बलूचिस्तान से पाञ्चजन्य की रिपोर्ट: इमरान को ऐसे जिताया फौज ने

 

 

 

यह ‘इलेक्शन’ नहीं ‘सेलेक्शन’ था। फौज जबरदस्ती लोगों को बूथों तक ले गई और पसंद के कैंडिडेट को वोट दिलाए। सब कुछ पहले से लिखी स्क्रिप्ट के मुताबिक हुआ। सेना ने पाकिस्तान में कैसे इमरान को जिताया वह आप इस वीडियो में सुन सकते हैं प्रस्तुत है तुरबत बलूचिस्तान से पाञ्चजन्य के लिए शकीर बलोच की ग्राउंड रिपोर्ट :-

यह ‘इलेक्शन’ नहीं ‘सेलेक्शन’ था। फौज जबरदस्ती लोगों को बूथों तक ले गई और पसंद के कैंडिडेट को वोट दिलाए। सब कुछ पहले से लिखी स्क्रिप्ट के मुताबिक हुआ। सेना ने पाकिस्तान में कैसे इमरान को जिताया वह आप इस वीडियो में सुन सकते हैं प्रस्तुत है तुरबत बलूचिस्तान से पाञ्चजन्य के लिए शकीर बलोच की ग्राउंड रिपोर्ट :-

 

पाकिस्तान की सियासत में बेशक इमरान खान एक नए मुकाम पर पहुंच गए हों, और पाकिस्तान को बदलने की बात कर रहे हों लेकिन बलूचिस्तान के लिए कुछ भी नहीं बदला। वहां पहले भी फौज तय करती थी कि कौन जीतेगा, आज भी यही हो रहा है। पूरे बलूचिस्तान में फौज के जवान लोगों को जबरन उठाकर पोलिंग बूथ तक ले गए और उन्हें अपने पहले से तय कैंडिडेट को वोट दिलवाए।

बलूचिस्तान की ज्यादातर सियासी तंजीमों ने इलेक्शन में शामिल नहीं होने का फैसला किया था, क्योंकि उन्हें मालूम था कि होगा वही जो सेना चाहेगी। फिर भी जिन चंद लोगों ने नाऊम्मीदी के बीच उम्मीद बांध ली थी, उन्हें वही हासिल हुआ जो होना था। तारीखें बदलीं, लेकिन पाकिस्तानी फौज के तौर-तरीके नहीं बदले। बलूचिस्तान में ‘सेलेक्शन’ का यह फौजी खेल किस कदर खेला गया, उसका अंदाजा करना हो तो इस रिपोर्ट के साथ पेश हम्माल कलमाती के इजहारे हकीकत पर गौर फरमाएं। उनका ताल्लुक बलूचिस्तान नेशनलिस्ट पार्टी से है, लेकिन उन्हें फौज ने चुना। जब फौज की रहनुमाई में वोट डाले जा रहे थे, तो हम्माल को भी बाहर ही रोक दिया गया और तय स्ट्रैटिजी के तहत हम्माल को फौज के खिलाफ बोलने को कहा गया। हम्माल ने वही किया। हम्माल ने शिकायत की कि फौज मनमानी कर रही है और उन्हें भी बूथ के भीतर जाने से रोका जा रहा है। बाद में जब वोटों की गिनती हुई तो हम्माल को जीता दिखाया गया। दरअसल, हम्माल के जरिये फौज यह बताना चाहती थी कि लोग बेवजह ही इलेक्शन में गड़बड़ी की बात कर रहे हैं। अगर सच में कोई गड़बड़ी होती तो भला हम्माल चुनाव कैसे जीतते?

फौज ने जिन लोगों को पकड़कर वोट दिलाए, उनमें से एक बुजुर्गवार परवेज बलोच ने कहा कि “हमें जबरन उठाकर लाया गया। पहले तो उन्होंने हमें घरों से बाहर निकालकर लाइन में बैठाया, फिर गाड़ियों में भरकर बूथ पर लाए। हमारी गाड़ी में औरतें भी थीं। हमसे जबरन ठप्पा लगवाया गया। कई लोगों के बदले तो वे ही ठप्पा लगा रहे थे।” कमोबेश इसी तर्ज पर बलूचिस्तान में इलेक्शन हुआ है। लोगों को बूथ तक ले जाकर फौज दुनिया को यही दिखाना चाहती थी कि यहां बलूचिस्तान की अवाम पाकिस्तान के इलेक्शन में अपनी मर्जी से शामिल हुई, जबकि हकीकत कुछ और है।