गठबंधन टूटने के बाद, दस खास बातें जो बोले राममाधव
   दिनांक 19-जून-2018

-भाजपा जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में शांतिपूर्ण तरीके से सरकार चलाने की कोशिश करती रही है, लेकिन पिछले एक साल से देखने में आ रहा है कि महबूबा सरकार भाजपा के साथ कतई  सहयोग नहीं कर रही थी।
-पीडीपी से अलग होने का फैसला देशहित और राष्ट्रहित को लेकर किया गया है।
-जम्मू कश्मीर में मीडिया की आजादी अब खतरे में आ गई है, मूर्धन्य पत्रकार शुजात बुखारी की जिस तरह हत्या की गई वह निदंनीय है।
-पिछले तीन सालों में घाटी के हालातों को शांतिपूर्ण करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्‍य का सभी तरह से साथ दिया है लेकिन महबूबा सरकार सहयोग नहीं कर रही।
- हम राज्य के विकास के लिए जो कर सकते थे वह कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी के नेतृत्व में चल रही केंद्र सरकार ने घाटी के विकास और अन्य कामों के लिए कुछ दिन पहले ही 18 हजार करोड़ की वित्‍तीय सहायता दी ।
-तीन दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में दो प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करके आए हैं, जो प्रदेश के विकास के लिहाज से काफी अहम हैं।
-राज्य के हालातों को ठीक करने के लिए मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने जो भी मदद मांगी केंद्र सरकार ने उन्हें वह दिया। इसके बाद भी वह घाटी में शांति कायम करने में असफल रही है।
-जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विकास कार्यों में राज्य की पीडीपी सरकार की ज्यादा दखलअंदाजी करने के कारण केंद्र सरकार काम नहीं कर पा रही है।
-कश्मीर में केंद्र सरकार जो काम करना चाहती है वो नहीं कर पा रही है. चूंकि प्रदेश में पूरी तरह से भाजपा की सरकार नहीं है, इसलिए विकास कार्यों करने के लिए भी भाजपा के नेताओं को परेशानी हो रही है।
-हमें इस बात का दुख है कि पीडीपी अपने दायित्वों का सही से निर्वहन नहीं कर पाई इसलिए हमें गठबंधन तोड़ने का फैसला लेना पड़ा