उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही है मुसलमानों की आबादी
   दिनांक 01-अगस्त-2018
दिनेश मानसेरा
उत्तराखंड बनने के बाद से यहां के मैदानी जनपदों में मुसलमानों की आबादी में तेज़ी से इजाफा हुआ है साथ ही इन इलाको में नई मस्जिदों के निर्माण के साथ साथ पुरानी मस्जिदों के पुनर्निर्माण में भी तेजी देखी गई है। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है ? क्या यह किसी खास मकसद के तहत हो रहा है, यह एक बड़ा सवाल है?
उत्तराखंड की 2011 की जनसंख्या के आंकड़ों के अनुसार यहां की 10116575 की आबादी में 13.94 प्रतिशत मुस्लिम आबादी हो गई है,जबकि 2001 में मुस्लिम आबादी केवल 11.9 फीसदी के करीब थी। तीर्थ नगरी हरिद्वार जिले में मुस्लिम आबादी में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है यहां 33.16 प्रतिशत आबादी मुस्लिमों की बढ़ कर 4 लाख 78 हज़ार से ज्यादा हो गई है,2011 से 2018 में ये आबादी और भी ज्यादा हो गई है ऐसा ताज़ा सर्वे और वोटरलिस्ट से मिले आंकड़े बता रहे हैं।
उत्तरप्रदेश के सहारनपुर,मुज्जफरनगर, नजीबाबाद, बिजनौर ,मेरठ जिलों से घिरे हरिद्वार और देहरादून जिलो में मुस्लिम वोट बैंक उत्तराखंड की राजनीति के साथ साथ सामाजिक व्यवस्था को भी प्रभावित कर रहा है,अपराध की दृष्टि से ये जिले सबसे ज्यादा मुस्लिम अपराधियों की वजह से प्रभावित है।
देहरादून घाटी में आज़ादी से पूर्व काफी मुस्लिम आबादी थी विभाजन के दौरान यहां से लोग चले गए और अब उनके रिश्तेदार जो कि देहरादून के साथ लगे मुस्लिम बहुल जिलो में रहते थे,ज़मीनों के पुराने दस्तावेज निकाल कर देहरादून की जमीनों पर अपने दावे कर रहे हैं कब्जे कर रहे है ,ये विषय एक चिंताजनक समस्या के रूप में सामने आया है।
उधम सिंह नगर में 2011 की दशकीय आबादी दर मुसलमानों की 33.40 फीसदी और देहरादून में 32.48 फीसदी की रही है, इसके अलावा रामनगर,कोटद्वार, हल्द्वानी, कालाढूंगी,टनकपुर बनबसा ऐसे शहर चिन्हित हुए है जहां मुस्लिम आबादी दर तीस फीसदी से ज्यादा हर दस साल में बढ़ती जा रही है।
कारपेंटर,राज मिस्त्री, मजदूर, बैंड वादक,बगीचों खेतों में काम करने वाले मजदूरों में मुस्लिम ज्यादा हैं। उत्तराखण्ड में मुस्लिमों की बढ़ती आबादी अन्य जिलों में 17 फीसदी के आसपास बढ़ रही है ,बढ़ती आबादी के साथ साथ धार्मिक उन्माद की घटनाएं भी बढ़ रही हैं,उधम सिंह नगर और हरिद्वार जिलो में लव जिहाद की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है यहीं नही पौड़ी गढ़वाल जिले में पिछले दो सालों में मुस्लिम युवकों द्वारा हिन्दू लड़कियों को बहला फुसला कर भगा ले जाने की आधा दर्जन घटनाएं हुई है।
उत्तराखण्ड में धारचूला सीमावर्ती कस्बा है जहां उत्तराखण्ड बनने से पहले तक इनर लाइन परमिट से जाया जाता था आज इस कस्बे में मुसलमानों की बड़ी आबादी हो गयी है मस्जिद भी बन गई है, लोहाघाट, चंपावत ऐसे इलाके हैं जो नेपाल सीमा से लगे हुए है यहां भी बड़ी बड़ी मस्जिद बनती जा रही हैं, भवाली भीमताल नैनीताल जैसे पर्यटक शहरों में मुस्लिम आबादी ने आलीशान मस्जिदें खड़ी कर ली हैं इन मस्जिद को बनाने वाली संस्थाओं के पास पैसा अचानक से कैसे और कहां से आया ये एक बड़ा सवाल है,
कांग्रेस शासनकाल में मदरसों को खासतौर पर हरीश रावत सरकार ने अपनी वित्त पोषित योजनाओं से अल्पसंख्यक वज़ीफों के फर्जीवाड़ों से पनपने दिया। जिस पर अब आधार कार्ड के जरिए काफी अंकुश लगा है।
उत्तराखण्ड में बाहरी प्रदेशों का व्यक्ति 3000 वर्ग फुट से ज्यादा जमीन नहीं ले सकता फिर भी यहां तेजी से मुसलमानों की आबादी बढ़ रही है। सरकारी ज़मीनों पर कब्जे कर दरगाह और मस्जिद बनाई जा रही हैं, रेलवे की जमीनों पर आलीशान मकान बन गए हैं, हल्द्वानी रेलवे की ज़मीन पर बसी ढोलक बस्ती इस का उदाहरण है। इस बस्ती को हटाने के लिए उच्चतम न्यायालय का आदेश आ चुका है बावजूद इसके नैनीताल प्रशासन इस बस्ती को हटाने का साहस नहीं जुटा सका है, कॉर्बेट सिटी रामनगर में कोसी नदी किनारे हज़ारों लोग वन भूमि पर अवैध कब्जे किए हुए हैं और अब ये एक बड़ा वोट बैंक हैं। वनभूमि पर काबिज लोग मस्जिदों का निर्माण करके उसके आसपास पहले अपने कच्चे फिर पक्के मकान बना रहे हैं। बहरहाल यह एक चिंताजनक विषय है कि देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखण्ड में एक साजिश के तहत मुस्लिम आबादी बढ़ रही है।