विकास पथ पर बढ़ रहा भारत

नोएडा में सैमसंग द्वारा दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल इकाई की स्थापना ‘मेक इन इंडिया’के तहत सबसे बड़ी उपलब्धि है। 2014 में ‘मेक इन इंडिया’ की घोषणा के बाद अब तक लगभग 40 मोबाइल फोन कंपनियों ने भारत में अपने संयंत्र लगाए हैं

  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे इन के साथ नोएडा स्थित दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल संयंत्र का उद्घाटन करते हुए। साथ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  केंद्र सरकार के ‘मेक इन इंडिया अभियान’ के तहत कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की बड़ी कंपनी सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने उत्तर प्रदेश के नोएडा में दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री की स्थापना की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन के साथ इस संयंत्र का उद्घाटन किया। नोएडा के सेक्टर-81 में स्थित यह संयंत्र 4,915 करोड़ रुपये के निवेश से बना है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगले कुछ वर्षों में मोबाइल उत्पादन के क्षेत्र में भारत में 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। इससे रोजगार के 4-5 लाख नए अवसर पैदा होंगे। भारत में ही क्यों? चीन, दक्षिण कोरिया और अमेरिका को छोड़कर आखिर सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री भारत में ही क्यों लगी? इसके पीछे कई कारण हैं। दरअसल, मोदी सरकार के आने के बाद विनिर्माण क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है। साथ ही, उत्पादन इकाई लगाने वालों को केंद्र सरकार से सहयोग भी मिल रहा है। दूसरी बात, भारतीय मोबाइल बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सैमसंग हरसंभव उपाय कर रही है। नोएडा में नए संयंत्र की स्थापना इसी रणनीति के तहत की गई है। इसमें सालाना 12 करोड़ मोबाइल का उत्पादन होगा, जिससे देश के मोबाइल फोन बाजार में सैमसंग पुन: अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगी। फिलहाल सैमसंग भारत में करीब 6.7 करोड़ स्मार्टफोन बनाती है, जो नई इकाई के शुरू होने के बाद दोगुनी हो सकती है। सैमसंग ने इस इकाई की शुरुआत इसलिए की है, क्योंकि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल बाजार है। देश में दुनियाभर के 10 फीसदी मोबाइल फोन बिकते हैं। 2017 तक देश में करीब 30 करोड़ मोबाइल उपभोक्ता थे जो 2018 के आखिर तक 35 करोड़ हो सकते हैं। 2022 तक देश में यह आंकड़ा 45 करोड़ होने की संभावना है। 2016-17 में सैमसंग के कुल 50,000 करोड़ के बिक्री राजस्व में 34,000 करोड़ मोबाइल से था। यहां न केवल भारतीय बाजार के लिए फोन बनेंगे, बल्कि अनेक यूरोप, पश्चिमी एशिया व अफ्रीका को निर्यात भी किया जाएगा। इस इकाई से रेफ्रिजरेटर का उत्पादन भी दोगुना हो जाएगा। पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि डिजिटल तकनीक से लोगों की जिंदगी सरल हो रही है। भारत में 32 करोड़ लोग ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल कर रहे हैं। देश की एक लाख से अधिक ग्राम पंचायतों तक फाइबर नेटवर्क पहुंच चुका है। यह सब देश में हो रही डिजिटल क्रांति का ही संकेत है। देश में लगभग हर सेवा आॅनलाइन उपलब्ध है व ‘डिजिटल लेन-देन’ बढ़ रहा है। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी की प्राथमिकता नोएडा को विदेशी कंपनियों का केंद्र बनाना है। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश निवेशक सम्मेलन के दौरान गौतमबुद्धनगर में करीब 35 हजार करोड़ के निवेश के लिए देश-विदेश की बड़ी कंपनियों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे। इससे जिले में करीब 1.5 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। अगले 3 से 5 साल में जिले में इन कंपनियों की इकाइयां शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन इसके लिए नोएडा को लक्ष्य निर्धारित कर काम करना होगा। साथ ही, जाम, संपर्क, अतिक्रमण आदि की समस्याओं का समाधान करना होगा। ‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी उपलब्धियह ‘मेक इन इंडिया’ के तहत सबसे बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि 2014 में जब इसकी शुरुआत हुई थी, तब भारत में मोबाइल कंपनियों का बाजार करीब 19,000 करोड़ रुपये था। लेकिन इस पहल के बाद महज दो साल में ही इसमें रिकॉर्ड 373 फीसदी की वृद्धि हुई। 2016-17 में यह बाजार 90,000 करोड़ तक पहुंच गया था। ‘मेक इन इंडिया’ की घोषणा के बाद करीब 40 मोबाइल फोन कंपनियों ने भारत में संयंत्र लगाए हैं। यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। बीते वर्ष शाओमी, वनप्लस, लेनोवो, जियोनी और आसुस जैसी कंपनियों ने भी ‘मेक इन इंडिया’ के तहत निवेश की घोषणा की है। शियान लोंगी सिलिकॉन मैटीरियल्स कॉपोर्रेशन ने आंध्र प्रदेश में शुरुआत में 25 करोड़ डॉलर और बाद में इसके छह गुना निवेश का वादा किया है।