मुसलमान बलात्कारियों पर चुप्पी क्यों ?
   दिनांक 17-जुलाई-2018
असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में हिन्दू लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार एवं हत्या की कुछ हालिया घटनाएं हृदय झकझोरती हैं। इनकी वीभत्सता देखकर न केवल रूह कांप जाती है बल्कि यह सोचने पर भी मजबूर करती है कि आखिर इस तरह के अपराध में शामिल लोग कौन हैं? इनकी मानसिकता क्या है? इनकी परवरिश और तालीम कहां हो रही है? अगर ये मनोरोगी हैं तो इसका कारण क्या है? या फिर इस घृणित अपराध के पीछे सिर्फ वह हिन्दू विद्वेष और मजहबी तालीम है, जिसके बताए रास्तेपर वे चल रहे हैं। इन सब बातों का विश्लेषण करने से पहले पिछले दिनों देश के अलग-अलग हिस्सों में मासूम बच्चियों के साथ घटीं बलात्कार जैसे वीभत्स अपराध की कुछ घटनाओं पर नजर डालने की जरूरत महसूस होती है।
 
पहली घटना-मार्च, 2018
असम के नगांव में कक्षा पांच में पढ़ने वाले वाली एक 10 वर्षीया बच्ची स्कूल से घर लौट रही थी, इतने में मौका पाकर पास के जाकिर हुसैन (21) एवं उसके 4 मुस्लिम साथियों ने उसे अगवा कर लिया। वे उन्मादी बच्ची को एक सुनसान जगह ले गए, जहां सभी ने सामूहिक रूप से दुष्कर्ष किया। राज न खुलने पाए, इसलिए मिट्टी का तेल डालकर उसे जिंदा आग के हवाले कर दिया। 90 फीसदी जल चुकी उस मासूम की तमाम चिकित्सकीय प्रयास के बाद भी तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
दूसरी घटना- अप्रैल, 2018
उत्तर प्रदेश के बिजनौर का धामपुर थाना क्षेत्र। बीती 10 अप्रैल को एक 7 वर्षीया अबोध बच्ची जब अपने घर से थोड़ी दूर स्थित दुकान से कुछ सामान लेने जा रही थी, तभी मौका पाकर गांव के शाहबाज, नसीरुद्दीन और लईक अहमद उसे बदनीयती से अगवा कर ले गए, उससे दुराचार किया और फरार हो गए।
तीसरी घटना-जून, 2018
राजस्थान के बाड़मेर जिले के गिराब क्षेत्र में एक 7 साल की मासूम को रईस नाम के व्यक्ति ने ननिहाल से अगवा किया और एक सुनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची चिल्लाई तो उसकी गला घोटकर हत्या कर दी। इतने से जी नहीं भरा तो दुष्कर्मी ने मरने के बाद भी बच्ची से कई बार बलात्कार किया।
चौथी घटना-मार्च,2018
पश्चिम बंगाल के कोलकाता में शेख मुन्ना नाम के जिहादी ने एक 3 वर्षीया दुधमुंही बच्ची के साथ कुकर्म किया। यह घटना तब की है जब उसका पांच वर्षीय भाई उसे खिलाने के लिए घर के पास स्थित बस प्रतिक्षालय लाया था जहां पहले से चालक का सहायक मुन्ना मौजूद था। मौका पाकर वह बच्ची को बस में ले गया और दुष्कर्म किया। बाहर बच्ची का भाई बस के दरवाजे पीट-पीटकर उसे छोड़ने की मिन्नतें करता रहा, लेकिन उन्मादी ने एक न सुनी।
पांचवी घटना-जून, 2018
जून, 2018 में मध्य प्रदेश के मंदसौर में एक 7 साल की मासूम बच्ची जब स्कूल के दरवाजे पर अकेेली खड़ी थी तो इरफान नामक व्यक्ति उसे मिठाई का लालच देकर अपने साथ ले जाने लगा। पहले से घात लगाए बैठा उसका साथी आसिफ भी चल दिया। दोनों उसे एक निर्जन जगह ले गए, जहां सामूहिक रूप से दुष्कर्म के बाद दोनों ने मरा समझकर उसे झाड़ी में फेंक दिया। बच्ची की चीख सुनकर स्थानीय लोगों ने उसे देखा और तुरंत चिकित्सालय में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि दरिंदों ने उसके साथ दुष्कर्म के बाद उसके गुप्तांग में कोई कठोर चीज डाली थी, जिससे उसकी आंत और नाजुक अंग छिन्न-भिन्न हो गए।
