मौलाना कब्जाना चाहते हैं मस्जिद के पास वाले मैदान की जमीन: वसीम रिजवी

—  टीले वाली मस्जिद में नियम विरुद्ध मरम्मत का कार्य हुआ था और अब मौलाना सरकारी पार्क भी कब्जा करना चाहते हैं

लखनऊ में टीले वाली मस्जिद के पास वाले मैदान में लक्ष्मण जी की मूर्ति लगाने का विरोध कर रहे मौलानाओं को लेकर शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिज़वी ने पांचजन्य से कहा कि "जिस जमीन पर लक्ष्मण जी की मूर्ति लगाने का प्रस्ताव है। वह जमीन नगर निगम के अधीन है , उस पर आपत्ति करने का किसी को अधिकार ही नहीं है। यह सब मौलानाओं की हठधर्मिता है।  

इस्लाम में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि अगर एक बार मस्जिद बन गयी तो उसके अगल बगल कुछ नहीं हो सकता। दूसरी बात यह है कि नमाज जहां अदा की जाती है। वहां पर तो मूर्ति लगने ही नहीं जा रही है। अब ऐसे में मौलानाओं का यह कहना कि जब नमाजियों की भीड़ बढ़ जाती है तो कुछ नमाजी पार्क में नमाज पढ़ने पहुंच जाते हैं। यह भी एक अजीब तमाशा है। जहां मर्जी आए वहां नमाज पढेंगे। यदि सरकारी जमीन पर नमाज पढ़ने लग जाए तो सरकार क्या उस जमीन को ऐसे ही छोड़ देगी ? नमाज के लिए जमीन चाहिए तो सरकार से लीज पर ले लीजिए। इसके अलावा सबसे अहम बात यह है कि इमामबाड़े के 100 मीटर के दायरे में यह टीले वाली मस्जिद आती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान की बगैर अनुमति के इन लोगों ने इस मस्जिद में निर्माण और उसका विस्तार किया था। जिस समय यह निर्माण किया गया था वह नियम विरुद्ध था। ये लोग स्वयं नियम का पालन नहीं करते। पहले तो नियम विरुद्ध मस्जिद में निर्माण कार्य कराया और अब सरकारी पार्क भी कब्जाना चाहते हैं। इस सम्बन्ध में लखनऊ की महापौर संयुक्ता भाटिया का कहना है कि मौलाना बयानबाजी करके माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। टीले वाली मस्जिद के पास ही कोने पर पहले ही एक मंदिर है जब मंदिर से कोई आपत्ति नहीं है तो लक्ष्मण जी के मूर्ति से क्यों आपत्ति हो रही है। नगर निगम में किसी भी मौलाना की तरफ से न तो कोई लिखित शिकायत की गई है और न ही कोई मौखिक शिकायत की गई है। यह बयानबाजी केवल माहौल को खराब करने और राजनीति चमकाने के लिए की जा रही है। लक्ष्मण जी की मूर्ति लगाने का पहले से ही विचार चल रहा था इसी बीच हमारे दो पार्षदों के माध्यम से यह प्रस्ताव आया। जिसे कार्यकारिणी ने पास कर दिया । यदि हमें एएसआई से किसी प्रकार की अनुमति लेने की बात सामने आती है तो वहां से भी अनुमति ली जाएगी। टीले वाली मस्जिद के पास नगर निगम की अपनी जमीन है वहां पर लक्ष्मण जी की मूर्ति लगाने पर किसी को कोई आपत्ति होनी ही नहीं चाहिए।