स्वदेशीकरण को बढ़ावा केंद्र सरकार स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रही है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय का मानना है कि अगले वित्त वर्ष 2019-20 तक देश में बनने वाले फीचर फोन में स्वदेशी कलपुर्जों का इस्तेमाल मौजूदा 15 प्रतिशत से बढ़कर 37 प्रतिशत हो जाएगा। यही नहीं, स्मार्टफोन के निर्माण में भी स्वदेशी कलपुर्जों की हिस्सेदारी 10 से बढ़कर 26 प्रतिशत हो जाएगी। मंत्रालय के अनुसार, सरकार मोबाइल हैंडसेट निर्माण के लिए घरेलू स्तर पर पूरा इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है। इसी रणनीति के तहत घरेलू स्तर पर कलपुर्जे बनाने वाली इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्रालय ने इसके लिए विशेष तौर पर चरणबद्ध उत्पादन कार्यक्रम शुरू किया है। 2016-17 से लागू इस कार्यक्रम के पहले चरण में चार्जर, अडॉप्टर, बैटरी पैक और वायर्ड हेडसेट बनाने वाली इकाइयों की स्थापना पर जोर दिया गया है। दूसरे चरण में 2017-18 में मेकैनिक्स, डाई कट पार्ट्स, माइक्रोफोन और रिसीवर, कीपैड, यूएसबी केबल निर्माण वाली इकाइयों पर जोर रहा। चालू वित्त वर्ष 2018-19 में प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली, कैमरा मॉड्यूल, कनेक्टर्स निर्माण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जबकि अगले वर्ष डिस्प्ले असेंबली, टच पैनल, कवर ग्लास असेंबली से लेकर वाइब्रेटर मोटर और रिंगर बनाने वाली इकाइयों पर जोर रहेगा। देश में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण को प्रोत्साहन देने की नीति के अच्छे नतीजे दिख रहे हैं। देश में मोबाइल हैंडसेट और अन्य कलपुर्जे बनाने वाली इकाइयों की संख्या में भी तेज वृद्धि हुई है। मंत्रालय के मुताबिक 2014 में देश में ऐसी इकाइयों की संख्या मात्र दो थी जो अब 115 है।नीतिगत पहल देश में रक्षा उत्पादों के निर्माण के लिए सरकार ने 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की मंजूरी दी है। इसमें 49 प्रतिशत तक एफडीआई को सीधे मंजूरी का प्रावधान है। 49 प्रतिशत से अधिक के एफडीआई के लिए सरकार से अलग से मंजूरी लेनी पड़ती है। ‘मेक इन इंडिया’ के जरिये रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता खत्म करने की कोशिश की जा रही है। रक्षा मंत्रालय ने भारत में निर्मित कई उत्पादों का उद्घाटन किया है, जैसे हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लि. (एचएएल) का तेजस एयरक्राफ्ट, मध्यम दूरी की मिसाइलें व टैंक आदि। अभी तक सरकारी शिपयार्डों में ही युद्धपोतों के स्वदेशीकरण का काम चल रहा था, लेकिन देश में पहली बार नौसेना के लिए निजी क्षेत्र के शिपयार्ड में बने दो युद्धपोत पानी में उतारे गए हैं। रिलायंस डिफेंस एंड इंजीनियरिंग लि. ने 25 जुलाई, 2017 को गुजरात के पीपावाव में नौसेना के लिए शचि और श्रुति नामक दो आॅफशोर पेट्रोल वेसेल का जलावतरण किया है। अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन को अगर भारत में एफ-16 विमान बनाने की अनुमति मिल गई तो देश एफ-16 विमानों के रखरखाव का वैश्विक केंद्र बन सकता है। उम्मीद है कि लॉकहीड मार्टिन टाटा के साथ भारत में एफ-16 के ब्लॉक 70 का निर्माण करेगी। दरअसल, इस वक्त दुनिया में करीब 3,000 एफ-16 विमान हैं। भारत इनकी मरम्मत का केंद्र बन सकता है।                               देश में पहली बार निजी क्षेत्र के शिपयार्ड में बने दो युद्धपोतों का जलावतरण किया गया   स्टार्टअप्प में भी तेजी अमेरिका में नौकरी कर रहे आईआईटी के छात्र अब नौकरी छोड़कर देश लौट रहे हैं और रोजना औसतन 3-4 स्टार्टअप लगा रहे हैं। साथ ही, देश के युवा उद्यमी भी तेजी से अपना कारोबार बढ़ा रहे हैं और निवेशकों से अरबों रुपये हासिल कर रहे हैं। अमेरिका में सिलिकॉन वैली में नई खोज में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी आईटी आधारित नवाचार की होती है। इसका14 प्रतिशत श्रेय भारतीयों को जाता है। मोदी सरकार द्वारा उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के कारण देश में जनवरी-अगस्त 2017 के दौरान 74,650 नई कंपनियों का पंजीकरण हुआ। अकेले अगस्त महीने में 9,413 कंपनियां पंजीकृत हुर्इं, जबकि मार्च में सर्वाधिक 11,293 कंपनियों का पंजीकरण किया गया। तकनीक के क्षेत्र में बढ़ते कदम बीते कुछ वर्षों में भारत ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। हाल में ही इसरो द्वारा एक साथ 104 सैटेलाइट लॉन्च करने के बाद भारत की धाक बढ़ी है। भारत ने पूरे विश्व में अपने इंजीनियर और वैज्ञानिकों के लिए बड़ी मांग पैदा की है। दुनिया में अब भारत से उच्च स्तर के टेक्नोलॉजी और साइंटिफिक ब्रेन को अपने यहां खींचने की होड़ लग गई है। कुल मिलाकर विनिर्माण के क्षेत्र में भारत तेजी से प्रगति कर रहा है और बेहतर कारोबारी माहौल से विदेशी निवेश भी बड़े पैमाने पर भारत आ रहा है साथ ही दुनियां की बड़ी कम्पनियां भारत में अपना प्लांट स्थापित करना चाहतीं है ।(लेखक राजस्थान के मेवाड़ विश्वविद्यालय में उपनिदेशक हैं और टेक्निकल टुडे पत्रिका के संपादक हैं )

