योग का कमाल 106 साल की हुईं दादी
   दिनांक 21-जून-2018

शरीर स्वस्थ तो सबकुछ स्वस्थ्य। योग से शरीर को कैसे स्वस्थ रखा जाता है और लंबी आयु कैसे पाई जा सकती है दिल्ली की पूठ कला गांव की 106 वर्षीय दादी भरपाई देवी इसका जीता-जागता प्रमाण है।

 

योग के माध्यम से ही वह स्वयं को आज तक स्वस्थ रख पाई हैं। पिछले 60 वर्षों से वह लगातार योग कर रही हैं। वह इस उम्र में भी वह न सिर्फ शांतिपूर्वक अपनी चारपाई पर बैठकर ध्यान करती हैं बल्कि योग के आसनों को भी अपनाते हुए अपनी दिन की शुरुआत करती हैं। वह नियमित रूप से योग-प्राणायाम के अलावा वज्रासन भी करती हैं और काफी देर तक इस आसन में बैठती हैं। इस आयु में योग करने का उनका जज्बा देखते ही बनता है जो युवाओं को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करता है। अक्सर महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह रहती हैं लेकिन कृषक परिवार से नाता रखने वाली भरपाई देवी उन महिलाओं में से हैं जिन्हें परिवार के साथ अपने स्वास्थ्य का भी उतना ही ख्याल है। यही वजह है कि इतनी लंबी आयु में वह शायद ही कभी बीमार पड़ी हों। भरपाई देवी पढ़ी-लिखी नहीं हैं लेकिन योग के महत्व को बहुत अच्छे से जानती हैं।

उम्र बढ़ने पर लिया योग का सहारा

भरपाई देवी ने बताया कि जब उनके बेटे चंद्रभान की नौकरी हो गई तब भी उन्होंने खेतों में काम करना नहीं छोड़ा और लगातार कड़ी मेहनत करती रहीं। इस दौरान उम्र बढ़ने पर उन्होंने योग करना शुरू किया ताकि वह खुद को स्वस्थ्य रख सकें। गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण लोगों को अपने स्वास्थ्य का ध्यान खुद ही रखना होता था इसलिए उन्होंने योग करना शुरू किया। सुबह के समय वह घर के बाहर और खेतों के आसपास वह टहलने जाया करती थी। इसके बाद घर पर ध्यान और प्राणायाम। उन्होंने बताया कि उन्होंने कई लोगों से योग के फायदे के बारे में सुना और तभी उसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया। उनके अनुसार योग करने के बाद जब वह घर के दूसरे कामों को करती तो खुद को अधिक उजार्वान महसूस करती थी इसलिए उन्हें उम्र बढ़ने पर भी उसका एहसास नहीं हुआ।

102 बरस की उम्र में कूल्हा टूटा पर नहीं मानी हार

जब वह 102 वर्ष की थी तब पैर फिसल जाने के कारण गिरने से काफी चोट आई उनका कूल्हा टूट गया। डॉक्टरों ने उम्र का हवाला देकर ऑपरेशन में जान का खतरा बताया लेकिन भरपाई देवी ने हार नहीं मानी। उन्होंने डॉक्टर से ऑपरेशन करने को कहा। उनकी जिद के आगे किसी की नहीं चली। डॉक्टरों को उनके कूल्हे का ऑपरेशन करना पड़ा जो कि सफल रहा। इस उम्र में कूल्हे का आॅपरेशन सफल होने को डॉक्टरों ने भी चमत्कार माना। भरपाई देवी के पौत्र अजीत लगभग 53 साल के हैं। उन्होंने बताया कि डॉक्टर के अनुसार इतनी अधिक आयु में कोई भी आॅपरेशान काफी चुनौतिपूर्ण और खतरों से भरा होता है लेकिन उनका ऑपरेशन सफल रहा क्योंकि योग और अपनी आदर्श दिनचर्या से उनका शरीर स्वस्थ्य है। यही वजह है ऑपरेशन के बाद उनका स्वास्थ्य जल्द ही ठीक हो गया और आज वह अपने परिवार के साथ खुशी से जीवन गुजार रही हैं।

भरपाई देवी शुरूआत से ही खेती और पशुपालन से जुड़ी हुई ग्रामीण महिला हैं। गांव में जन्मी बचपन से खेती के काम जानती हैं। उनका जन्म 1912 में हुआ था। भरपाई देवी के पिता दानी सिंह किसान थे। पिता के साथ वह खेतों में काम करती थी। खान-पान में भी वह बचपन से सतर्क रहती थीं। अधिक वसा की चीजों का इस्तेमाल उन्होंने नहीं किया और पत्तेदार सब्जियों के साथ दूध-दही खाया। अपने बच्चों को भी उन्होंने यही सीख दी। घर में मवेशी होने की वजह से उन्हें पशुपालन की भी अच्छी जानकारी है। 18 वर्ष की आयु में उनकी शादी हो गई। उनके दो बेटे और तीन बेटियां हैं लेकिन करीब 30 वर्ष की आयु में ही उनके पति भरत सिंह और बड़े बेटे का निधन हो गया। इसके बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। मुसीबत की इस घड़ी में भी उन्होंने हार नहीं मानी और मेहनत के साथ खेतों में काम किया और परिवार का भरण-पोषण किया।

सुबह पांच बजे से पहले ही उठ जाती हैं

भरपाई देवी के पौत्र बताते हैं कि दादी सुबह पांच बजे से पहले उठ जाती हैं। इसके बाद वह गर्म पानी पीती हैं। नित्य क्रिया के बाद अपनी खाट पर बैठकर ही ध्यान लगाती हैं और उम्र के हिसाब से जो आसन हो पाते हैं वह करती हैं। वह आधा घंटे तक अनुलोम-विलोम करती हैं। इसके बाद बाकी के आसन करती हैं। बचपन से वह दादी को ऐसा करते हुए देखते आ रहे हैं।