आपातकाल के बाद इंदिरा हारीं तो जीती थी देश की जनता

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हां तब मैं बच्चा तो था किन्तु इतना छोटा भी नहीं कि आपातकाल की घटनाओं से अनभिज्ञ रहता। नवीं कक्षा में पढ़ता था तब मैं। मुझे याद है 26 जून, 1975 की सुबह पिताजी सुबह आठ बजे की खबरे ट्रांजिस्टर में सुनते हुए दाढ़ी बना रहे थे। हिमाचल के किन्नौर जिला के कल्पा हाई स्कूल में हेडमास्टर थे वे तब। पहली खबर कि 25 जून की रात्रि को देश में आपातकाल की घोषणा हो गई है। देश के नागरिकों के मूलभूत अधिकार स्थगित कर दिए गए हैं। देवकीनन्दन पाण्डेय समाचार पढ़ रहे थे। उनकी कड़क आवाज में पिताजी को आपातकाल की कड़क समझ में आ रही थी। तब मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ कि पिताजी इतने गम्भीर क्यों हो गए हैं।