किसानों की ऋण माफी से मुकरे कुमार स्वामी मांगा और वक्त
   दिनांक 31-मई-2018

कुमार स्वामी ने कहा हमने कांग्रेस के साथ गठबंधन करके सरकार बनाई है इसलिए कांग्रेस से बातचीत के बाद ही ऋण माफी पर कोई फैसला लेने में सक्षम हैं

बेंगलुरू से गुरुप्रसाद

कर्नाटक के मुख्यमंत्री की शपथ लिए हुए कुमारस्वामी को सप्ताह भर से अधिक समय हो चुका है लेकिन कांग्रेस और जद (एस) दोनों विभागों के बंटवारे में उलझे पड़े हैं। संयुक्त रूप से मिलकर सरकार बनाने के बाद अब उनके बीच मुख्य विभागों के बंटवारे पर खींचतान हो रही है। इन सबके चलते मुख्यमंत्री कुमार स्वामी को राज्य के लोगों द्वारा आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।

 

मुख्यमंत्री बनने के बाद जब उन्होंने खुले तौर पर घोषणा की थी कि वह मुख्यमंत्री कांग्रेस की कृपा से बने हैं तब भी उनकी इस बात को लेकर खूब अलोचना हुई थी कि उन्होंने राज्य के 6.5 करोड़ लोगों का आभार व्यक्त करने की बजाए कांग्रेस का आभार व्यक्त किया। अपने चुनावी घोषणा पत्र में जद (एस) ने घोषणा की थी कि यदि राज्य में उनकी सरकार बनती है तो वह सरकार बनने के 24 घंटों के दौरान राज्य में किसानों का ऋण माफ कर देंगे। अपनी चुनावी सभाओं में भी बारबार कुमार स्वामी ने इस बात का जिक्र किया था लेकिन सरकार बनने के बाद किसानों की ऋण माफी को लेकर कांग्रेस और जद (एस) गठबंधन की सरकार ने एक शब्द भी नहीं बोला है। किसानों के ऋण की माफी को लेकर राज्य भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और सरकार से इस संबंध में सरकार से जल्द फैसला लेने को कहा जा रहा है। इस संबंध में जब कर्नाटक के स्थानीय मीडिया ने कुमार स्वामी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनाए जाने के लिए वह कांग्रेस के अभारी हैं न की लोगों के। मुख्यमंत्री का यह कथन स्पष्ट करता है कि वह सिर्फ किसी तरह सत्ता पाने चाहते थे राज्य के लोगों के भले की उन्हें कोई परवाह नहीं थी।

किसानों की ऋण माफी के मुदृदे पर उन्होंने 30 मई को विधानसभा में एक बैठक बुलाई थी जिसमें किसानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में उन्होंने किसानों का ऋण माफ करने में असमर्थता जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस मामले पर विचार करने के लिए उन्हें 15 दिन का समय और लगेगा। उन्होंने कहा कि क्योंकि उन्होंने कांग्रेस के साथ गठबंधन करके सरकार बनाई है इसलिए उन्हें कांग्रेस से इस संबंध में विमर्श करना पड़ेगा इसके बाद ही वह इस पर कोई फैसला लेने में सक्षम होंगे। नेता विपक्ष बीएस येदियुरप्पा ने कहा है कि यदि मुख्यमंत्री ने सप्ताह भर के अंदर अपने वायदे पर अमल नहीं किया तो वह इसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। वहीं विशेषज्ञों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यदि किसानों का ऋण माफ किया गया तो राज्य की वित्तीय स्थिति पर इसका अच्छा खासा असर पड़ेगा। बहरहाल इन सब बातों से स्पष्ट है कि राज्य में विभागों के बंटवारे को लेकर कांग्रेेस और जद (एस) के बीच खींचतान हो रही है। दोनों ही महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखना चाहते हैं। यही कारण है कि कुमार स्वामी अभी तक अपने कैबिनेट का विस्तार नहीं कर पाए हैं।

मुख्यमंत्री बनने के तत्काल बाद कुमार स्वामी ने आश्रमों के खिलाफ अनापशनाप टिप्पणी करके संतों और धार्मिक गुरुओं को भी नाराज कर दिया है। उन्होंने कहा था कि संतों और धार्मिक गुरुओं को राजनीति से दूर रहना चाहिए। उन्हें राजनेताओं को सलाह नहीं देनी चाहिए क्योंकि नेता राजनीति उनसे बेहतर जानते हैं। कुमार स्वामी के इस बयान पर राज्य के सभी धार्मिक प्रमुखों ने आपत्ति जताई थी।