नैतिकता के आइने में जिन्ना: जिन्ना ने कभी नहीं की पत्नी और पुत्री की कद्र
   दिनांक 08-मई-2018
जिन्ना विवाद पहली बार नहीं है बार—बार जिन्ना को लेकर देश में बहस छिड़ती रहती है। हम जिन्ना के जीवन के चार—पांच पहलुओं को तथ्यों के संदर्भ में समझने का प्रयत्न करेंगे और तथ्यों और संदर्भों के आइने में इसको देखने की कोशिश करेंगे। हम जिन्ना से जुड़ी एक सीरीज अपने पाठकों के लिए ला रहे हैं। प्रस्तुत है पहली किश्त:
 


मोहम्मद अली जिन्ना के जीवन में सिर्फ तीन महिलाएं आती हैं। उनकी पत्नी रत्नबाई, पुत्री दीना वाडिया और बहन फातिमा जिन्ना। उनकी पत्नी और पुत्री से कभी नहीं बनी। वे उनकी अनदेखी करते रहे। उनके लिए जिन्ना के पास कभी वक्त नहीं था। हां,बहन उनके साथ हमेशा रहीं ।
अपने ही दोस्त की बेटी से की थी शादी
जिन्ना की पत्नी रती उनके एक दोस्त की पुत्री थीं। दोनों की उम्र में लगभग बीस-बाइस सालों का अंतर था। वे वर्ष 1916 में अपने मित्र दिनशॉ पेतित से मिलने दार्जिलिंग गए। उधर जिन्ना की मुलाकात सर दिनशॉ की 16 साल की बेटी
रती से हुई। 40 साल पार कर चुके जिन्ना रती की खूबसूरती के दीवाने हो गए। वे भूल गए कि रती उनसे बहुत छोटी है और उनके मित्र की पुत्री है। वे नैतिकता की सारी मर्यादाओं तोड़ते हुए उसके इश्क में पागल हो गए। दार्जिलिंग में ही उन्होंने उसके साथ कुछ वक्त गुजारा। उन्होंने रती को प्रभावित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी यह जानते हुए भी कि वह उनके दोस्त की बेटी हैं। इस बीच, रती भी जिन्ना से प्रभावित हो गई। एक दिन उन्होंने रती के पिता से कहा कि वह अपनी पुत्री का विवाह उनसे कर दें। जिन्ना की इस पेशकश से दिनशॉ गुस्से से पागल हो गए। उन्होंने जिन्ना से उसी वक्त अपना घर छोड़ देने के लिए कह दिया।
रती के जिन्ना से मिलने पर लगाई रोक
इस घटना के बाद दिनशॉ ने रती पर जिन्ना से कभी भी मिलने पर रोक लगा दी। लेकिन 20 फ़रवरी, 1918 को जब रती 18 साल की हुईं तो उन्होंने एक छाते और एक जोड़ी कपड़े के साथ अपने पिता का घर छोड़ दिया। जिन्ना रती को जामिया मस्जिद ले गए जहां उन्होंने इस्लाम कबूल किया और 19 अप्रैल, 1918 को जिन्ना और रती का निकाह हो गया।

कभी नहीं की पत्नी की कद्र
जिन्ना ने अपने 24 साल छोटी रती से शादी तो कर ली लेकिन उन्होंने कभी उसकी कद्र नहीं की। अपनी पत्नी के लिए उनके पास कभी वक्त नहीं था। जिन्ना ने उन्हें कभी पूछा नहीं। जिस लड़की ने जिन्ना के लिए सब कुछ त्यागा था, उसके लिए जिन्ना के पास वक्त नहीं था। एकाकी जीवन से दुखी रहने के कारण वो बीमार रहने लगीं और उनका 20 फरवरी, 1929 को बंबई में निधन हो गया। वो तब सिर्फ 29 साल की थीं। उन्हें बंबई में दफन किया गया। कहते हैं कि जिन्ना दफन करने के बाद कभी उसकी कब्र पर नहीं गए। जब रती का निधन हुआ तब तकजिन्ना और रती की बेटी दीना बड़ी हो रहीं थीं। जिन्ना के पास अपनी बेटी के लिए भी कोई वक्त नहीं था। वो राजनीति और वकालत में बिजी रहते थे। दीना ने अपनी मां को दुखी होकर इस संसार से जाते हुए देखा था, हालांकि वह तब बहुत छोटी थीं। पर बचपन की स्मृतियां कभी ओझल नहीं हो पाईं थीं।
वह जानती थीं कि उसके पिता ने उसकी मां का भरपूर अनादर किया। वो बड़ी हुई तो वो भी पिता के व्यवहार से नाखुश रहने लगीं। पर जिन्ना को इस बात की कोई परवाह नहीं थी। इस बीच दीना की बंबई के नेविल वाडिया से दोस्ती हो गई। वो दीना के सुख-दुख सुनने लगे। दोनों मुंबई के एक एलिट सर्किल में मिलते-जुलते थे। दोनों ने विवाह का फैसला किया। दीना ने अपने भावी पति के संबंध में पिता जिन्ना को बताया। जिन्ना आग बबूला हो गए। कहने लगे कि, “ तुम्हें कोई पैसे वाला मुसलमान नहीं मिला।” वो इस विवाह के लिए तैयार नहीं थे। हालांकि उन्होंने खुद एक पारसी से शादी की थी लेकिन पुत्री के पारसी से विवाह करने पर उन्हें ऐतराज था। दीना भी जिद्दी थीं। उन्होंने नेविल से ही विवाह किया। अपनी पुत्री के किसी पारसी से शादी करने से जिन्ना गुस्से में इस कदर पागल हो गए कि उन्होंने दीना से संबंध विच्छेद कर लिए। हालांकि दीना ने कभी इस बात की परवाह नहीं की कि उसके पिता उससे बात नहीं करते। जब देश का बंटवारा हुआ तो दीना अपने पति के साथ बंबई में ही रह रहीं थीं। कहते हैं कि 7 अगस्त, 1947 के पहले हफ्ते में मुंबई जाने से पहले उन्होंने दीना को पाकिस्तान चलने के लिए कहा था। ये बात अलग है कि दीना ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था। वो सारी जिंदगी मुंबई में ही रहीं एक भारतीय नागरिक की तरह। उनका कुछ समय पहले न्यूयार्क में निधन हो गया था। तब वह 94 वर्ष की थीं।दीना के पुत्र नुस्ली वाडिया बाम्बे डाइंग उद्योग समूह के चैयरमेन हैं। उनका छोटा बेटा इंडिगो एयरलाइन चलाता है,जबकि बड़ा बेटा आईपीएल की टीम किंग्स इलेवन पंजाब का मालिक भी है।
फातिमा बनीं जिन्ना का साया
ये बात समझ से परे है कि फातिमा ने बड़े भाई जिन्ना के लिए सब कुछ क्यों त्याग दिया। फातिमा डेंटल सर्जन थीं। वो जिन्ना के साथ साए की तरह से रहीं। दोनों का साथ तब छूटा जब 11 सितंबर 1948 को मोहम्मद अली जिन्ना की मौत हो गई। जिन्ना की मौत के बाद उन्हें सियासत से दूर रखने की भरपूर कोशिश की गई। और 30 जुलाई 1967 को फातिमा जिन्ना का भी इंतकाल हो गया।