राम मंदिर की बात पर जान जाने का खतरा क्यों ?
   दिनांक 07-मई-2018

वसीम रिजवी, बुक्कल नवाब और मोहसिन रजा अयोध्या में राम मंदिर बनाने की वकालत कर रहे हैं। इसमें इस समस्या को बनाए रखने वाले कुछ तत्व बौखला गए हैं-और इन्हें मारने की धमकी तक दे रहे हैं। आखिर इन मुसलमान नेताओं को हिंदू हित की बात करने पर क्यों मिल रही हैं धमकियां ?


 
 
इन दिनों उत्तर प्रदेश में मुसलमान नेता काफी चर्चा में हैं। -शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी, विधान पार्षद बुक्कल नवाब और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री मोहसिन रिजा। ये तीनों हिंदुओं के पक्ष में बोलते हैं, मंदिर जाते हैं, आतंकवादियों की आलोचना करते हैं और सबसे बड़ी बात, अयोध्या में राम मंदिर की वकालत करते हैं। इस कारण इन तीनों कट्टरवादियों के निशाने पर हैं। उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। वसीम रिजवी को मारने के लिए दाउद इब्राहिम के गुर्गे सक्रिय हैं। ऐसे तीन गुर्गों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।


पिछले कुछ समय से रिजवी पूरे देश और दुनिया को यह संदेश दे रहे हैं कि राम मंदिर मामले में शिया वक्फ बोर्ड का मत हिंदुओं के पक्ष में है। वे रिजवी कहते हैं, ‘‘इस देश में यह अत्यंत दुर्भाग्य का विषय है कि आजादी के बाद हिंदू भगवान राम के जन्म-स्थान की लड़ाई अदालत में लड़ रहे हैं और यह सब कट्टरवादियों की जिद के कारण है। ये किसी भी मत की आस्था को नहीं मानते हैं।’’ वसीम कहते हैं, ‘‘इस मामले में शिया वक्फ बोर्ड भी पक्षकार है। पहले यह प्रस्ताव दिया गया था कि भगवान राम का मंदिर अयोध्या में बन जाए और मस्जिद कहीं दूर बनाई जाए। मस्जिद ऐसी जगह पर बने जहां नमाजियों को इसकी जरूरत हो, लेकिन सुन्नी वक्फ बोर्ड के लोग तैयार नहीं हुए।’’


पैंगबर के जन्म पर विवाद होता को मुसलमानों को समझ आता
वसीम कहते हैं, ‘‘शिया वक्फ बोर्ड विवाद की मस्जिद बनाने के पक्ष में नहीं है। देश की 80 फीसदी आबादी यही मानती है कि भगवान राम अयोध्या में पैदा हुए थे। एक तराजू में भगवान राम के मंदिर का पक्ष और दूसरे तराजू में बाबरी ढांचे का पक्ष रखा जाए तो ढांचे का पक्ष कहीं ठहरता ही नहीं है।’’ वे आगे कहते हैं, ‘‘अगर भारत में पैगंबर साहब के जन्म-स्थान को लेकर इस तरह का मामला फंसता तब मुसलमानों को समझ में आता। विदेशों में कई ऐसे उदाहरण हैं, जहां मस्जिद को एक जगह से हटाकर दूसरी जगह स्थापित किया गया है। भगवान राम अयोध्या में पैदा हुए थे, उनका जन्मभूमि मंदिर जब भी बनेगा अयोध्या में ही बनेगा। उनका जन्मभूमि मंदिर केरल में नहीं बन सकता।’’