छठी घटना-अप्रैल, 2016
केरल के पेरुंमबवूर में कानून की छात्रा 30 वर्षीया जीशा जब घर में अकेली थी, तब अमीरुल नाम के मुस्लिम युवक ने घर में घुसकर बेरहमी से पहले बलात्कार किया, फिर चाकू से शरीर पर 30 से ज्यादा वार कर क्षत-विक्षत कर दिया। जीशा की मौके पर ही मौत हो गई।
उपरोक्त घटनाएं अलग-अलग स्थानों की जरूर हैं लेकिन इन सभी में शामिल अपराधियों का जहां मजहब एक है तो वहीं दुराचार की वीभत्सता भी लगभग एक जैसी ही है। आश्चर्य तो यह कि इस दरिंदगी में सिर्फ मजहबी उन्मादी ही शामिल नहीं हैं बल्कि मुल्ला-मौलवियों तक ने मासूम बेटियों को अपनी हवस का शिकार बनाया है।
अपराधियों का मनोविज्ञान
कुछ वर्ष पहले कुख्यात आतंकी संगठन आईएस के चंगुल से छूटी यजीदी किशोरियों ने इराक में मीडिया के सामने अपनी पीड़ा बयान करते हुए बताया था, ''जब आतंकी उनके साथ बलात्कार कर रहे थे तो कह रहे थे तब उनके हिसाब से वे कुछ भी गलत नहीं कर रहे, क्योंकि 'तुम इस्लाम का पालन नहीं करतीं। ऐसी काफिर महिला के साथ बलात्कार करना जायज है।'' ऐसे ही 12 साल की एक और किशोरी ने अपने दर्द को साझा करते हुए कहा, ''जब मैंने उससे कहा कि आप मुझे बख्श दो तो आतंकी ने कहा कि वह ऐसा करके खुदा के करीब जा रहा है। यही हमारी बंदगी का तरीका है।''
आतंकियों की ऐसी बातों से यह सवाल उठता है कि आईएस के आतंकी किस इस्लाम का हवाला देकर दूसरे मत-पंथ की महिलाओं-बेटियों के साथ दुराचार को जायज ठहरा रहे थे? कहीं भारत में उन्मादी इसी सोच पर तो नहीं चल रहे? क्या ऐसे अपराधी मानसिक रूप से विक्षिप्त होते हैं? इन सवालों पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान के प्रो. राकेश पांडेय कहते हैं,''देश के अलग-अलग हिस्सों में घटी यौनाचार की घटनाओं में शामिल अपराधियों के जीवन पर नजर डालें तो कहीं न कहीं इसके पीछे मजहबी तालीम काफी हद तक जिम्मेदार है, इस सत्य से बिल्कुल इनकार नहीं किया जा सकता है। यकीनन आज के हालात को देखने से स्पष्ट है कि इन अपराधों में संलिप्त एक खास वर्ग के लोगों का संभवत: इसके लिए बे्रनवाश किया जाता है, उन्हें दूसरे मत-पंथ के लोगों के प्रति अपराध को बंदगी कहकर जायज ठहराया जाता है। इससे उनकी मनोवृत्ति बदलती है और जो काम समाज को गलत लगते हैं, वे उन्हें आनंद देने वाले लगते हैं।'' वे आगे बताते हैं,''हाल ही में कुछ घटनाओं में देखने को मिला कि अपराधी मासूम बच्चियों को निशाना बनाते हैं। ऐसे अपराधी मानसिक रूप से विक्षिप्त और मनोविकार से ग्रसित होते हैं। वे 'पीडोफीलिया' रोग से ग्रस्त होते हैं। इस रोग के कारण वे बच्चों से ही कुकुर्म करते हैं।'' प्रो. पांडेय स्पष्ट करते हैं कि ऐसे अपराधी जो देखते-सुनते हैं, उसी के अनुसार उनकी सोच बनती है। विवि. की ही एक और प्रोफेसर एवं मनोचिकित्सक मोना श्रीवास्तव कहती हैं,''एक किताब है-इन द माइंड ऑफ ए रेपिस्ट। इसमें शोध के साथ स्पष्ट किया गया है कि ऐसे अपराधों में संलिप्त अपराधियों का दिमाग कैसा होत् ाा है और वे क्यों ऐसा करते हैं। लेकिन हाल के अपराधों को देखें तो यह बात समझ में आती है कि अपराध में बदले की भावना ज्यादा होती है। ऐसे असामाजिक तत्व नियम के विरुद्ध चलते हैं और गलत काम करके अपने को बड़ा दिखाने की इच्छा रखते हैं।'' जवाहरलाल नेहरू विवि. में लॉ एंड गवर्नेंस की प्रो. अमिता सिंह हाल के अपराधों में मुसलमानों की संलिप्तता पर कहती हैं, ये सभी अपराध संगठित रूप से अंजाम दिए जा रहे हैं। ऐसा करके वे समाज में दहशत फैलाना चाहते हैं। बात मंदसौर की हो या असम या उत्तर प्रदेश की, हर जगह हिन्दू लड़कियों को निशाना बनाया जाता है।''
