बेतुके बयानों के अलावा घोटालों के भी 'आजम' हैं आजम खान
   दिनांक 13-जुलाई-2018
आजम खान पर जमीन और भर्ती घोटाले के आरोप लगे हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्हें उच्च न्यायालय में अर्जी देनी पड़ी है। विवादित बयानों वाले आजम की कारगुजारियां उजागर हो रही हैं
 
अपने बयानों के लिए बराबर विवादों में रहने वाले और सपा सरकार में नगर विकास मंत्री रहे आजम खान के कारनामे एक-एक कर सामने आ रहे हैं। भूमि घोटाले में उनके खिलाफ 10 से ज्यादा मुकदमे दायर हो चुके हैं। भर्ती घोटाले में भी एफ.आई.आर. दर्ज हुई है। चाहे जौहर विश्वविद्यालय हो या फिर जल निगम में नियुक्तियों का मामला, हर जगह गड़बड़ी पाई गई है। इन सबकी जांच के लिए योगी सरकार ने एस.आई.टी. का गठन किया है।
उल्लेखनीय है कि जल निगम में 2016 में 1,300 पदों के लिए बहाली निकली थी। एस.आई.टी. ने अपनी जांच में पाया कि 4 जनवरी, 2017 को चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद इन सबको नियुक्त किया गया। नियुक्ति से पहले न तो चुनाव आयोग से अनुमति ली गई और न ही वित्त विभाग से। 16 जनवरी, 2017 को इन लोगों ने अपना योगदान भी कर दिया। उस दिन भी आचार संहिता लागू थी। इसके लिए आजम खान एवं पूर्व नगर विकास सचिव एस. पी. सिंह समेत कुछ अन्य लोगों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं धोखाधड़ी के आरोप में एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई है।
अब बात जौहर विश्वविद्यालय की। इसके सर्वेसर्वा आजम खान ही हैं। इसका संचालन मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट करता है। आजम ट्रस्ट के आजीवन सदस्य हैं और इसके सदस्य भी उनके खानदान के लोग ही हैं। आजम की बीबी डॉ तंजीन फातिमा सचिव, उनकी बहन निखत अफलाक कोषाध्यक्ष, और उनके दोंनो पुत्र अदीब आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान ट्रस्ट के सदस्य हैं। विश्वविद्यालय बनाने के दौरान भूमि संबंधी कई अनियमितताएं की गई हैं। इन गड़बड़ियों के विरुद्ध रामपुर जनपद के आकाश सक्सेना ने मोर्चा खोला है। सक्सेना कहते हैं, ‘‘रामपुर जनपद की तहसील सदर स्थित ग्रामसभा सीगनखेड़ा और शौकतनगर में निवास करने वाले अनुसूचित जाति के लोग केवल पट्टेदार थे। नियमानुसार वे लोग उस भूमि के मालिक नहीं थे, लेकिन आजम ने अपने रसूख एवं अधिकारियों की मिलीभगत से वहां के दस भूखंडों को अपने घर काम करने वाले तीन नौकरों के नाम पहले रजिस्ट्री करा लिया। बाद में वे भूखंड जौहर विश्वविद्यालय के नाम कराए गए। नियमानुसार अनुसूचित जाति से जमीन लेने से पहले जिलाधिकारी की अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं किया गया।’’ इसके विरुद्ध सक्सेना और जिलाधिकारी रामपुर की तरफ से भी वाद दायर किया गया है। इसकी सुनवाई राजस्व परिषद् में चल रही है।
इसके अतिरिक्त रामपुर जनपद में जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए चकरोड (पगडंडी का बड़ा रूप) की भूमि को भी गलत तरीके से हासिल करने का मामला राजस्व परिषद् की अदालत में सुनवाई के लिए पहुंच चुका है। आकाश सक्सेना ने राजस्व परिषद् में दायर वाद में साक्ष्य पेश किया है कि ग्राम सभा के कुल 16 सदस्यों में से 9 सदस्यों द्वारा 10 मई, 2012 को एक प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव में भी यह भूखंड चकरोड के तौर पर दर्ज है। इसके बाद 11 मई, 2012 को तहसील द्वारा रपट दी गई है। उसमें भी यह भूखंड चकरोड के तौर पर दर्ज है। इसके बावजूद वह जमीन जौहर विश्वविद्यालय के नाम पर हथिया ली गई। आकाश सक्सेना कहते हैं, ‘‘चकबंदी अधिनियम 29 सी के तहत घोषित सार्वजनिक उपयोग की भूमि किसी भी प्रकार से विनिमय की वस्तु नहीं हो सकती। यही वजह है कि जौहर विश्वविद्यालय को हस्तांतरित भूमि विधि विरुद्ध है। यही नहीं, सार्वजनिक भूमि के बदले जो भूमि सरकार को वापस की गई है, वह कोसी नदी के बाढ़ क्षेत्र की जमीन है।’’
आजम खान और जौहर विश्वविद्यालय को लेकर इस तरह के अनेक मामले उजागर हो रहे हैं। ये मामले उनके लिए भारी पड़ सकते हैं।