बाबर कभी नहीं आया अयोध्या
वसीम यह भी कहते हैं, ‘‘इतिहास के एक विवरण के अनुसार बाबर कभी अयोध्या आया ही नहीं था। बाबर का सेनापति मीर बाकी शिया था। मीर बाकी 6,000 सैनिकों को लेकर अयोध्या पहुंचा था और अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए उसने मंदिर तोड़कर मस्जिद बना दी थी। मीर बाकी वहां का मुतवल्ली रहा और बाद में उसके परिवार के लोग मुतवल्ली रहे। बाबर के मरने के बाद लोग इसे ‘बाबरी ढांचा (मस्जिद)’ कहने लगे। बाबरनामा में इस ढांचे का कहीं जिक्र तक नहीं है। अगर बाबर अयोध्या आया होता तो बाबरनामा में इसका जिक्र जरूर होता।’’ वे कहते हैं, ‘‘हिंदू पक्षकार और शिया वक्फ बोर्ड के पक्ष को सुने बगैर सुन्नी वक्फ बोर्ड अपना हक जता रहा है। बेहतर होता कि लखनऊ में जो जगह चिन्हित करके दी गई थी, उस पर मस्जिद बना लेते। मगर कठमुल्ले इस मामले को हल नहीं होने दे रहे हैं। इस मामले पर मैं कदम आगे बढ़ा चुका हूं। पीछे हटने का कोई मतलब नहीं है। चाहे मेरी जान चली जाए, मुझे कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है।’’
वसीम रिजवी की इस स्पष्टवादिता की वजह से ही उनकी जान लेने का प्रबंध दाउद इब्राहिम गिरोह से संबंध रखने वाले एक अपराधी ने कर भी दिया था। मगर घटना को अंजाम देने से पहले वह दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ गया। दिल्ली पुलिस को कई दिनों से विदेश से आने वाली फोन की सूचना मिल रही थी। जब पुलिस ने इस दिशा में सक्रियता बढ़ाई तो सलीम, जो उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जनपद का रहने वाला है, संदेह के घेरे में आ गया। उसने पुलिस को बताया कि वह कामकाज के सिलसिले में दुबई गया था। वहीं पर उसका संपर्क दाउद के गिरोह से हो गया था। इस गिरोह ने रिजवी की हत्या की सुपारी सलीम को दी थी। सलीम अपने साथियों के साथ लखनऊ में दो बार रिजवी के घर की रेकी कर चुका था। इसी बीच पुलिस ने सलीम और उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया।


मेरे पूर्वज थे हनुमान भक्त मैं भी हूं : बुक्कल नवाब
  
 
 हजरतगंज स्थित दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर में घंटी चढ़ाते बुक्कल नवाब।
 
बुक्कल नवाब इन दिनों भाजपा से विधान पार्षद हैं। जब वे समाजवादी पार्टी में थे तब भी राम मंदिर के पक्ष में बयान देते थे। बुक्कल कहते हैं, ‘‘सपा की सरकार के समय एक मंत्री ने राम मंदिर मामले में हिंदुओं के पक्ष में बोला था। इस कारण उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था। उसी समय मैंने कहा था कि मैं अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनते हुए देखना चाहता हूं। मैं मंदिर के निर्माण के लिए 10,00,000 रुपए दूंगा और सोने का मुकुट चढाऊंगा।’’ वे कहते हैं, ‘‘ऐसा नहीं है कि मैं भाजपा में आने के बाद राम मंदिर के पक्ष में बोल रहा हूं। मैं पहले से ही राम मंदिर के पक्ष में अपनी बात रखता चला आ रहा हूं। इसकी वजह यह है कि मेरे पूर्वज हनुमान भक्त थे। इसीलिए मैंने हजरतगंज में दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर में घंटी अर्पित की है। मेरे पिता स्वर्गीय दारा नवाब ने शंकर जी का मंदिर बनवाया था।’’ पिछले विधानसभा चुनाव के पहले बुक्कल सपा के विधान परिषद् सदस्य थे। उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद उन्होंने विधान परिषद् की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

हिंदुस्थान में रहने वाले सभी लोग हिंदू हैं : मोहसिन रजा

  अलीगंज स्थित हनुमान मंदिर में पूजा कर बाहर आते मोहसिन रजा।
 
उत्तर प्रदेश सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री मोहसिन रजा भी कट्टरवादियों के निशाने पर हैं। लखनऊ के एक जमींदार परिवार से ताल्लुक रखने वाले मोहसिन एक अच्छे क्रिकेटर रहे हैं। 1987 से 1989 के बीच मोहसिन ने रणजी क्रिक्रेट खेला है। 2014 में वे भाजपा में आए और फिर कुछ समय बाद भाजपा के प्रवक्ता बनाए गए। 2017 में जब भाजपा की सरकार बनी तो उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया। वे विधान परिषद् के सदस्य हैं। हनुमान जयंती के दिन मोहसिन ने पूरे परिवार के साथ लखनऊ के अलीगंज स्थित हनुमान मंदिर में हनुमान जी के दर्शन किए। वे कहते हैं, ‘‘मेरी मान्यता बिल्कुल स्पष्ट है। मै सभी मत-पंथों का सम्मान करता हूं। यह कहने में क्या दिक्कत है कि हिंदुस्थान में रहने वाला हर कोई हिंदुस्थानी है। हिंदू से हिंदुस्थान है। मगर इसमें भी कुछ लोगों को तकलीफ हो जाती है।’’ बहराल, यह शुभ संकेत है कि सामाजिक समन्वय के लिए उदार और अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पहचानने वाले मुसलमानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।