इकलौते बेटे को खोने का दर्द क्या होता है कोई इनसे पूछे
   दिनांक 08-जुलाई-2018
पिछले दिनों दिल्ली के रघुबीर नगर में यशपाल सक्सेना और कमलेश सक्सेना के सामने ही कुछ मुसलमानों ने उनके इकलौते बेटे अंकित की हत्या कर दी। उनके ‘दर्द को बांटने’ के नाम पर कुछ सेकुलर उनकी देहरी पर जाकर दोहरी चाल रहे हैं। वे लोग दिखाने के लिए सक्सेना परिवार को मदद दे रहे हैं। असल मकसद मामले को ठंडा कर आरोपों को कुंद करना है। आंखों के सामने अपने इकलौते बेटे को मरते देखने के बाद आज सक्सेना दंपती कैसे हैं कोई उनकी खोज खबर लेने वाला नहीं है

इंसाफ की आस में यशपाल सक्सेना और उनकी पत्नी कमलेश सक्सेना।
उस दिन शाम के लगभग पांच बज रहे थे। पश्चिमी दिल्ली के एक उपनगर रघुबीर नगर के ए ब्लॉक की गलियों में बरसात की आहट से कम चहल-पहल थी। मुख्य गली के मुहाने पर मैंने एक सज्जन से पूछा, ‘‘सक्सेना जी का घर कौन-सा है?’’ उन्होंने बताया कि कुछ आगे बढ़ने के बाद दार्इं ओर की सीढ़ियों से ऊपर जाएं। बार्इं तरफ का फ्लैट उन्हीं का है। दरवाजा खुला हुआ था। हां, एक पतला-सा परदा जरूर लटक रहा था। दरवाजा खटखटाने पर उदासी से भरी एक महिला निकलीं। उन्होंने बिना पूछताछ कहा, अंदर आओ। फ्लैट के नाम पर सिर्फ एक कमरा है। उसी में एक तरफ खाना बनता है और दूसरी तरफ बिस्तर है। बिस्तर के साथ ही दो कुर्सियां रखी हुर्इं। बैठते ही सामने की दीवार पर टंगी एक तस्वीर पर नजर गई। उसके नीचे रोमन में लिखा है, ‘‘इंसाफ कब?’’
यह तस्वीर है 23 वर्षीय अंकित सक्सेना की, जिसकी हत्या इसी साल 1 फरवरी को कर दी गई थी। यह महिला थीं अंकित की मां कमलेश। उनके सामने ही अनवर अली, जो एक कसाई है, ने पीछे से अंकित को पकड़ा और उसके बेटे आसिफ ने चाकू से गला रेत दिया। आसिफ की मां शहनाज और उसके मामा मोहम्मद सलीम ने उन दोनों की मदद की। चारों अभी जेल में हैं। अंकित अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। पिता यशपाल सक्सेना ह्दय रोग से पीड़ित हैं। एक आॅपरेशन भी हो चुका है। इस हालत में घर का पूरा दारोमदार अंकित पर ही था। हत्या से पहले हत्यारों ने उसके साथ मारपीट भी की थी। अंकित पर यह आरोप था कि उसने अकबर की बेटी को छुपा रखा है, जबकि अंकित इससे इनकार करता रहा।
झगड़े के दौरान उसने हत्यारों से कहा भी, ‘पुलिस बुला लो मैं यहीं हूं’, लेकिन उन पर तो मानो खून सवार था। हत्यारों ने अंकित को तीन सेकेंड में मार दिया, वह भी उसके माता-पिता के सामने।
पांच महीने बाद भी उसकी मां कमलेश सदमे से बाहर नहीं निकल पाई हैं। घटना के बाद तीन माह तक तो वे अचेत-सी ही रहीं। अब छोटे-मोटे घरेलू काम करने लगी हैं, लेकिन बोलती बहुत कम हैं। चुप ही रहना पसंद करती हैं। इसलिए घर पर आने वालों से भी नहीं बोलतीं। बहुत कुरेदने पर कहती हैं, ‘‘कातिलों को सजा मिलने तक ही जिंदा रहने की इच्छा है। किसके लिए जीना और क्यों जीना?’’
