जानते-बूझते होती है ऐसी ‘चूक’

ऐसा नहीं है कि पासपोर्ट विवाद के बाद मीडिया आगे सबक लेगा और बिना सभी पक्षों से बात किए ऐसी झूठी खबरें नहीं चलाएगा। यह बात लगातार सामने आ रही है कि लोकसभा चुनाव से पहले कुछ मीडिया संस्थान और पत्रकार सीधे तौर पर कांग्रेस के इशारे पर काम कर रहे हैं। इन मीडिया संस्थानों में पिछले दिनों में संपादकीय नीति से जुड़े कई औपचारिक आदेश भी जारी किए गए हैं। सबसे ‘क्रांतिकारी’ चैनल में प्रधानमंत्री मोदी से जुड़े सीधे प्रसारणों में कटौती के मौखिक आदेश दिए गए हैं। इसके तहत इंदौर दौरे पर प्रधानमंत्री की रैली को नहीं दिखाया गया। इसी तरह उनके रेडियो कार्यक्रम मन की बात को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। मीडिया क्या दिखाए, क्या न दिखाए यह उसकी मर्जी होनी चाहिए, लेकिन वह अपनी संपादकीय नीतियां किसी राजनीतिक दल को खुश करने की मंशा से बनाता है तो यह चिंता की बात है।