कठुआ पर तल्खी, मंदसौर पर चुप्पी
छोटी से छोटी घटना पर दर्जनों ट्वीट करने वाले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी मंदसौर की घटना पर खामोश दिखाई दिए। हालांकि दो दिन बाद एक ट्वीट आया जब सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने उनकी इस चुप्पी पर न केवल उन्हें खरी-खोटी सुनाई बल्कि सवालों की झड़ी लगा दी। अपने को घिरता देख उन्होंने एक ट्वीट तो किया लेकिन उसमें भी राजनीति का छौंक लगाने से नहीं चूके। दिलचस्प बात यह है कि कठुआ घटना पर अलग-अलग क्षेत्रों के जाने-माने लोग बलात्कार को मंदिर, हिन्दुत्व से जोड़कर समाज को बांटने का काम कर रहे थे, ये सभी मंदसौर में मासूम बच्ची के बलात्कार पर न टीवी पर गरज रहे थे और न ही उनका ट्विटर हरकत में रहा था। सोशल मीडिया की मानें तो जिस कठुआ घटना पर राहुल गांधी ने धड़ाधड़ 9 ट्वीट किए थे, मंदसौर पर उनसे सिर्फ एक ट्वीट ही किया गया। ऐसे ही कठुआ पर वामपंथी नेता सीताराम येचुरी ने 3, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 3, जावेद अख्तर ने 37, फरहान अख्तर, नेहा धूपिया, रितेश देशमुख, तमन्ना भटिया, वरुण धवन, स्वरा भास्कर, ऋचा चड्ढा, सोनम कपूर, सोनाली बेंद्रे सहित कई बॉलीवुड कलाकारों ने 78 से अधिक ट्वीट कर न केवल घटना की निंदा की थी बल्कि अपराधी को हिन्दू समाज से जोड़कर बदनाम करने वाली बातें कहीं थीं। लेकिन मंदसौर की घटना पर इनमें से एक-दो को छोड़कर किसी ने एक शब्द भी नहीं कहा।
सोशल मीडिया पर दिखा गुस्सा
मंदसौर की घटना पर चुप्पी साधे रहने वाले लोगों पर आमजन का गुस्सा फूट पड़ा। किन्हीं अभिषेक सिंह ने ट्वीट में कहा,''ऐसा लगता है, राहुल गांधी और उनकी सोशल मीडिया टीम देश में नहीं है, क्योंकि जिस कठुआ घटना पर उन्होंने कई ट्वीट कर अपनी संवेदना जाहिर की, वह मंदसौर में आरोपी का मजहब जानने के बाद खामोश हो गए। रत्नेश ने लिखा,''मंदसौर का दरिंदा मुसलमान है। यह सुनते ही कठुआ पर सातवें स्वर में बोलने वाले सेकुलर बिलों में छुप गए।'' तो वहीं रुचि अग्निहोत्री ने लिखा,''कहां हैं सोनम कपूर, करीना कपूर, स्वरा भास्कर? उन्हें क्या मंदसौर में सात साल की मासूम बच्ची नहीं दिखाई दी? कठुआ पर इतना ही खून उबल रहा था तो मंदसौर पर ठंडा क्यों पड़ गया? सिर्फ इसलिए कि अपराधी 'शांतिप्रिय' समुदाय से है? शर्म करिए!''
क्या कहते हैं एनसीआरबी के आंकड़े
आंकड़ों की रोशनी में देखें तो साफ है कि भारत में बलात्कार के मामले तेजी से बढ़े हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक वर्ष 2012 के दौरान जहां बलात्कार के 24,923 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2013 के दौरान ये बढ़ कर 33,707 तक पहुंच गए। 2014 में 36,735 मामले दर्ज हुए। ऐसे ही 2015 के मुकाबले 2016 में इनमें 12.4 फीसदी मामलों में बढ़ोतरी हुई है।
बहरहाल, यह सही बात है कि अपराध का कोई 'मत' नहीं होता, लेकिन जब कोई अपराध संगठित रूप से किया जाए और उसमें एक मजहब की संलिप्तता स्पष्ट रूप से दिखाई दे तो उसे क्या कहा जाएगा? आज देश के विभिन्न हिस्सों में मजहबी उन्मादियों द्वारा हिन्दू बेटियों के साथ की जाने वाली हिंसा और यौनाचार की घटनाएं उसी का उदाहरण हैं।