लेकिन जिस तरह से कुछ कुख्यात सेकुलर और उनके चेले उनकी देहरी तक पहुंच रहे हैं, उससे लोगों को अनेक शंकाएं होने लगी हैं। खुद अंकित के पिता यशपाल सक्सेना भी मानने लगे हैं कि कुछ न कुछ गड़बड़ है। लोगों का कहना है कि ये सेकुलर कुछ पैसे देकर और फौरी हमदर्दी दिखाकर अंकित के माता-पिता को मुकदमे के प्रति नरम रुख अपनाने की सलाह दे सकते हैं, ताकि हत्यारों को बचाया जा सके। खुद यशपाल कहते हैं, ‘‘इन लोगों ने कहा है कि आप कुछ न करें। हम लोग वकील भी कर देंगे और अंतिम दम तक मुकदमा लड़ेंगे, लेकिन आसिफ (जो जुवेनाइल अदालत में है) के विरुद्ध तीन तारीखें पड़ चुकी हैं। किसी में भी मेरी ओर से कोई वकील नहीं गया। उनके भरोसे रहकर शायद मैं गलत कर रहा हूं, लेकिन मैं क्या करूं, वकील करने के लिए मेरे पास पैसे नहीं हैं।’’ वे यह भी कहते हैं, ‘‘17 जुलाई से तीस हजारी अदालत में तीन आरोपियों के विरुद्ध सुनवाई शुरू होने वाली है, पर अभी तक कोई वकील तय नहीं हुआ है।’’
यशपाल को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी शिकायत है। वे कहते हैं, ‘‘हादसे के बाद अरविंद केजरीवाल आए थे। उस समय उन्होंने कहा था, नियमानुसार 5,00,000 रु. मिलेंगे और मुकदमा लड़ने के लिए दिल्ली सरकार की ओर से वकील भी मुहैया कराया जाएगा, लेकिन अभी तक एक पैसा नहीं मिला है। वकील भी नहीं दिया गया है। उनसे मिलने के लिए कई बार समय मांगा, पर समय नहीं दिया जा रहा है।’’ उन्होंने यह भी कहा, ‘‘मेरे घर जो सामाजिक कार्यकर्ता आते हैं, वे कहते हैं आप मुख्यमंत्री से समय न मांगें, हम लोग उनसे बात करके सारा इंतजाम कर देंगे, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। उन पर भरोसा कर कहीं मैं कुछ गलत तो नहीं कर रहा हूं।’’ अगले क्षण यह भी कहते हैं, ‘‘उन पर भरोसा करना मेरी मजबूरी है, क्योंकि उनके अलावा मेरे पास और कोई नहीं आता। मेरी कोई मदद नहीं करता।’’
ये सेकुलर उनकी इसी कमजोरी का लाभ उठा रहे हैं। इतना ही नहीं, इनके नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 3 जून को यशपाल के घर के पास इफ्तार पार्टी की गई। मीडिया में यह प्रचारित किया गया कि इस पार्टी का आयोजन यशपाल सक्सेना ने किया। लेकिन यशपाल कहते हैं, ‘‘इफ्तार पार्टी का आयोजन मैंने नहीं किया था। पड़ोस में रहने वाले मुसलमानों ने किया था, लेकिन उसमें मेरा नाम लिया गया। यह मेरे नाम का दुरुपयोग है।’’ उल्लेखनीय है कि इफ्तार पार्टी में सेकुलर सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व नौकरशाह हर्ष मंदर, भ्रष्टाचार और मरीज के इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप में गोरखपुर अस्पताल से निलंबित डॉ. कफील, जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के अनेक अध्यापक और छात्र, ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे...’ जैसे देश विरोधी नारे लगाने वाले जे.एन.यू. के अनेक छात्र शामिल हुए थे। यशपाल यह भी कहते हैं, ‘‘इफ्तार के लिए किसने पैसे दिए, सैकड़ों मुसलमान कार्यकर्ता कहां से आए, उन्हें यहां आने के लिए किसने कहा, यह सब कुछ रहस्य लगता है।’’ यशपाल यह भी कहते हैं, ‘‘इफ्तार के बाद खाड़ी के देशों से भी उनके पास फोन आ रहे हैं। वे लोग कहते हैं, आपने इफ्तार का आयोजन कर बहुत अच्छा किया। ऐसे लोगों को मेरा मोबाइल नंबर किसने दिया? यह सब मेरी समझ से बाहर की बात है।’’ सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण शर्मा कहते हैं, ‘‘इफ्तार करने वालों ने ही यशपाल का मोबाइल नंबर सार्वजनिक किया होगा। ऐसे लोग हत्यारों को बचाने में लगे हैं। इन सबसे सतर्क रहना होगा।’’
इतना ही नहीं, ये सेकुलर अंकित के माता-पिता का दिल जीतने के लिए उसका जन्मदिन भी मनाने लगे हैं। उस दिन हर्ष मंदर जैसे सेकुलर रघुबीर नगर पहुंचे। जिस जगह अंकित की हत्या हुई उसी जगह उसका जन्मदिन मनाया गया। इसके लिए भी किसने पैसा खर्च किया, यह किसी को नहीं पता। अंत में यशपाल समाज के लोगों से अपील करते हैं कि वे उनकी मदद के लिए आगे आएं, ताकि कातिलों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।