मलक्का जलडमरूमध्य में भारत ने की चीन की घेराबंदी
   दिनांक 04-जून-2018
बी.एस. सचिन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिन्द प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मलक्का जलडमरूमध्य के दोनों ओर बसे इंडोनेशिया एवं सिंगापुर के साथ बेहद अहम रक्षा समझौते करके दक्षिण पूर्वी एशियाई क्षेत्र और हिन्द महासागर में चीन की महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाने का पुख्ता इंतज़ाम कर दिया है।

 
इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर की पांच दिवसीय यात्रा का पूरा एजेंडा रक्षा सहयोग को पुख्ता बनाकर मलक्का जलडमरू मध्य को दोनों छोरों पर सैन्य किलेबंदी का मार्ग प्रशस्त करना था। इसके साथ ही आर्थिक सहयोग के करार करके इन देशों की चीन पर निर्भरता कम करने का भी प्रयास किया गया। भारत के इस प्रयास को आसियान देशों की ओर से पूरा समर्थन भी मिल रहा है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ गत माह वुहान में अनौपचारिक शिखर बैठक में परस्पर विश्वास को बढ़ाने में अहम सफलता हासिल करने के बाद श्री मोदी ने हिन्द प्रशांत क्षेत्र में चीन की सैन्य चुनौती पर अंकुश लगाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री ने सिंगापुर से ही चीन को संदेश भी दिया कि हिन्द प्रशांत क्षेत्र में प्रतिद्वन्द्विता की बजाय सहयोग के रास्ते पर चल कर ही वर्तमान सदी को एशिया की सदी बनाया जा सकता है।
श्री मोदी की इस असाधारण पहल को सिंगापुर में शांगरी ला डायलॉग में अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने प्रतिध्वनित किया। श्री मैटिस ने श्री मोदी के विचारों की भूरि भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि हमें पहचानने की ज़रूरत है कि हिन्द प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका एवं महत्व सहज स्वाभाविक रूप से बढ़ रहा है।
श्री मोदी ने सिंगापुर से रवाना होने से पहले चांगी नौसैनिक अड्डे का दौरा किया और सिम्बैक्स (सिंगापुर इंडिया मैरीटाइम बाइलैटेरल एक्सरसाइज़) के 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारत और सिंगापुर की नौसेनाओं को बधाई दी। वह सिंगापुर की यात्रा पर आये भारतीय नौसेना के पोत आईएनएस सतपुड़ा पर गये और भारतीय नौसैनिकों से भेंट की। उन्होंने सिंगापुर के नौसैनिक अधिकारियों से भी भेंट की।
श्री मोदी 29 मई को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंचे थे और 31 मई को मलेशिया में संक्षिप्त प्रवास पर वहां के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद से भेंट करके सिंगापुर पहुंचे थे। श्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो और सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग के साथ द्विपक्षीय बैठकों में रक्षा एवं आर्थिक सहयोग के कई समझौतों पर हस्ताक्षर किये।
इंडोनेशिया में 30 मई को श्री मोदी एवं श्री विडोडो की द्विपक्षीय शिखर बैठक में भारत और इंडोनेशिया ने अपने रक्षा सहयोग समझौते का नवीनीकरण करने के साथ ही अंतरिक्ष, रेलवे, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के 15 करारों पर हस्ताक्षर किये थे।
चीन की चुनौती पर अंकुश लगाने के लिए भारत और इंडोनेशिया ने मलक्का जलडमरूमध्य के समीप और अंडमान निकोबार द्वीप समूह के निकट सबांग द्वीप पर विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र में निवेश के करार पर भी हस्ताक्षर किये हैं। इंडोनेशिया ने मई की शुरुआत में भारत को सबांग में निवेश की इजाज़त दी है। हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती पैठ ने भारत के अलावा इंडोनेशिया एवं अन्य आसियान देशों की भी चिंता बढ़ा दी हैं। इसी वजह से सबांग को लेकर सहमति बनी है।
सामरिक दृष्टिकोण से से बेहद खास यह बंदरगाह द्वीप सबांग अंडमान निकोबार द्वीप समूह से 710 किलोमीटर की दूरी पर है। खास बात यह है कि सबांग बंदरगाह में 40 मीटर की गहराई होगी जो पनडुब्बी समेत किसी भी तरह के जहाज़ के लिए मुफ़ीद होगी। इंडोनेशिया ने भारत को इस बंदरगाह के सीमित सैन्य उपयोग की भी इजाज़त दे दी है। चीनी विस्ताइरवादी नीति के कारण आरंभ से ही चीन की नजर इस बंदरगाह पर टिकी है। इसकी सामरिक उपयोगिता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान ने इस द्वीप का इस्ते माल अपने सैन्यड ठिकाने के रूप में किया था। जापान ने अपने बेड़े के जहाज यहां खड़े किए थे। यही कारण है कि चीन ने सबांग इलाके के इस्तेमाल और विकास के प्रति दिलचस्पी दिखाई थी।
