क्या ​पश्चिम बंगाल में गुनाह है भाजपा कार्यकर्ता होना?
   दिनांक 01-जून-2018

 अम्बाशंकर वाजपेई

तृणमूल के गुंडों ने बर्बरता से की भाजपा कार्यकर्ता त्रिलोचन महतो की हत्या, अमित शाह ने ट्वीट कर कहा कि तृणमूल कांग्रेस हिंसा के मामले में कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) माकपा से आगे निकल गई है

अभी दो दिन पहले पुरुलिया जिले के बलरामपुर (पश्चिम-बंगाल) में 18 साल के युवा भाजपा कार्यकर्ता त्रिलोचन महतो की बर्बरता से हत्या कर दी गई। उनका शव पेड़ पर लटका मिला। वहां एक पत्र मिला जिस पर बांग्ला भाषा में एक पोस्टर भी चिपका था। जिस पर लिखा था, 'यह शख्स पिछले 18 सालों से भाजपा के लिए काम कर रहा है, पंचायत चुनाव के बाद से ही तुमको मारने की योजना बनाई जा रही थी लेकिन बार-बार बच कर निकल रहे थे। अब तुम मर चुके हो, भाजपा के लिए काम करने वालों का यही अंजाम होगा'। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने ट्वीट कर कहा कि तृणमूल कांग्रेस हिंसा के मामले में माकपा से आगे निकल गई है।

 

झारखण्ड से सटा पुरुलिया जिला यहां पर बड़ी जनसंख्या वनवासियों की है। इस क्षेत्र में संघ विचार से प्रेरित वनवासी कल्याण आश्रम काफी काम करता है। अभी हाल में पश्चिम बंगाल में हुए पंचायत चुनाव में भाजपा मुख्य विपक्षी दल के रूप में सामने आई है। चूंकि पुरुलिया जिले में तृणमूल कांग्रेस का प्रभाव नगण्य है इसलिए अपनी हार से तिलमिलाए तृणमूल के गुंडों ने बर्बरता से भाजपा के कार्यकर्ता की हत्या कर दी। वहां धमकी भरा पत्र रखा ताकि भय का माहौल बनाया जा सके कि जो भी भाजपा के लिए काम करेगा उसका यही अंजाम होगा। उल्लेखनीय है कि जब से राज्य में पंचायत चुनाव हुए हैं तब से आज तक भाजपा के 22 कार्यकर्ताओं की राजनैतिक हत्याएं तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा की गई हैं।

इतना ही नहीं राज्य में एक महिला के गले में जूतों की माला डालकर उससे उठकबैठक करवाई गई। जो काम पहले माकपा के गुंडे करते थे वह काम पर तृणमूल के कार्यकर्ता करने लगे हैं। राज्य में पहले कांग्रेस का शासन फिर 34 साल तक वामपंथियों का शासन और अब तृणमूल के 6-7 साल के शासन के बाद पश्चिम बंगाल में गुंडागर्दी एक संस्कृति के रूप में विकसित हुई है। इसे गुंडा संस्कृति कहा जा सकता है। यहां की सारी राजनीति गुंडागर्दी व क्लब कल्चर से होती है। इन्हें शासन द्वारा आर्थिक सहायता मिलती है। इन क्लबों में शासित दल का राजनैतिक संरक्षण प्राप्त होता है। क्लबों का कार्य चुनाव के दौरान सत्ताधारी दल के लिए बूथ मैनेज करना व बूथ कैप्चरिंग करना होता है।

भाजपा इसके खिलाफ आवाज उठाती रहती है जिसे वर्तमान सरकार पचा नहीं पा रही है। अपना वर्चस्व घटते देखकर तृणमूल कांग्रेस भी उसी तरीके को अपना रही है जो केरल में माकपा करती आई है।

केरल में जिस तरह केरल में संघ और भाजपा के कार्यकर्ताओं की हत्याएं होती आ रही हैं उसी तरह पश्चिमी बंगाल में भी राजनैतिक हत्याओंको अंजाम दिया जा रहा है।

माकपा का कैडर तृणमूल कांग्रेस में आ गया

जो हमारे विचार से सहमत नहीं उसे जीने का अधिकार नहीं। वामपंथी अपने इसी सिद्धांत को सदैव मानते आए हैं। पश्चिम बंगाल में माकपा का ज्यादातर कैडर तृणमूल कांग्रेस में चला गया है। इसलिए पश्चिम बंगाल में वही हो रहा है केरल और त्रिपुरा में होता आया है।