वहाबी इस्लाम ने ही पैदा किए हैं आतंकवादी

                इन मौलाना शेख़ मुज़फ्फर अल-मदीना ने सिर्फ भगवा कपड़ा पहनने पर एक मौलाना को नसीहत दे डाली

वहाबी या सलाफ़ी इस्लाम क्या है इस बात को आप इस छोटी सी विडियो को देख कर समझ सकते हैं.. इस्लाम का ये वही मत है जिसने सारी दुनिया में आतंकवादी पैदा किये हैं और करता जा रहा है.. आम हिन्दुस्तानी या दूसरे धर्म के लोग अभी तक इस जानकारी से अनजान थे कि इस्लाम के किस मत की वजह से इस्लाम का ये रूप आज बना है.. इसीलिए वो सारे मुसलमानों से नफ़रत करने लगे हैं.. मगर अब धीरे धीरे इन्टरनेट के ज़रिये लोग जागरूक हो रहे हैं और समझ रहे हैं. 

इस विडियो में एक मौलाना जिसने अरबी वेशभूषा धारण कर रखी है ये भारतीय वहाबी मौलाना है, ये शेख़ मुज़फ्फर अल-मदीना के नाम से जाना जाता है और इसका फेसबुक पेज भी इसी नाम से है.. ( https://www.facebook.com/sheikhmuzaferalmadni ) इसके फेसबुक पेज पर अगर आप जाएंगे तो देखेंगे कि जो भी सूफ़ी मत का इंसान मदीना जाता है ये उन्हें पकड़ कर बेइज्ज़त करता है और असल अरबों का इस्लाम बताता है.. पहली नज़र में आपको इसमें कुछ शायद ग़लत न लगे मगर ये जान लीजिये सदियों से आपके और हमारे पुरखों ने इन लोगों को नज़रंदाज़ किया तभी आज दहशतगर्दी इस हाल में पहुंच चुकी है

इस विडियो में इसने एक हिन्दुस्तानी मौलाना को पकड़ा.. और उन्हें इसलिए इसने पकड़ा कि वो भगवा कुरता और लुंगी पहने हैं.. ये वहाबी मौलाना उन्हें डायरेक्ट ये कभी नहीं कहेगा कि भगवा न पहनो.. ज़ाकिर नायक भी कभी कुछ डायरेक्ट नहीं कहता था.. तभी उस पर कोई कानूनी केस नहीं बन पाता था.. ये उस बात को घुमा के हदीस और कुरान से समझाएगा कि भगवा पहनना ग़लत है.. ऐसे सदियों से ये वहाबी और इनकी जमात करती आ रही है.. ये आपको बहुत बहुत सभ्य, बहुत मीठी जुबां वाले मिलेंगे.. मगर इनका अपनी ज़िन्दगी में सिर्फ़ और सिर्फ एक ही मकसद होता है कि कैसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को ये अरबी बर्बर बना दें.. ये एक अजीब सी मनोवैज्ञानिक बीमारी है जिसका बीज इनके भीतर बचपन से बो दिया जाता है ऐसे ही किसी वहाबी मौलाना के द्वारा और फिर ये निकल पड़ते हैं दूसरों को बर्बर बनाने

                   भगवा कपड़े पहनने पर गुजरात के एक मौलाना को नसीहत देते हुए शेख़ मुज़फ्फर अल-मदीना 

 

ख़ुद ये अरबी बन गया है.. अरबी वेश धारण कर लिया है.. ये दिन में अरबों की नाइटी पहन के और सर पर पुराने टायर के बीच में दुपट्टा फंसा कर घूमता है.. और दूसरे हिन्दुस्तानियों को रंग से भी नफ़रत सिखा रहा है.. ऐसे ही बचपन में हमारे आसपास के बच्चे जो ऐसे ही मौलानाओं की बातें सुनते थे.. हम लोगों को ये कहकर डराते थे कि अगर होली के रंग का एक भी कतरा हमारी त्वचा पर लग गया तो फ़रिश्ते उतनी खाल चाक़ू से काट के निकाल लेंगे.. बचपन में बरसों हम ऐसे ही रंग से डरते रहे और कभी होली नहीं खेल पाए.. आज मेरे बच्चे होली में रंगे हुए भूत बन जाते हैं क्यूंकि मैंने उन्हें रंगों से प्यार करना सिखाया है

अब ये मौलाना चूंकि बड़े इंसान को समझा रहा है इसलिए ये ऐसे नहीं कहेगा कि फ़रिश्ते भगवा पहनने की वजह से जिस्म की खाल निकाल लेंगे.. ये बात को घुमा कर, भावुक बना कर हर बात पैगम्बर मुहम्मद और कुरान से जोड़कर फिर आपको समझाएगा.. ऐसे ही इन्होंने पूरे भारत और दुनिया के सारे देशों की अपनी सभ्यता और संस्कृति को नष्ट कर दिया

आप गौर से देखिएगा आपको आजकल हर मुसलमान “अल्लाह हाफ़िज़” कहता ही मिलेगा.. “ख़ुदा हाफ़िज़” बोलने वाले मुसलमान इन जैसे वहाबी मौलानाओं ने पूरी तरह से भारत से ख़त्म कर दिए

 

जितने भी आतंकी आज तक निकले वो सब इन्हीं अल मुज़फ्फ़र जैसे लोगों ने बनाए हैं.. इन्हें पहचानिए.. चिन्हित कीजिये. और होम मिनिस्ट्री के कानों तक बात पहुंचाइये। मुज़फ्फ़र अल मदीना जैसे मौलानाओं को पहचानिए, इनके संगठन, इनकी जमात, दावा या दावत वालों को पहचानिए.. असल लड़ाई इनसे है हम सबकी, ऐसा अभियान चलाइए कि इस जैसे लोग दोबारा हिन्दुस्तान की धरती पर क़दम न रखने पाएं.. इनके भीतर डर बैठा दीजिये जैसे जाकिर नायक के भीतर बैठा दिया है.. और ये काम अकेले कोई एक कौम और उसके लोग नहीं कर पाएंगें.. ये हम सब की साझा ज़िम्मेदारी है आम अल्पसंख्यकों के साथ मिलकर ही ये संभव होगा.. इस मानसिकता को जड़ समूल रूप से हम सब मिलकर ही नष्ट कर पायेंगे

( ताबिश सिद्धकी जी के फेसबुक वाल से संपादित अंश साभार )