जब एक गाने से डर गए थे अंग्रेज

क्या कोई हुकूमत किसी एक गाने से डर सकती है ? जी हां, ऐसा संभव है। आपको यह जानकार हैरत जरूर होगी कि एक गाने से अंग्रेजी हुकूमत डर गई थी। गाने से डरकर अंग्रेजों ने उस गाने को छह साल तक के लिए बैन कर दिया था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने उसी गाने को आजाद हिंद फौज का गाना बनाया था आज भारतीय फौज भी उस गाने को बड़े गर्व से गाती है,फौज का बैंड सैनिकों के कूच करने के दौरान और परेड के दौरान इस गाने की धुन को बजाता है।

अंग्रेजी हुकूमत को उखाड़ फेंकने के लिए कितने ही भारतमाता के वीर बलिदान हुए। लंबा संघर्ष चला, तब जाकर हमें आजादी मिली, लेकिन अंग्रेजों को एक गाने ने भी इतना डरा दिया था कि उन्होंने उस गाने पर पाबंदी लगा दी थी। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अंग्रेजों ने डर की वजह से इस गाने को बैन कर दिया था। दरअसल ब्रिटिश सेना में बड़ी संख्या में भारतीय सैनिक थे तो अंग्रेजों को लगता था कि कहीं इस गाने को सुनकर सेना उनके खिलाफ विद्रोह न कर दे। वहीं देश के युवा भी इस गाने को बड़े जोश से गाते थे। आजाद हिंद फौज ने इस गाने को अपना मार्च सांग बनाया था। यह गाना था,

' क़दम क़दम बढ़ाए जा

ख़ुशी के गीत गाये जा

ये ज़िंदगी है क़ौम की

तू क़ौम पे लुटाये जा

तू शेर-ए-हिन्द आगे बढ़

मरने से तू कभी न डर

उड़ा के दुश्मनों का सर

जोश-ए-वतन बढ़ाए जा '

जब आजाद हिंद फौज की स्थापना हुई तो फौज ने गाने को अपना गीत बनाया। आजाद हिंद फौज आगे बढ़ते हुए इस गाने को गाती थी। फौज जब इस गाने को गाते हुए आगे बढ़ती तो उनका जोश देखने लायक होता। देश के युवा इस गाने को गाते थे। इस गाने से युवाओं में देशभक्ति की भावना और देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा जोर मारता था। जब अंग्रेजों को इस गाने के बारे में पता चला तो वह इतना डर गए कि उन्होंने गाने पर पाबंदी लगा दी। गाने पर से पाबंदी तब हटी जब देश आजाद हो गया। जिस फिल्म में यह गाना था उसका नाम था समाधि। फिल्म अंग्रेजों के जाने के बाद रिलीज हुई थी। गाने को रामसिंह ठाकुर ने कंपोज किया था और पंडित वशीधर से इसे लिखा था। भारतीय फौज आज भी मार्च के दौरान इसी गाने को बजाती है।