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे इन के साथ नोएडा स्थित दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल संयंत्र का उद्घाटन करते हुए। साथ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 

 

केंद्र सरकार के ‘मेक इन इंडिया अभियान’ के तहत कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की बड़ी कंपनी सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने उत्तर प्रदेश के नोएडा में दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री की स्थापना की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन के साथ इस संयंत्र का उद्घाटन किया। नोएडा के सेक्टर-81 में स्थित यह संयंत्र 4,915 करोड़ रुपये के निवेश से बना है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगले कुछ वर्षों में मोबाइल उत्पादन के क्षेत्र में भारत में 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। इससे रोजगार के 4-5 लाख नए अवसर पैदा होंगे।

भारत में ही क्यों?

चीन, दक्षिण कोरिया और अमेरिका को छोड़कर आखिर सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री भारत में ही क्यों लगी? इसके पीछे कई कारण हैं। दरअसल, मोदी सरकार के आने के बाद विनिर्माण क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है। साथ ही, उत्पादन इकाई लगाने वालों को केंद्र सरकार से सहयोग भी मिल रहा है। दूसरी बात, भारतीय मोबाइल बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सैमसंग हरसंभव उपाय कर रही है। नोएडा में नए संयंत्र की स्थापना इसी रणनीति के तहत की गई है। इसमें सालाना 12 करोड़ मोबाइल का उत्पादन होगा, जिससे देश के मोबाइल फोन बाजार में सैमसंग पुन: अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगी। फिलहाल सैमसंग भारत में करीब 6.7 करोड़ स्मार्टफोन बनाती है, जो नई इकाई के शुरू होने के बाद दोगुनी हो सकती है। सैमसंग ने इस इकाई की शुरुआत इसलिए की है, क्योंकि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल बाजार है। देश में दुनियाभर के 10 फीसदी मोबाइल फोन बिकते हैं। 2017 तक देश में करीब 30 करोड़ मोबाइल उपभोक्ता थे जो 2018 के आखिर तक 35 करोड़ हो सकते हैं। 2022 तक देश में यह आंकड़ा 45 करोड़ होने की संभावना है। 

