फिल्म जगत में पाखंडियों की नहीं है कमी

अपने बेबाक बयानों के लिए बराबर सुर्खियों में रहने वाले फिल्म जगत के प्रसिद्ध पार्श्व गायक अभिजीत भट्टाचार्य स्पष्ट तौर पर कहते हैं,''फिल्म जगत एक ऐसी जमात है जो अपनी देशभक्ति को समय-समय पर 'सेल' करती है। इसलिए न ही इनका कोई मत होता है और न ही इन्हें किसी के दर्द से कोई इत्तेफाक। जहां इनका मतलब सिद्ध होता है, ये वहीं दिखाई देते हैं।'' पाञ्चजन्य संवाददाता अश्वनी मिश्र ने हिन्दू बच्चियों के साथ हिंसा और यौनाचार पर फिल्म जगत की खामोशी पर उनसे विस्तृत बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश:-

 

कठुआ कांड को लेकर जो गुस्सा फिल्म जगत की ओर से दिखाई दिया, वह मंदसौर में ठंडा क्यों पड़ गया?

देखिए, देश के लोगों को एक बात समझनी होगी कि वे किन लोगों को सिर-आंखों पर बिठा रहे हैं। उन लोगों को जो पैसे और प्रतिष्ठा के लिए देश-मत सब बेच देंगे? मैं कहना चाहूंगा कि फिल्म जगत में एक बड़ी जमात ऐसे लोगों की है, जो पैसे के लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए जरा भी नहीं हिचकती। वह कुछ समय में देशभक्त दिखाई देगी तो कुछ ही समय में पैसा लेकर गालियां देने में नहीं हिचकेगी। कठुआ कांड में जितने भी तख्ती लेकर शर्मसार हो रहे थे, उनका अपना बाजार है और वे अपना बाजार खराब नहीं करना चाहते। इसलिए जिस काम के लिए उन्हें पैसा मिल रहा था, उन्होंने उसे किया।

असम सहित देश के विभिन्न हिस्सों में आएदिन एक खास मजहबियों द्वारा हिन्दू बेटियों को निशाना बनाया जाता है और हिंसा की जाती है। लेकिन फिल्म जगत की ओर से इसके विरोध में कोई आवाज तक नहीं आती?

फिल्म जगत में पाखंडियों की कमी नहीं है। न ही इनका कोई मत होता है और न ही इन्हें किसी के दर्द से कोई मतलब। जहां इनका मतलब सिद्ध होता है, ये वहीं दिखाई देते हैं। जैसे प्रियंका चोपड़ा को लीजिए। पैसे के लिए रोहिंग्याओं की हमदर्द बनी हुई हैं। यह देश का अपमान ही है।

ऐसे ही बहुत से कलाकर हैं,जिन्हें पाकिस्तान से फंडिग होती है। इसलिए वे कठुआ जैसे मामले उठाकर अपनी देशभक्ति 'सेल' करते हैं। लेकिन अन्य घटनाओं में न तो इन्हें नाम दिखता है और न ही पैसा, तो ये शांत रहते हैं। रही बात हिन्दू बेटियों से बलात्कार की, तो समाज के अधिकांश लोग इन घटनाओं पर खामोश रहते हैं, क्योंकि हम 'सहिष्णुता' का लबादा जो ओढे़ हुए हैं। हमें सिखाया गया है कि कोई एक थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल आगे कर दो।

यह सीखते-सीखते आज हम यहां तक पहुंच गए कि कोई हमारी बहन-बेटियों के साथ अत्याचार करे तो दूसरी बेटी को भी दे दो। आखिर हम अपने इतिहास से कब सीखेंगे?