‘‘नदियों की पूजा के साथ ही उनकी स्वच्छता के प्रयास करने होंगे ’’
   दिनांक 06-जून-2018

‘‘नदियों को सिर्फ पूजने की बजाए, बचाने की जरूरत है। हम नर्मदा को मां कहते हैं, किंतु हमने उसका क्या हाल बना रखा है, यह किसी से छिपा नहीं है। हमारी कथनी और करनी में अंतर ही वह एकमेव कारण है, जिसके चलते हम एक हजार साल तक गुलाम रहे। यह प्रवृत्ति आज भी कम नहीं हुई है।’’ उक्त बात ख्यातिप्राप्त लेखक और पर्यावरणविद् अमृतलाल वेगड़ ने कही। वे पिछले दिनों माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल की ओर से डी़ लिट़ (विद्या वाचस्पति) की मानद उपाधि से सम्मानित किये जाने के अवसर पर बोल रहे थे। स्वास्थ्यगत कारणों से श्री वेगड़ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में नहीं आ सके थे। ऐसे में विश्वविद्यालय के कुलपति श्री जगदीश उपासने ने उनके निवास पर जाकर उन्हें सम्मानित किया।

 

श्री अमृतलाल वेगड़ को विद्या वाचस्पति की उपाधि प्रदान करते (बाएं) श्री जगदीश उपासने एवं अन्य

 इस अवसर पर श्री वेगड़ ने कहा कि हमने हर विषय पर ऊंची-ऊंची बातें तो कीं, पर कर्म का खाता खाली है। इसलिए हमें नर्मदा सहित अपनी सभी नदियों की पूजा करने, दीप जलाने के साथ उनकी स्वच्छता और निर्मल प्रवाह को बनाए रखने के लिए खास प्रयास करने होंगे।
 
श्री जगदीश उपासने ने कहा कि अमृत लाल जी हमारी ऋषि परंपरा के उत्तराधिकारी हैं। उन्होंने अपना सारा जीवन लोकसंचार को समर्पित कर दिया। वे सच्चे संचारकर्ता हैं, क्योंकि कोई भी संचार समाज के लिए होता है और वही संचार सार्थक है, जिसमें लोकमंगल की भावना निहित हो। उनका पूरा जीवन ही एक सार्थक संचार है। उन्हें सम्मानित कर विश्वविद्यालय पर्यावरण और नदी संरक्षण से जुड़ी उनकी चिंताओं को अकादमिक प्रतिष्ठा दिलाने का प्रयास करेगा। जबलपुर की महापौर स्वाति गोडबाले ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे जबलपुर के गौरवपुरुष और हमारे प्रेरणास्रोत हैं। उनकी प्रेरणा और प्रोत्साहन से मां नर्मदा के प्रति सामाजिक समझ बढ़ी है। श्री वेगड़ ने नदियों के संरक्षण के विषय को राष्ट्रीय फलक पर स्थापित कर दिया है।