ममता राज में बंगाल लहूलुहान
   दिनांक 04-जून-2018
                                                                                                                                                         
 अम्बाशंकर वाजपेई
पुलिस प्रशासन कहीं नहीं होती लोगों की सुनवाई, गुनाह जैसा है पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ता होना,तृणमूल के गुंडे कर रहे बर्बरता

 
  ममता  बनर्जी शासित पश्चिमी बंगाल का चेहरा कितना भयानक हो चुका है ये दिल्ली में बैठकर नहीं जाना जा सकता। ममता राज में कितनी बर्बरता से भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की जा रही है ये देखकर आपका दिल दहल उठेगा। तृणमूल के गुंडों द्वारा मारे गए भाजपा कार्यकर्ताओं की कुछ   तस्वीरें  तो इतनी वीभत्स हैं कि हम अपनी वेबसाइट पर उन्हें नहीं दिखा सकते। पश्चिमी बंगाल में तृणमूल के गुंडों ने बर्बरता की सारी सीमाएं पार कर दी हैं। हाल ही के पंचायत चुनावों में 22 से ज्यादा भाजपा कार्यकर्ताओं की निर्ममता से हत्या कर दी गई। चुनावों के बाद भी चुन—चुनकर भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। लोग डरे हुए हैं। सैकड़ों लोगों ने अपना घर छोड़ दिया है।

डर की राजनीति कर रही तृणमूल कांग्रेस

पश्चिम-बंगाल में अभी हाल में हुए पंचायत चुनाव में 22 से भी ज्यादा बीजेपी कार्यकर्ताओं की निर्मम हत्या की गई। इतिहास गवाह है कि दुनिया का वह क्षेत्र जहां वामपंथियों का शासन रहा उसने अपने विचार से इतर जाने वालों को बर्बरता से मार दिया। वामपंथी राज का अर्थ है या तो उनके आगे घुटने टेक दो या फिर मारे जाओ या फिर खामोश रहो।

भारत के पश्चिम-बंगाल, केरल और त्रिपुरा राज्यों में लंबे समय तक वामपंथियों का शासन रहा है। पश्चिम-बंगाल में 34 साल से भी ज्यादा माकपा का शासन रहा है। वामपंथियों का एकछत्र शासन प्रशासन में ही नहीं बल्कि शासन के सभी संस्थानों में रहा है। वामपंथी विचारधारा को फ़ैलाने के लिए उन्होंने किसी भी स्तर पर जाकर काम किया और अपने कार्यकर्ताओं को शासन व प्रशासन के संस्थानों में चुनचुन कर भरा गया। पश्चिम-बंगाल में अपने 34 साल से ज्यादा के शासन काल में वामपंथियों ने पंचायत सिस्टम में अपना वर्चस्व कायम कर लिया और पूरा का पूरा तंत्र समितियों के माध्यम से चलने लगा। यहां तक कि बंगाल में नवरात्र के समय होने वाली दुर्गापूजा जिसे देखने के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं उसका संचालन भी वामपंथी समितियों द्वारा ही किया जाता है।

अब वामपंथी तृणमूल कांग्रेस में शाामिल हो गए हैं
2011 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस के नाम से अपनी पार्टी बनाने वाली ममता बनर्जी सत्ता में आईं। वामपंथियों से लोगों को छुटकारा मिला। 2011 के विधान सभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी को प्रचंड बहुमत से जीत मिली। राजनीतिक विचारक, राजनीतिक दलों और मीडिया ने इसको वामपंथी शासन का अंत कह कर प्रचारित किया लेकिन वह ये बात कहने से हिचकते रहे की वामपंथियों के जो समर्पित कार्यकर्ता थे वे गए कहां कहां? दरअसल बड़ी संख्या में वामपंथी विचारधारा वाले लोग तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए ताकि वे सत्ता में रह सकें। अब ममता राज में भी वही सब शुरू हो गया तो वामपंथियों के शासन के दौरान होता था। 2011 से भले ही पश्चिमी बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार है लेकिन जैसा खून-खराबा गुंडागर्दी और अपने से विपरीत विचार रखने वालों की निर्मम हत्याएं माकपा के शासन काल में हुई ठीक वैसी ही ममता बैनर्जी के शासन काल में अभी तक जारी है। हालिया दो घटनाएं इसकी गवाह हैं।
मई,2018 में पश्चिम-बंगाल में पंचायत चुनाव में जब प्रत्याशियों द्वारा नामांकन किया जा रहा था तो तृणमूल के गुंडों ने भाजपा के कार्यकर्ताओं को नामांकन नहीं करने दिया गया उनके साथ मारपीट की गई। जो मान गया वो ठीक नहीं तो उसे रास्ते से हटा दिया गया।

​तृणमूल को अपनी जमीन खोने का डर
दरअसल पंचायत चुनावों में भाजपा ने अपनी उपस्थिति दमदार तरीके से दर्ज की है। भाजपा जहां हारी भी है वहां भी उसने इतने वोट लिए हैं कि तृणमूल कांग्रेस को लग रहा है कि लोग उससे छिटक रहे हैं इसलिए अब वह डर की राजनीति कर रही है। तृणमूल कांग्रेस में शामिल वामी गुंडे भाजपा कार्यकर्ताओं की उसी तरह से हत्या कर रहे हैं जैसे वह केरल और त्रिपुरा में करते आए हैं।

