भारतीय फौज मेरे बेटे का बदला जरूर लेगी ऐसा मेरा विश्वास है: मोहम्मद हनीफ

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आतंकियों ने धोखे से मेरे बेटे को अगवा किया और मार डाला। वो भारतीय सेना का जवान था आमने—सामने की जंग लड़ते तो वह 100 पर भी भारी पड़ता लेकिन वो कायर थे। कायरता पूर्ण तरीके से ही उन्होंने उसकी हत्या की। मैं फौजी हूं। मैंने अपने बेटे को फौज के उसूल सिखाए थे। फौज का पहला उसूल है किसी के साथ कुछ नजायज मत करो। यदि किसी को मदद की जरूरत है तो उसकी मदद करो। मेरा बेटा सचा सिपाही था। पर अब वह मेरा बेटा नहीं रहा। मेरा बेटा वह तब तक था जब तक मेरे पास था। अब जब वह शहीद हो गया तो पूरे देश का बेटा है। पुंछ जिले के सुदूर सलानी गांव के रहने वाले शहीद औरंगजेब के पिता मोहम्मद हनीफ ने पाञ्चजन्य से कुछ ऐसी बातें कहीं तो देश के सामने आना जरूरी है। प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश:-

 

शहीद औरंगजेब के पिता से मिलते सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत

शहीद औरंगजेब के पिता से मिलते सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत

आपका बेटा देश के लिए शहीद हुआ। आप खुद फौज में रहे हैं आपका बड़ा बेटा भी फौजी है। आप देश के सामने कैसे अपनी बात रखना चाहेंगे ?

फौज सिखाती है दूसरों की मदद करना। मैं ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं हूं लेकिन जब मैं 1979 में फौज में भर्ती हुआ तो मुझको ट्रेनिंग के दौरान एक बात बताई गई थी कि कहीं कोई मुसीबत में हो तो उसकी मदद करो। जब फौज का काफिला चल रहा होता है और रास्ते में यदि किसी आम नागरिक की गाड़ी भी खराब हो जाती है तो यह निर्देश होते हैं कि पहले उसकी मदद करें फिर आगे बढ़ें। रही बात मेरे बेटे के शहीद होने के बाद देश के सामने बात रखने की तो वह मेरा बेटा तब तक था जब तक वह मेरी गोद में था। फौज में जाने के बाद तो वह देश का बेटा हो गया। हां एक पिता होने के नाते मैं सिर्फ यह कहूंगा कि मुझे इंसाफ चाहिए।

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत आपके घर आए उन्होंने आपसे क्या कहा और क्या आपने उनके सामने अपनी कोई मांग रखी ?

जनाब ऐसा है ? मुझे फौज के सामने मांग रखने की कोई जरूरत नहीं। जनरल साहब हमारे दुख में शरीक होने आए थे। उन्होंने कहा कि सेना इसका बदला लेेगी। औरंगजेब की शहादत बेकार नहीं जाएगी। हमें इसी में शांति है। अब यदि फौज की बात करें तो फौज तो हमें पहले ही बिना मांगे सबकुछ दे रही है। मैं 1979 में जब भर्ती हुआ था तो 175 रुपए मेरी तनख्वाह थी। इसके बाद 1994 में रिटायर होने के बाद 2 हजार रुपए पेंशन पर घर आ गया। मेरा बड़ा बेटा भी फौज में है। फौज की वजह से हम अपना जीवन जी पा रहे हैं। मेरे पास बहुत पैसा नहीं है केवल तीन कैनाल जमीन है। जो कुछ है वह भारतीय फौज का ही दिया हुआ हैै। मुझे सिर्फ मेरे बेटे के लिए इंसाफ चाहिए जो भारतीय सेना मुझे दिलाएगी, मुझे इसका विश्वास है।

कश्मीर में जो हो रहा है उसके लिए आप किसको जिम्मेदार मानते हैं ?

सबसे पहले तो पाकिस्तान और दूसरे यहां का माहौल बिगाड़ने वाले मुसलमान लीडर जो आजादी की बात करते हैं। खुद तो वह बॉडीगार्डों के साथ अपने घरों में बंद रहते हैं। अपने बच्चों को विदेशों में तालीम दिलवाते हैं और यहां नौजवानों के दिमाग में जहर भरते हैं। एक आम कश्मीरी वो चाहे मुसलमान हो या हिंदू उसे कोई आजादी नहीं चाहिए। वह कश्मीर में चैन से रहता चाहता है। उसे सुकून की जिंदगी चाहिए। जो नौजवानों को बरगला रहे हैं उनके खिलाफ कदम उठाए जाने चाहिए।

मीडिया में जिस तरह सेना पर पत्थरबाजी की खबरें आती हैं। क्या कश्मीर के आम लोगों को केंद्र सरकार या सेना से कोई शिकायत है ?

जितना सरकार और भारतीय सेना कश्मीरियों के लिए करती है उतना कोई नहीं करता। हर मुसीबत में सेना लोगों की मदद करती है। आम कश्मीरी तो शांति से यहां रहना चाहता है। जो पत्थरबाजी करवाते हैं वह तो अपने बड़े घरों में बंद रहते हैं। जो लोग कश्मीर में आजादी की बात करते हैं उन्हें यह पता होना चाहिए की सस्ती दरों पर जो अनाज कश्मीरी खाते हैं वह आता कहां से है? यदि हमें पंजाब और दूसरे राज्यों से मिलने वाला अनाज व अन्य चीजें बंद हो जाएं तो आम कश्मीरी भूखे मर जाएंगे। जिहाद के नाम पर जो ये लोगों नौजवानों को भड़काते हैं, वह जिहाद के मायने ही नहीं जानते। अरे बेगुनाहों को मारना यह जिहाद ये नहीं है ये तो कुफ्र है। जिसके पास दीन है, जिसके पास कुराने शरीफ है वह ऐसा कतई नहीं कर सकता। जिहाद का मतलब यह नहीं है कि बेगुनाहों को मारो, छिपकर वार करो। हिम्मत है तो आमने—सामने की जंग करो।

कश्मीरी नौजवानों के लिए आप कुछ कहना चाहते हैं ?

जी हां, बिल्कुल कहना चाहता हूं। आज कश्मीर में अरबों—खरबों रुपया केंद्र सरकार खर्च कर रही है, बावजूद इसके यहां का माहौल बिगाड़ा जा रहा है। लोग विदेश जाते हैं ताकि पैसा कमा सकें तरक्की कर सकें। अरे आप लोग ऐसा काम करो कि किसी को विदेश जाने की जरूरत न पड़े। हिंदुस्तान की तरक्की हो। यदि हिंदुस्तान की तरक्की होगी तो कश्मीर की तरक्की होगी। ऐसी नजीर पेश करो कि लोग हिंदुस्तान आएं कश्मीर आएं। अपने मुल्क में जाकर यहां की तारीफ करें।