थरूर के बेतुके बोल कांग्रेस पर पड़ेंगे भारी

यह संयोग है या फिर कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एक दिन पहले मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मुलाकात करते हैं और सफाई देते हैं कि मंदिरों में जाकर उन्होंने पूजा-अर्चना क्यों की। उसके दूसरे ही दिन उसके तिरूवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर उत्तेजक बयान दे देते हैं। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, वे यह भी बताने से नहीं चूके कि मुस्लिम हितों की रक्षा करने वाली कांग्रेस ही अकेली पार्टी है। उसके ठीक अगले ही दिन शशि थरूर कह देते हैं कि अगर देश में दोबारा भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी तो देश ‘हिंदू पाकिस्तान’ बन जाएगा। हालांकि जिस तरह कांग्रेस ने थरूर को इस बयान के लिए चेताया है और इस बयान से किनारा किया है, उससे संदेश तो यही जाता है कि शशि का बयान भले ही कांग्रेसी रणनीति का हिस्सा न हो, लेकिन उसकी सोच की अभिव्यक्ति तो है ही। शशि थरूर को लगा होगा कि जब उनके अध्यक्ष खुद मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मिलकर अपने जनेऊ पहनने और मंदिरों में जाकर पूजा करने को लेकर सफाई दे रहे हों तो उनका यह बयान उनके अध्यक्ष की सोच का ही विस्तार होगा।

कांग्रेस के लिए यह नई बात नहीं है कि मुस्लिम वोटरों को ध्यान में रखकर उसके किसी महत्वपूर्ण नेता ने घोर आग्रही बयान दिया हो। 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के ठीक पहले प्रदेश के तत्कालीन कांग्रेस प्रभारी महासचिव दिग्विजय सिंह ने ऐसा ही बयान दिया था। उन्होंने आजमगढ़ में दुनिया के सबसे बड़े आतंकी ओसामा बिन लादेन को‘ओसामा जी’ संबोधित किया था। इतना ही नहीं, वे दिल्ली के बाटला हाउस मुठभेड़ कांड को फर्जी बताते रहे और उसमें मारे गए आतंकियों को बेकसूर बताते रहे। और तो और, इसी मुठभेड़ में इंस्पेक्टर शर्मा की शहादत और उनके प्रति लोगों के सम्मान का भी ध्यान नहीं रखा। दिग्विजय सिंह को लगा कि इससे मुसलमान वोटर कांग्रेस की ओर गोलबंद होगा और जैसा कि अतीत में कांग्रेस को वोट देता रहा है, उसी अंदाज में फिर दे देगा। लेकिन हुआ इसका उलटा। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस 28 सीटें ही हासिल कर पाई और 2017 तक आते-आते उसकी संख्या सात हो गई।

लगता है कि शशि थरूर ने अतीत की ऐसी गलतियों से सीख नहीं ली। उन्होंने जिस तरह पाकिस्तान के साथ हिंदू विशेषण लगाया है, उससे तो यही साबित होता है। जब विवाद बढ़ा और खुद कांग्रेस में ही उन पर सवाल उठे तो फेसबुक पोस्ट के जरिए शशि ने अपनी सफाई दी। अपनी सफाई में उन्होंने लिखा कि जिस तरह पाकिस्तान बनने के बाद वहां के अल्पसंख्यक हिंदुओं का पलायन हुआ या ऐसे हालात बनाए गए कि पाकिस्तान से हिंदुओं का लगातार पलायन हुआ। शशि ने लिखा कि उनका ‘हिंदू पाकिस्तान’ कहने का मतलब यह है कि अगर नरेंद्र मोदी की दोबारा सरकार बनी तो भारत से भी उसी तरह अल्पसंख्यक मुसलमानों का पलायन होगा और उन्हें प्रताड़ित किया जाएगा। शशि थरूर दरअसल ऐसा कहकर एक तरह से उस भारतीय व्यवस्था पर ही सवाल उठा रहे हैं, जिसे बनाने में उनकी पार्टी का सबसे बड़ा योगदान है। इस देश में अल्पसंख्यकों, दलितों और ब्राह्मणों के संयोजन से बने वोटरों के समीकरण के सहारे लंबे समय तक राज करती रही। कांग्रेस ने इन तीनों में सबसे ज्यादा मुस्लिमों के तुष्टिकरण का ध्यान रखा। कांग्रेस ने अल्पसंख्यक मानसिकता का इस तरह दोहन किया।

अल्पसंख्यक समूह दुनियाभर में जहां भी हो, वह बहुसंख्यक समाज के बरक्स ज्यादा संगठित और एकजुट रहता है। कांग्रेस के अलंबरदारों को यह पता था। इसलिए उन्होंने ऐसे ही राजनीतिक इंतजाम किए, जिसमें अल्पसंख्यक मानसिकता उसके साथ बनी रहे। लेकिन 1990 के बाद की राजनीति में क्षेत्रीय दलों के उभार ने मुस्लिम वोटरों के सम्मुख विकल्प मुहैया करा दिए। इसके बाद अल्पसंख्यक वोटरों ने कांग्रेस से किनारा करके क्षेत्रीय क्षत्रपों मसलन लालू, मुलायम, ममता, बदरूद्दीन अजमल आदि में भरोसा करना शुरू किया। दूसरी तरफ अल्पसंख्यक तुष्टिकरण का भाव बहुसंख्यक और राष्ट्रीय सोच वाली आबादी को भी समझ में आने लगा। शिक्षा के प्रसार ने अल्पसंख्यकों के बीच के शिक्षित लोगों की समझ विकसित करने में मदद की, कि कांग्रेस ने उसका सिर्फ इस्तेमाल किया और उसके सामुदायिक हित के लिए बड़े कदम नहीं उठाए। इससे कांग्रेस का आधार वोट बैंक दरकने लगा।

अल्पसंख्यक तुष्टिकरण और भारतीय जनता पार्टी के प्रति घृणा का भाव कांग्रेस में इस कदर भर गया है कि उसके नेता स्तरहीन बयान देने से भी नहीं बचते। पिछले आम चुनाव के ठीक पहले जिस तरह कांग्रेस के ही नेता और पूर्व मंत्री मणिशंकर अय्यर ने नरेंद्र मोदी को चाय की दुकान लगाने का न्योता दिया या फिर गुजरात चुनावों के पहले उन्हें नीच कहा, उससे साफ है कि भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं के प्रति कांग्रेस के बड़े और पढ़े-लिखे नेता कैसी सोच रखते हैं। मणिशंकर अय्यर विदेश सेवा के अधिकारी रहे हैं तो शशि थरूर संयुक्त राष्ट्र के उप महासचिव रहे हैं। ऊंची पढ़ाई-लिखाई और पृष्ठभूमि के बावजूद अगर ये लोग ऐसी सोच रखते हैं तो देश की सबसे पुरानी पार्टी का भगवान ही मालिक है। कांग्रेस और उसके पढ़े-लिखे नेताओं को समझना होगा कि देश बदल चुका है और उसके नागरिकों की सोच और स्तर भी। हिंदू पाकिस्तान का बयान हिंदू वोटर ही नहीं, समझदार मुस्लिम वोटर भी स्वीकार नहीं करना चाहेगा। क्योंकि उसे पता है कि कट्टरवाद की जमीन पर विकसित पाकिस्तान में नागरिकों के लिए कितनी गुंजाइश है।