2016-17 में सैमसंग के कुल 50,000 करोड़ के बिक्री राजस्व में 34,000 करोड़ मोबाइल से था। यहां न केवल भारतीय बाजार के लिए फोन बनेंगे, बल्कि अनेक यूरोप, पश्चिमी एशिया व अफ्रीका को निर्यात भी किया जाएगा। इस इकाई से रेफ्रिजरेटर का उत्पादन भी दोगुना हो जाएगा। पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि डिजिटल तकनीक से लोगों की जिंदगी सरल हो रही है। भारत में 32 करोड़ लोग ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल कर रहे हैं। देश की एक लाख से अधिक ग्राम पंचायतों तक फाइबर नेटवर्क पहुंच चुका है। यह सब देश में हो रही डिजिटल क्रांति का ही संकेत है। देश में लगभग हर सेवा आॅनलाइन उपलब्ध है व ‘डिजिटल लेन-देन’ बढ़ रहा है। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी की प्राथमिकता नोएडा को विदेशी कंपनियों का केंद्र बनाना है। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश निवेशक सम्मेलन के दौरान गौतमबुद्धनगर में करीब 35 हजार करोड़ के निवेश के लिए देश-विदेश की बड़ी कंपनियों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे। इससे जिले में करीब 1.5 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। अगले 3 से 5 साल में जिले में इन कंपनियों की इकाइयां शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन इसके लिए नोएडा को लक्ष्य निर्धारित कर काम करना होगा। साथ ही, जाम, संपर्क, अतिक्रमण आदि की समस्याओं का समाधान करना होगा।

‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी उपलब्धि

यह ‘मेक इन इंडिया’ के तहत सबसे बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि 2014 में जब इसकी शुरुआत हुई थी, तब भारत में मोबाइल कंपनियों का बाजार करीब 19,000 करोड़ रुपये था। लेकिन इस पहल के बाद महज दो साल में ही इसमें रिकॉर्ड 373 फीसदी की वृद्धि हुई। 2016-17 में यह बाजार 90,000 करोड़ तक पहुंच गया था। ‘मेक इन इंडिया’ की घोषणा के बाद करीब 40 मोबाइल फोन कंपनियों ने भारत में संयंत्र लगाए हैं। यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। बीते वर्ष शाओमी, वनप्लस, लेनोवो, जियोनी और आसुस जैसी कंपनियों ने भी ‘मेक इन इंडिया’ के तहत निवेश की घोषणा की है। शियान लोंगी सिलिकॉन मैटीरियल्स कॉपोर्रेशन ने आंध्र प्रदेश में शुरुआत में 25 करोड़ डॉलर और बाद में इसके छह गुना निवेश का वादा किया है।

स्वदेशीकरण को बढ़ावा

केंद्र सरकार स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रही है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय का मानना है कि अगले वित्त वर्ष 2019-20 तक देश में बनने वाले फीचर फोन में स्वदेशी कलपुर्जों का इस्तेमाल मौजूदा 15 प्रतिशत से बढ़कर 37 प्रतिशत हो जाएगा। यही नहीं, स्मार्टफोन के निर्माण में भी स्वदेशी कलपुर्जों की हिस्सेदारी 10 से बढ़कर 26 प्रतिशत हो जाएगी। मंत्रालय के अनुसार, सरकार मोबाइल हैंडसेट निर्माण के लिए घरेलू स्तर पर पूरा इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है। इसी रणनीति के तहत घरेलू स्तर पर कलपुर्जे बनाने वाली इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्रालय ने इसके लिए विशेष तौर पर चरणबद्ध उत्पादन कार्यक्रम शुरू किया है। 2016-17 से लागू इस कार्यक्रम के पहले चरण में चार्जर, अडॉप्टर, बैटरी पैक और वायर्ड हेडसेट बनाने वाली इकाइयों की स्थापना पर जोर दिया गया है। दूसरे चरण में 2017-18 में मेकैनिक्स, डाई कट पार्ट्स, माइक्रोफोन और रिसीवर, कीपैड, यूएसबी केबल निर्माण वाली इकाइयों पर जोर रहा। चालू वित्त वर्ष 2018-19 में प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली, कैमरा मॉड्यूल, कनेक्टर्स निर्माण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जबकि अगले वर्ष डिस्प्ले असेंबली, टच पैनल, कवर ग्लास असेंबली से लेकर वाइब्रेटर मोटर और रिंगर बनाने वाली इकाइयों पर जोर रहेगा। देश में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण को प्रोत्साहन देने की नीति के अच्छे नतीजे दिख रहे हैं। देश में मोबाइल हैंडसेट और अन्य कलपुर्जे बनाने वाली इकाइयों की संख्या में भी तेज वृद्धि हुई है। मंत्रालय के मुताबिक 2014 में देश में ऐसी इकाइयों की संख्या मात्र दो थी जो अब 115 है।

