सेवा कार्य में प्रसिद्धि की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए
   दिनांक 06-जून-2018

गत दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने नई दिल्ली के मावलंकर सभागार में संघ के सेवा विभाग की वेबसाइट और सेवागाथा एप का लोकार्पण किया।


 

कार्यक्रम को संबोधित करते श्री दत्तात्रेय होसबाले

इस अवसर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि दैवीय, प्राकृतिक आपदाओं के समय सबसे पहले संघ के स्वयंसेवक ही पहुंचते हैं, अब यह बात समाज सहज रूप से मानने लगा है। संघ स्वयंसेवकों के जरिए समाज के संकट काल में लोगों की संवेदनाएं जगाने का कार्य करता है। मजदूर, अभावग्रस्त लोगों की जहां जो आवश्यकता हो, वहां स्वयंसेवक उसे समाज के माध्यम से पूरा करते हैं।

स्वामी विवेकानंद का सन्दर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि भूखे व्यक्तियों को प्रवचन देने से पहले उनको रोटी दो, यही उनके लिए उद्धार है। पहले उनकी मूल आवश्यकताओं को पूरा करो, बाद में उनमें अध्यात्म जागृत करो। उन्होंने आगे कहा कि सेवा कार्य में प्रसिद्धि की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए, उससे सेवा का महत्व नष्ट हो जाता है। किन्तु लोगों में सेवा की प्रेरणा जगाने के लिए संवाद करना चाहिए। इसलिए सेवा के अपने कार्य में गुणात्मक वृद्धि के लिए यह वेबसाइट शुरू की गई है।

कार्यकर्ता आपस में अनुभवों का आदान-प्रदान करें। संघ की 52,000 शाखाएं हैं, शाखा द्वारा छोटे-छोटे सेवा कार्य करें, उससे और लोग इन सेवा कार्यों से जुड़ें। इसके लिए संस्थाओं, चंदे-रसीद की आवश्यकता नहीं है। समाज के विभिन्न वर्गों की सेवा के लिए संस्थागत कार्य की आवश्यकता होती है, सेवा भारती इस तरह के कार्य कर रही है। मेरा समय, धन, ज्ञान, अनुभव ईश्वर की संपत्ति है, इसको वंचितों को समर्पित करना ईश्वर को ही अर्पण करना है, यह ईश्वर की ही सेवा है। जैसे तुलसी की माला हृदय को शांति देती है, वैसे सेवा कार्यों की माला हृदय को शांति प्रदान करती है।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से उपस्थित केंद्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि सेवा भारती समाज में अभावग्रस्त लोगों के बीच जाकर उन्हें सहारा देने का काम कर रही है। राष्टÑीय स्वयंसेवक संघ, दिल्ली प्रान्त के संघचालक श्री कुलभूषण आहूजा ने गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर उत्तर क्षेत्र के सह क्षेत्र कार्यवाह श्री विजय कुमार एवं दिल्ली प्रान्त प्रचारक श्री हरीश सहित अन्य विशिष्टजन उपस्थित थे।