इस कारण हुई थी उत्तर और दक्षिण कोरिया की दुश्मनी

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन के बीच हुई शिखर वार्ता ऐतिहासिक माना जा रहा है। उत्तर कोरिया के इस नरम रुख का पूरे विश्व की राजनीति पर प्रभाव पड़ना तय है। आखिर उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया दुश्मन क्यों बनें। क्यों दुनियाभर से उत्तर कोरिया को आर्थिक प्रतिबंध झेलने पड़े । हम आपको सीरीज दर सीरीज इस बात की जानकारी देंगे। हमारी पहली किश्त में पढ़िए उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया एक दूसरे के विरोधी कैसे बने? इस लंबी चली दुश्मनी का कारण क्या था ?

 

उत्तर कोरिया एक साम्यवादी देश है, लेकिन वहां साम्यवाद के साथ सैन्य तानाशाही का मिश्रण है। पिछले 70 साल से किम परिवार एक राजवंश की तरह शासन कर रहा है। कम्युनिस्ट पार्टी के संविधान में ही यह व्यवस्था जोड़ दी गई है कि किम इल सुंग के परिवार का ही कोई उत्तराधिकारी उसका नेता होगा और उत्तर कोरिया पर शासन करेगा। इसका ऐतिहासिक कारण यह है कि किम के परिवार ने देश को औपनिवेशिक शक्तियों से बचाने और फिर खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जोंग के दादा ने कोरिया की प्रतिष्ठा को अक्षुण्ण रखने के लिए विश्व की महत्वपूर्ण शक्तियों का बुद्धिमत्तापूर्ण प्रयोग किया था। कभी स्टालिन तो कभी चीन के नेता माओत्से तुंग का। उद्देश्य केवल कोरिया को एक स्वतंत्र इकाई बनाना था, जिसमें औपनिवेशिक शक्तियों का वर्चस्व न हो। किम इल सुंग दोनों कोरिया को एक सूत्र में बांधने के हिमायती थे। सुंग ने दक्षिण कोरिया पर आक्रमण करके कोरिया के एकीकरण की पहल की थी। चीन और रूस दोनों की मदद से उत्तर कोरिया की सेना दक्षिण कोरिया के बड़े क्षेत्र को हड़पने में सफल हो गई। पुन: अमेरिका ने दक्षिण कोरिया को बचाने के लिए युद्ध में छलांग लगा दी। इसके उपरांत अमेरिका समर्थित पश्चिमी देश भी दक्षिण कोरिया के पक्ष में उतर गए। स्थिति तृतीय विश्वयुद्ध की बनने लगी। 3 वर्ष तक युद्ध चला। लोग लाखों की संख्या में मारे गए। किसी की हार या जीत नहीं हुई। दोनों पक्षों को अपनी मूल सीमाओं से संतोष करना पड़ा। यही कारण है कि दोनों कोरिया ही अपने को पूरे कोरिया का असल मालिक मानते हैं।

 

चूंकि कोरिया युद्ध का स्वरूप वैश्विक हो चुका था इसलिए युद्ध के उपरांत उनकी सूरत दो विपरीत खण्डों में बंट गई। शीत युद्ध की तपिश में एक पूंजीवादी बन गया तो दूसरा साम्यवादी। पूर्व सोवियत संघ के प्रभाव के कारण उत्तर कोरिया में कम्युनिस्ट शासन प्रणाली स्थापित हुई और अमेरिका के प्रभाव के कारण दक्षिण कोरिया में पूंजीवादी व्यवस्था की नींव पड़ी।

 

(लेखक केंद्रीय विश्वविद्यालय, हरियाणा में राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष हैं)