएं वास्तव में उम्मीद से बढ़कर सफल और प्रभावी हुई हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की प्राथमिकता में यह क्षेत्र है। विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना ‘आयुष्मान भारत’ के शुभारंभ के लिए भी उन्होंने दंतेवाड़ा को ही चुना और जांगला गांव से योजना की शुरुआत की।
पत्थरगड़ी अभियान को आप किस रूप में देखते हैं?
 
मैं विकास यात्रा में अभी-अभी सरगुजा से लौट कर आया हूं। वहां केवल ‘विकासगड़ी’ की चर्चा है। निहित स्वार्थी तत्व अनेक अलग-अलग चेहरों के साथ प्रदेश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते रहते हैं लेकिन वे कभी सफल नहीं होंगे। प्रदेश की समस्त जनता लोकतंत्र और भारत के संविधान में अटूट निष्ठा रखने वाली है। ऐसे अभियानों का कोई प्रभाव नहीं होने वाला है। इसके अलावा वनवासियों में पत्थरगड़Þी की परंपरा सैकड़ों साल पुरानी है। परंपरा के निर्वाह के लिए किसी ने नहीं रोका है, लेकिन वर्तमान में इसका जो स्वरूप सामने आया उसका विरोध किया जा रहा है। समाज को तोड़ने वालों तत्वों को वनवासी समाज ने ही नकार दिया है।
आपके 14 वर्ष के कार्यकाल की ऐसी पांच प्रमुख योजनाएं कौन सी हैं, जो सही मायने में मील का पत्थर साबित हुई हैं?
 
वैसे तो दर्जनों सफल योजनाओं में से सिर्फ पांच को चुनना हमारे लिए काफी कठिन है फिर भी निश्चित ही पीडीएस प्रणाली हमारे लिए एक सपने के पूरा होने जैसी है। देश में सबसे पहले हमने कानून बना कर जनता के लिए भोजन अधिकार सुनिश्चित किया। इसके अलावा धान खरीदी की व्यवस्था स्मार्ट कार्ड के माध्यम से की। प्रदेश में सभी के लिए मुफ्त स्वास्थ्य की योजना, ‘प्रयास’ के माध्यम से हजारों बच्चों को उनका आसमान देना, वनवासी भाइयों के लिए चरण पादुका वितरण कर उनके फटे पावों की बिवाई की चिंता करना समेत ऐसी अन्य तमाम योजनाएं हमारे ह्दय के काफी करीब हैं। आगे इनके लिए और ज्यादा कर सकूं यही कामना शेष है।