फतवे पर निदा का पलटवार बोलीं-किसी को हक नहीं इस्लाम से निकालने का
   दिनांक 18-जुलाई-2018
जो फतवे की बात करे रहे हैं वह महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचारों को बंद नहीं होने देना चाहते, इसलिए वह ऐसा कर रहे हैं, इस लड़ाई को हम सर्वोच्च न्यायालय तक लेकर जाएंगे
 हलाला जैसी कुप्रथा के खिलाफ आवाज उठाने वाली निदा खान का हुक्का पानी बंद करने का फतवा जारी किया गया है। फतवे में कहा गया है कि उनके साथ खाने - पीने , मिलने - जुलने और उठने - बैठने पर पाबंदी लगाई जा रही है। शरीयत के खिलाफ गलत बयानबाजी का आरोप लगाते हुए उनका मुस्लिम समाज से बहिष्कार करने की घोषणा की गई है।  फतवा बरेली के शहर काजी मुफ्ती असद रज़ा खां कादरी की ओर से जारी किया गया है।
 फतवा जारी करने के बाद निदा खान ने पलटवार करते हुए कहा कि शरीयत की बात करने वाले महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय को बंद नहीं होने देना चाहते। इसलिए वे इस तरह का फतवा जारी करके भ्रम पैदा कर रहे हैं। निदा के पक्ष में फरहत नकवी और शिया धर्म गुरु कल्बे जव्वाद ने भी बयान जारी कर उनका बचाव किया है
 फतवा जारी होने के बाद आला हजरत हेल्पिंग सोसाइटी की अध्यक्ष निदा खान ने कहा कि जो लोग शरीयत की बात कर रहे हैं और मेरे खिलाफ फतवा जारी कर रहे हैं। पहले वो अपने घरों में झांककर देखें। महिलाओं के साथ हो रही नाइंसाफी को रोकने के बजाय मेरे खिलाफ फतवा जारी किया जा रहा है। यह फतवे जनता को गुमराह करने के लिए हैं ताकि लोग घबरा कर हम लोगों का साथ छोड़ दें। निदा खान ने कहा कि 'किसी को कोई हक़ नहीं है कि मुझे इस्लाम से निकाल दे. यह लड़ाई न्याय के लिए लड़ी जा रही है और लड़ाई जारी रहेगी, हम लोग इस लड़ाई को सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ेंगे.'
 
निदा खान के खिलाफ फतवा जारी होने के बाद मेरा हक़ फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी ने भी आवाज उठाई है।
 
         
 फरहत ने कहा कि अब वो जमाना चला गया जब फतवा जारी होता था और लोगों का हुक्का पानी बंद हो जाया करता था। आज के समय में इस तरह के फतवे जारी करके किसी का बहिष्कार नहीं किया जा सकता। हर आदमी अपनी मेहनत से अपना जीवन यापन कर रहा है। इस तरह के आदेश जिसमें किसी का सामाजिक बहिष्कार करने की बात की जा रही है, इसका कोई औचित्य ही नहीं है. कुछ पुरुषों ने हलाला और तलाक को एक खेल बना लिया है। इसके खिलाफ हम लोग लड़ रहे हैं। हम लोगों को बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। 
निदा खान को इस्लाम से निष्काषित करने के मामले पर शिया नेता कल्बे जव्वाद का भी बयान आया है। 
 
कल्बे जव्वाद ने अपने बयान में कहा है कि किसी को भी यह अधिकार नहीं है कि वो किसी को इस्लाम से निकाल सके किसी भी ईमान वाले को इस्लाम से खारिज करने का हक़ किसी को नहीं है
ऑल इंडिया महिला मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर का कहना है कि, मौलाना ने फ़तवा दिया कि निदा खान इस्लाम दीन से खारिज हुईं, इनकी कोई मदद न करे इनको कब्र के लिए ज़मीन न मिले, इनके मरने के बाद नमाज़े ए जनाजा न पढ़ा जाए। मैं कहती हूं कि इस्लाम में किसी मौलाना, किसी मुफ्ती को यह हक़ नहीं कि किसी मुसलमान औरत या फिर मर्द को इस्लाम से खारिज करे। जिन लोगों ने फतवा जारी किया है उनको यह हक़ नहीं कि किसी को काफिर कहें या इस्लाम से खारिज करें। यह फतवा देने वाले ने अल्लाह के कानून से खिलवाड़ किया है।