माता-पिता एवं गुरू से प्राप्त संस्कारों से होती है प्रगति
   दिनांक 26-जून-2018

सामाजिक समरसता मंच एवं सेवा भारती, गुजरात की ओर से गत दिनों यूपीएससी एवं जीपीएसई परीक्षा में इस वर्ष उत्तीर्ण हुए अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल श्री ओ पी. कोहली जहां मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे तो वहीं विशेष अतिथि के रूप में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री अनील प्रथम की गरिमामय उपस्थित रही। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख श्री सुनील भाई मेहता ने कहा कि मनुष्य जीवन में तीन पड़ाव आते हैं। पहला पड़ाव तब आता है, जब विद्यार्थी कॉलेज में प्रवेश लेता है। वहां से उसके भविष्य की शुुरुआत होती है। दूसरा पड़ाव आता है, जब वह कॉलेज से पढ़ाई पूरी करके आर्थिक उपार्जन के लिए कार्य करता है और तीसरा पड़ाव तब जब गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करता है और परिवार के निर्वहन का दायित्व उस पर आता है। ये तीनों पड़ाव जीवन की दिशा तय करने का काम करते हैं। यदि दिशा ठीक नहीं है तो भविष्य अंधकारमय होगा, यह तय है। इस दौरान सबसे अधिक सावधानी रखने की आवश्यकता रहती है। उन्होंने कहा कि अपनी सफलता में माता-पिता और गुरु का सदैव स्मरण रहना चाहिए, क्योंकि इनकी दी शिक्षाएं हमें सफलता दिलाती हैं। जीवन में हम चाहे जहां पहुंचें पर माता-पिता और गुरु के ऋण को याद रखना चाहिए। (विसंकें, गुजरात)