इन भाजपा कार्यकर्ताओं की हुई हत्या

4 अप्रैल को बंकुरा में भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता अजित मुर्मू (35) की तृणमूल के गुंडों ने उनकी निर्ममता से हत्या कर दी।

06 अप्रैल को बौतिया नैहाटी बीरभूमि में भाजपा कार्यकर्ता ललतू दास को पुलिस ने इसलिए पकड़ने की कोशिश की क्योंकि उसकी साइकिल में जय श्रीराम का ध्वज लगा हुआ था। इस कारण वह सड़क पर गिर अया और पीछे आ रहे एक ट्र​क से कुचलकर उसकी मौत हो गई।
09 अप्रैल को पश्चिम मिदनापुर में भाजपा की प्रत्याशी जमुना मुर्मू के पति बहादुर मुर्मू की तृणमूल के गुंडो ने सिर्फ इसलिए हत्या कर दी क्योंकि गुंडे चाहते थे कि वह गांव में रहें तो भाजपा के लिए काम न करें
09 अप्रैल 24 साउथ परगना में पंचायत चुनाव के समय (बूथ न 251)भाजपा प्रत्याशी के प्रोपोजर सुसंत प्रधान को तृणमूल कांग्रेस के गुंडों ने बुरी तरह पीटा। अस्पताल में भर्ती सुसंत की हार्टअटैक से मौत हो गई।
22 अप्रैल बालुरघाट, दक्षिण दिनाजपुर में भाजपा कार्यकर्ता गोपाल गुइन को तृणमूल के गुंडों द्वारा बुरी तरह पीटा गया। इसके बाद उन्हें ट्रक के नीचे कुचलकर मार डाला।
23 अप्रैल बीरभूमि के सिउरी ब्लाक नंबर 1 बीडीओ ऑफिस के सामने शेख दिलदार की तृणमूल के गुंडों ने गोली मारकर हत्या कर दी।
26 अप्रैल को चन्द्रकोना-1, खिर्पाई-4, घटाल, भाजपा प्रत्याशी कृष्णा रानी रे के पति सुजीत रे पर दबाव बनाया गया कि उनकी पत्नी अपना नामांकन वापस ले। जब उन्होंने इंकार किया तो उन्हें बुरी तरह पीटा गया। बुरी तरह अपमानित सुजीत रे ने आत्महत्या कर ली।
07 मई को चोपरा, उत्तर दिनाजपुर में भाजपा कार्यकर्ता अमीरुल इस्लाम (30) की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
11 मई को अम्तार्ड बलरामपुर में भाजपा के कार्यकर्ता जगन्नाथ टुडू पर तृणमूल के गुंडों ने लोहे की सरिया और हथौड़े से बर्बरता पूर्वक मारा। अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया।
11 मई को लक्ष्मीसागर अंचल बंकाठी क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ता अजित घोष को तृणमूल के गुंडों द्वारा बुरी तरह पीटा गया बाद में अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया।

12 मई पश्चिम मेदिनीपुर में भाजपा कार्यकर्ता मोनू हंसदा की धारदार हथियारों ने तृणमूल के गुंडों ने हत्या कर दी। इसी क्षेत्र के दासपुर ब्लाक-1, टाटालपुर गांव, सरबेरिया अंचल में तातालपुर के बूथ सचिव सुखदेव मैटी को तृणमूल के गुंडों ने इसलिए मार डाला क्योंकि उनके परिवार के सदस्य भाजपा प्रत्याशी थे।

चोवरोंगी गोपालपुर, ब्लाक-II, बूथ न 121, कुचबिहार में भाजपा कार्यकर्ता दुलाल भौमिक की पोलिंग बूथ के अंदर पीट—पीटकर हत्या कर दी गई।
शिकंदारपुर, कटाबरी, मालीगांव, खुसमुन्दी विधानसभा में भाजपा कार्यकर्ता बिषु टुडू की इसलिए हत्या कर दी गई क्योंकि वह भाजपा प्रत्याशी के चुनाव में नारे लगा रहे थे।
तंगरा, ब्लाक-चपरा में भाजपा कार्यकर्ता जयदेव प्रान्ती ( 43) की तृणमूल के गुंडों ने हत्या कर दी।
24 मई गांव-मिलेरमाथ, संतिपुर, हरिपुर, संगसद-4, नदिया जिला भाजपा के बूथ अध्यक्ष बिप्लब शिकदर को तृणमूल के गुंडों ने गोली मार दी।

29 मई गांव-सुपुर्दि, बलरामपुर मंडल, पुरुलिया में भाजपा कार्यकर्ता त्रिलोचन महतो (18) की तृणमूल के गुंडों ने हत्या कर दी। उनके शव को पेड़ पर टांगकर वहां एक पत्र छोड़ा जिसमें भाजपा समर्थक होने पर उसकी हत्या कर दी गई। उसके पिता हरिराम महतो भाजपा के मंडल सचिव हैं