कूटनीति और राजनीति में निपुण थे महाराणा
   दिनांक 16-जून-2018



महाराणा प्रताप कूटनीति में अद्वितीय थे। वे इस तथ्य से भली-भांति परिचित थे कि वे कभी अकबर के साथ सम्मानजनक समझौता नहीं कर सकते। इसका कारण मालदेव जैसे उदाहरण थे, तो उनका अपने स्वाभिमान से प्रेरित व्यक्तित्व एवं अपने पूर्वजों की मर्यादा भी थी। अत: महारणा ने कभी भी ऐसी गलती नहीं की जिससे अकबर को किसी भी प्रकार राजनीतिक लाभ प्राप्त हो सके। प्रताप ने कभी भी अपनी सुरक्षा नीति, अपने मनोभाव तथा विचार दूत पर जाहिर नहीं होने दिए भले ही उनके सजातीय क्यों न आए हों।
प्रताप एक व्यवहारिक कूटनीतिज्ञ थे तथा प्राचीन राजनीतिक सिद्धांतों से परिचित थे। अकबर ने दूसरे दूतमंडल के रूप में कुंवर मानसिंह को भेजा। यहां अकबर ने सजातीय को दूत के रूप में भेज कर दोहरा कूटनीतिक दावपेच चला था। मानसिंह को भेजने का एक कारण यह था कि मेवाड़, जो कि अपनी वंश परंपरा पर अभिमान करता था, उसे मुगलों की अधीनता में लाने हेतु राजपूत से बेहतर कोई अन्य नहीं हो सकता था। दूसरा, अकबर की अधीनता में रह चुका राजपूत शासक ही मुगलों की अधीनता में आने का नफा-नुकसान ज्यादा अच्छे से बता सकता था। यहां अकबर को दोहरा फायदा इस बात से था कि अगर किसी सम्मानजनक समझौते तक न पहुंचा जा सके तो राजपूताना के दो राजपूत वंश में विवाद हो जाए जो कि अकबर के लिए लाभदायक था। यहां अकबर नस्लीय कूटनीति का प्रयोग कर रहा था। उसके कूटनीतिक सिद्धांत बौद्धिक विचाराधारा से प्रभावित थे। इस विचारधारा की मुख्य विशेषता यह है कि यह शक्ति की राजनीति को महत्व देती है। इनके लिए संधि-वार्ता सैनिक अभियान का ही अंग मात्र है। प्रताप एवं अकबर के कूटनीति दांवपेच अपने समय के दो बेहद कुशल शासकों के संबंधों को निरूपित करते हैं।
आज विश्व को जरूरत प्रताप के सिद्धांतों की
प्रताप ने विश्व को कूटनीति के कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांत प्रदान किए जिनकी आज उसे सबसे ज्यादा जरूरत है। आज वह भले ही भारत हो या विश्व का कोई अन्य देश, पड़ोसी राज्यों के साथ संबंधों को लेकर उनमें खटास दिखाई देती है। वहीं प्रताप ने विश्व को बताया कि किस प्रकार पड़ोसी राज्यों से ऐसे मजबूत संबंधों का निर्माण करें कि जब कभी कोई तीसरी शक्ति आप पर आक्रमण करे तो पड़ोसी राज्य आपके साथ संघर्ष में सहयोग करें न कि बाधा बन के खड़े हो जाएं। प्रताप ने बताया कि पड़ोसी राज्य सदैव आपका शत्रु नहीं होता। यह विश्व के लिए वर्तमान में सबसे आवश्यक एवं प्रासंगिक विचार है।