श्रीजगन्नाथ मंदिर के रत्नभंडार की चाबी हुई गुम
   दिनांक 05-जून-2018

प्रशासन की लापरवाही पर पुरी गोवर्धन पीठ के शंकरार्चा स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने जताई चिंता और इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की

समन्वय नंद

मंदिरों के प्रबंधन के नाम पर सरकारें व प्रशासन किस ढंग से व कितनी लापरवाही से काम करती हैं इसका उदाहरण पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर में देखने को मिला है। विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार जहां भगवान श्री जगन्नाथ जी के रत्न व आभूषण आदि रहते हैं उसकी गुम हो गई है। अब रत्नभंडार में जो चीजें हैं उनके संबंध में भी संशय उत्पन्न हो गया है कि कहीं वहां से किसी ने कुछ चुराया तो नहीं है। पुरी गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने इस मामले पर चिंता व्यक्त की है। वहीं इस मामले में राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन भी सवाल उठा रहे हैं। मामला अत्यंत संवेदनशील होने के कारण मुख्यमंत्री नवीन पटनायक न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।

 

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा कि इस मामले में हाइकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश द्वारा जांच की जाएगी तथा तीन माह के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी। किन परिस्थितियों में चाबी गुम हुई इसकी जांच यह कमिशन करेगा।

क्या है रत्न भंडार

रत्न भंडार श्रीजगन्नाथ जी के रीति नीति से जुड़ा हुआ है। पहले अनेक राजाओं ने मंदिर को जो भारी मात्रा में सोने व अन्य आभूषण दान किया है वह यहां रखा जाता रहा है। मंदिर परिसर में ही रत्नभंडार स्थित है।

चाबी गुम होने का कैसे पता चला

रत्नभंडार के भवन की स्थिति की जांच के लिए पिछले दिनों ओडिशा हाइकोर्ट ने एएसआई को निर्देश दिया था। एएसआई के अधिकारियों के साथ साथ पुरी श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन के अधिकारी व जिला प्रशासन के अधिकारी भी गत 4 अप्रैल को गए। यह टीम जब रत्नभंडार में जा कर भीतर के रत्नभंडार को खोलने का प्रयास किया तब पता चला की भीतर के रत्नभंडार की चाबी ही नहीं है। नियम के अनुसार इस चाभी को पुरी के जिलाधिकारी के तत्वावधान में राजकीय कोष में रहना चाहिए था। चाबी न होने के कारण टीम बिना रत्नभंडार की जांच किए बाहर से ही वापस लौट गई।

इसके बाद श्रीमंदिर प्रबंधन समिति की बैठक में जो विवरण लिखा गया है उसमें इस बात का उल्लेख किया गया है कि रत्नभंडार की चाबी मिल नहीं रही है। मीडिया द्वारा इस मुद्दे को उठाये जाने के बाद पुरी के गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने इस पर सवाल उठा कर जांच करने की मांग की। इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने इस समस्या से अपने आप को दूर करने के लिए न्यायिक कमिशन के गठन की घोषणा कर दी।

गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की । उन्होंने कहा कि यह प्रकरण स्पष्ट करता है कि सरकार व मंदिर प्रशासन अपने दायित्वों का निर्वहन करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले तथा रत्न भंडार की सुरक्षा पर ध्यान दें।

राज्य सरकार द्वारा इस मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिये जाने को लेकर भी सवाल उठा है। अभी तक राज्य सरकार ने जो न्यायिक जांच के आदेश दिये हैं उनकी रपटें आने में कई साल लगते हैं। इनमें से अनेक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाती। इन रिपोर्टों पर कोई ठोस कार्रवाई भी होने का प्रमाण नहीं है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को लेकर न्यायिक जांच के आदेश देना इस मामले से बच निकलने व मामले को ठंडे बस्ते में डालने का प्रय़ास माना जा रहा है। इसके खिलाफ भाजपा समेत अन्य राजनैतिक दलों ने इस निर्णय को लेकर राज्य सरकार को कठघरे में खडा किया है। भाजपा ने कहा है कि इस मामले में दोषी के खिलाफ आपराधिक मामला क्यों दर्ज नहीं किया जा रहा है।