चांद-तारे का झंडा इस्लामिक नहीं, मुस्लिम लीग का झंडा

उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी का कहना है कि इस्लाम का कोई झंडा नहीं होता। झंडे कबीलों के और सेनाओं के हुआ करते थे। इस्लाम की कोई सेना ही नहीं थी तो झंडा कैसा। चांद-तारे का झंडा, जो मजहब के नाम पर फहराया जाता है वह पाकिस्तान मुस्लिम लीग का झंडा है। इस पर रोक लगनी चाहिए

उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर गुहार लगाई है कि इस्लाम के नाम पर चांद-तारे वाला हरा झंडा , पाकिस्तान मुस्लिम लीग का झंडा है। हिन्दुस्थान में इस झंडे को नहीं फहराया जाना चाहिए। इसलिए इस तरह के झंडों को फहराने पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। न्यायामूर्ति एके सीकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को जवाब दाखिल करने को कहा है।

वसीम रिज़वी ने पांचजन्य को बताया कि सऊदी अरब में जब इस्लाम आया उसके पहले वहां पर 360 अल्लाह हुआ करते थे। हर इलाके में लोगों ने अपने को अल्लाह घोषित कर रखा था। काबा पर हमला करके जब काबा को जीता गया तो वहां पर 360 अल्लाह की मूर्तियां मिलीं। इसके बाद वहां इस्लाम मजहब आया और धीरे - धीरे लोगों ने इस्लाम को अपनाना शुरू किया। इस्लाम के पहले जो 360 अल्लाह हुआ करते थे उसमें हुबल नाम के अल्लाह सबसे ज्यादा मशहूर थे। उनको मानने वाले लोग अपने घरों के ऊपर चांद -तारे का झंडा लगाते थे। उस समय तक झंडे में हरा रंग शामिल नहीं हुआ था। वर्ष 1906 में इस झंडे में हरा रंग आया।

वसीम रिजवी बताते हैं " काफी समय बाद इस झंडे में सफ़ेद रंग शामिल करके यह पाकिस्तान का मुस्लिम लीग का झंडा बना। इस झंडे को इस्लाम धर्म के नाम पर हिन्दुस्थान में आज भी फहराया जाता है। पाकिस्तान के मुस्लिम लीग के झंडे का हिन्दुस्थान में क्या काम , यह झंडा यहां क्यों फहराया जा रहा है। इसी विषय पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनरल से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा है कि यह बहुत ही गंभीर प्रकरण है।"

वसीम रिज़वी ने याचिका में कहा है कि चांद - तारे वाला यह हरे रंग का झंडा, इस्लाम धर्म का झंडा नहीं है। यह पाकिस्तान मुस्लिम लीग का झंडा है। पकिस्तान के आतंकी संगठन हमारे देश के नागरिकों और सेना के जवानों पर आए दिन हमला करते हैं। ऐसे देश का झंडा यहां पर नहीं फहराया जाना चाहिए। इस पर अविलम्ब रोक लगाई जानी चाहिए। इस देश के अन्दर जो भी संगठन , व्यक्ति या फिर धार्मिक संस्था इस झंडे को फहरा रही है उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

वसीम रिज़वी ने कहा कि इस्लाम का कोई झंडा नहीं है। झंडा सेनाओं का होता है। इस्लाम की कोई सेना तो है नहीं। मोहम्मद साहब ने जो पहला बैनर बनाया था वो काले रंग का था। उस पर कुछ भी नहीं लिखा था। केवल काले रंग का बैनर था। झंडे कबीलों के हुआ करते थे। कबीले जंग पर जब निकलते थे तो अपने अपने झंडे लेकर निकलते थे। आई. एस. आई. एस. का जो झंडा है , वो काले रंग का तो है मगर उसमें तलवार बनी हुई है, उसमें कुरआन की आयत लिखी हुई है। इस तरह का झंडा फहराना देशद्रोह करने जैसा है।