नीतिगत पहल

देश में रक्षा उत्पादों के निर्माण के लिए सरकार ने 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की मंजूरी दी है। इसमें 49 प्रतिशत तक एफडीआई को सीधे मंजूरी का प्रावधान है। 49 प्रतिशत से अधिक के एफडीआई के लिए सरकार से अलग से मंजूरी लेनी पड़ती है। ‘मेक इन इंडिया’ के जरिये रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता खत्म करने की कोशिश की जा रही है।

रक्षा मंत्रालय ने भारत में निर्मित कई उत्पादों का उद्घाटन किया है, जैसे हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लि. (एचएएल) का तेजस एयरक्राफ्ट, मध्यम दूरी की मिसाइलें व टैंक आदि। अभी तक सरकारी शिपयार्डों में ही युद्धपोतों के स्वदेशीकरण का काम चल रहा था, लेकिन देश में पहली बार नौसेना के लिए निजी क्षेत्र के शिपयार्ड में बने दो युद्धपोत पानी में उतारे गए हैं। रिलायंस डिफेंस एंड इंजीनियरिंग लि. ने 25 जुलाई, 2017 को गुजरात के पीपावाव में नौसेना के लिए शचि और श्रुति नामक दो आॅफशोर पेट्रोल वेसेल का जलावतरण किया है। अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन को अगर भारत में एफ-16 विमान बनाने की अनुमति मिल गई तो देश एफ-16 विमानों के रखरखाव का वैश्विक केंद्र बन सकता है। उम्मीद है कि लॉकहीड मार्टिन टाटा के साथ भारत में एफ-16 के ब्लॉक 70 का निर्माण करेगी। दरअसल, इस वक्त दुनिया में करीब 3,000 एफ-16 विमान हैं। भारत इनकी मरम्मत का केंद्र बन सकता है।

 

                              देश में पहली बार निजी क्षेत्र के शिपयार्ड में बने दो युद्धपोतों का जलावतरण किया गया  

 

स्टार्टअप्प में भी तेजी

अमेरिका में नौकरी कर रहे आईआईटी के छात्र अब नौकरी छोड़कर देश लौट रहे हैं और रोजना औसतन 3-4 स्टार्टअप लगा रहे हैं। साथ ही, देश के युवा उद्यमी भी तेजी से अपना कारोबार बढ़ा रहे हैं और निवेशकों से अरबों रुपये हासिल कर रहे हैं। अमेरिका में सिलिकॉन वैली में नई खोज में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी आईटी आधारित नवाचार की होती है। इसका14 प्रतिशत श्रेय भारतीयों को जाता है। मोदी सरकार द्वारा उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के कारण देश में जनवरी-अगस्त 2017 के दौरान 74,650 नई कंपनियों का पंजीकरण हुआ। अकेले अगस्त महीने में 9,413 कंपनियां पंजीकृत हुर्इं, जबकि मार्च में सर्वाधिक 11,293 कंपनियों का पंजीकरण किया गया।

तकनीक के क्षेत्र में बढ़ते कदम

बीते कुछ वर्षों में भारत ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। हाल में ही इसरो द्वारा एक साथ 104 सैटेलाइट लॉन्च करने के बाद भारत की धाक बढ़ी है। भारत ने पूरे विश्व में अपने इंजीनियर और वैज्ञानिकों के लिए बड़ी मांग पैदा की है। दुनिया में अब भारत से उच्च स्तर के टेक्नोलॉजी और साइंटिफिक ब्रेन को अपने यहां खींचने की होड़ लग गई है। कुल मिलाकर विनिर्माण के क्षेत्र में भारत तेजी से प्रगति कर रहा है और बेहतर कारोबारी माहौल से विदेशी निवेश भी बड़े पैमाने पर भारत आ रहा है साथ ही दुनियां की बड़ी कम्पनियां भारत में अपना प्लांट स्थापित करना चाहतीं है ।

(लेखक राजस्थान के मेवाड़ विश्वविद्यालय में उपनिदेशक हैं और टेक्निकल टुडे पत्रिका के संपादक हैं )