इसी प्रकार से सिंगापुर में श्री मोदी एवं श्री ली सीन लूंग के साथ बैठक में दोनों नौसेनाओं के बीच लॉजिस्टिक सहयोग और आतंकवाद के मुकाबले के लिए साइबर सुरक्षा सहयोग सहित सात समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये और समग्र आर्थिक सहयोग समझौते की दूसरी समीक्षा पूरी करके इसके उन्नयन की घोषणा की गयी। नौसेनाओं के बीच समझौते में नौसैनिक पोतों, पनडुब्बियों एवं नौसैनिक विमानों के एक-दूसरे के यहां आवागमन, समन्वय, लॉजिस्टिक एवं सर्विस सपोर्ट के करार का क्रियान्वयन शामिल है। इस मौके पर श्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों ने अपनी सामरिक साझेदारी में रक्षा और सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया है। हम इन संबंधों में लगातार वृद्धि का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा, “शीघ्र ही हम त्रिपक्षीय नौसैनिक अभ्यास भी शुरू करेंगे। बार-बार होने वाले अभ्यासों तथा नौसैनिक सहयोग को ध्यान में रखते हुए नौसेनाओं के बीच लॉजिस्टिक समझौता संपन्न होने का भी मैं स्वागत करता हूं।”
चीन की घेराबंदी के लिहाज से दो अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं सिंगापुर से सटे और मलक्का जलडमरूमध्य में सक्रिय मलेशिया के नये नेतृत्व के तालमेल दुरुस्त रखने की कवायद के तहत कुआलालंपुर में रुक कर नये प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद से मिलना तथा शांगरी ला डायलॉग में भाग लेना रहा। कुआलालंपुर में श्री मोदी और श्री महातिर मोहम्मद के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया कि रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने को लेकर दोनों नेताओं के बीच सार्थक वैचारिक आदान प्रदान हुआ। वहीं मलेशिया के विदेश मंत्रालय ‘विस्मा पुत्र’ ने कहा कि बैठक में भारत एवं मलेशिया के बीच हज़ारों साल पुराने रिश्तों की आधारभूत शक्ति को रेखांकित किया गया। इस यात्रा से दोनों देशों की हमारी रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने की दृढ़ प्रतिबद्धता का पता चला है।
सिंगापुर में हिन्द प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा एवं शांति के विषयवस्तु पर आधारित शांगरी ला डॉयलॉग में श्री मोदी ने भारत के दर्शन को सामने रखा और चीन को दक्षिण चीन सागर में टकराव से बचकर सहयोग के रास्ते पर आने का संदेश देते हुए कहा कि वर्तमान सदी एशिया की बनानी है तो प्रतिद्वन्द्विता का रास्ता छोड़कर सहयोग के साथ बढ़ना होगा। उन्होंने कहा, “एशिया की ‘प्रतिद्वंद्विता’ क्षेत्र को पीछे धकेल देगी, जबकि सहयोग इसे सही आकार देगा।” उन्होंने कहा “एशिया और दुनिया का अच्छा भविष्य होगा, यदि भारत और चीन भरोसे और आत्मविश्वास के साथ मिलकर काम करें।”
श्री मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई अनौपचारिक बातचीत के बाद उनका यह बयान कूटनीतिक जगत में बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस बीच हिन्द प्रशांत क्षेत्र को लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस की प्रधानमंत्री श्री मोदी से मुलाकात को भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार के अनुसार श्री मोदी और श्री मैटिस की बातचीत हिन्द प्रशांत क्षेत्र पर प्रधानमंत्री के व्याख्यान के संदर्भ में हुई है। करीब एक घंटे तक एकांत में हुई बातचीत के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी मौजूद थे।
बाद में श्री मैटिस ने अपने संबोधन में भी हिन्द प्रशांत क्षेत्र को लेकर श्री मोदी के विचारों का अनुमोदन किया और भारत की प्रमुख भूमिका को रेखांकित किया। श्री मैटिस ने अमेरिकी नौसेना की एशिया प्रशांत कमान का नाम हिन्द प्रशांत कमान किये जाने के बारे में सवालों के जवाब में कहा कि ट्रंप प्रशासन ने एशिया प्रशांत क्षेत्र की जगह ‘स्वतंत्र एवं खुले हिन्द प्रशांत क्षेत्र’ शब्द का प्रयोग भारत की भूमिका को मान्यता देने के लिए शुरू किया है। उन्होंने कहा कि जैसा कि हमने अभी देखा है कि हिंद महासागर में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत अपनी आर्थिक प्रगति के साथ स्वत: ही प्रमुख भूमिका में आ रहा है। हमें यह पहचानने की जरूरत है कि हिंद महासागर और भारतीय उपमहाद्वीप में भारत का महत्व निश्चित रूप से बढ़ रहा है।
स्वाभाविक ही है कि भारत के इन कदमों से चीन की त्यौरियां चढ़ गईं हैं। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र में लिखा है कि भारत सबांग के सामरिक द्वीप तक पहुंच बनाता है तो वह अनुचित रूप चीन के साथ सामरिक प्रतिस्पर्धा में आ जाएगा और अपने ही हाथ जला बैठेगा। मुखपत्र में यह भी कहा गया कि हमारा मानना है कि भारत चीन के खिलाफ सैन्य होड़ में नहीं आना चाहेगा। भारत की बुद्धिमत्ता की परीक्षा तब होगी जब वह मलक्का जलडमरूमध्य में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के साथ-साथ चीन एवं अन्य देशों से टकराव का सामना करेगा। ज़रा सी भी गलती से भारत को गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।