उत्तराखण्ड में कराया कन्वर्जन तो जाना होगा जेल
   दिनांक 10-अगस्त-2018
उत्तराखंड सरकार ने 13 मार्च 2018 में अपनी विधानसभा से इस संदर्भ में प्रस्ताव पास करवाया। अब पिछली 8 अगस्त 2018 में इसपर कैबिनेट ने नियमावली बना कर कानूनी रूप दे दिया।
उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय द्वारा भी अपने एक आदेश में धर्म स्वतंत्रता अधिनियम बनाने का सुझाव उत्तराखण्ड सरकार को देने के बाद से सरकार के ऊपर इस विधेयक को लाने का और दबाव बन गया था।
उत्तराखण्ड सरकार द्वारा लाये गए इस विधेयक की नियमावली के महत्वपूर्ण बिन्दुओं को देख कर यही लगता कि राज्य में अब कन्वर्जन की बढ़ती गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकेगी।
सरकार द्वारा जारी की गई कन्वर्जन विधेयक की नियमावली में उत्तराखंड में कन्वर्जन शून्य घोषित कर दिया गया है, कन्वर्जन कराने वाले को तीन माह से पांच साल की सजा, साथ ही अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लोगों का कन्वर्जन करवाने वाले को सात साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है।
उत्तराखण्ड में होने वाले किसी कन्वर्जन के लिए दबाव, बलपूर्वक, धोखाधड़ी, षड्यंत्र , प्रलोभन दैवी कृपा आदि से कन्वर्जन को जुर्म माना गया है ।
उत्तराखंड में लव जिहाद जैसे मामलों को रोकने के लिए और सामूहिक कन्वर्जन के मामलों पर रोक लगाने के लिए अब , जिलाधिकारी के यहां एक माह पहले शपथ पत्र देकर अनुमति लेनी होगी, डीएम द्वारा जांच पड़ताल के बाद ही मंजूरी दी जाएगी।
ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वाली संस्थाओं के पंजीकरण निरस्त किये जा सकेंगे,उनके खाते भी सीज किये जा सकेंगे,
यदि कोई विवाह के लिए भी स्वेच्छा से कन्वर्जन करना चाहता है तो उसे भी एक महीना पहले जिलाधिकारी के यहाँ , शपथ पत्र के साथ प्रार्थना पत्र दे कर अनुमति लेनी होगी ।
जबरन कन्वर्जन करने वाले धार्मिक व्यक्ति या संस्थाओं प्रबंधन से जुड़े व्यक्तियों के ऊपर भी कार्रवाई का भी प्रावधान इस नियमावली में किया गया है
कन्वर्जन करने वाली संस्थाओं के चंदे पर रोक लगाने का भी प्रावधान नियमावली में किया गया है।
उत्तराखण्ड में देश का सबसे प्रभावशाली एवं सख्त कानून बनाया गया जो धर्म की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

 
प्रकाश पन्त कैबिनेट मंत्री उत्तराखण्ड 
उल्लेखनीय है उत्तराखण्ड में पिछले कुछ सालों से ईसाई मिशनरियों ने सुदूर पहाडों पर अनुसूचित जाति जनजाति के परिवारों में शिक्षा ,रोजगार,चिकित्सा आदि के नाम पर उन्हें ईसाई बनाये जाने का एक अभियान से छेड़ा हुआ था, मिशनरियों की गतिविधियां, तराई के राणाथारू, बक्सा जनजाति के लोगो मे बहुत ज्यादा तेज़ हो रही थी, जबकि राणाथारू जनजाति के लोग महाराणा प्रताप के वंशज माने जाते थे जोकि मुगल काल मे मुगलों से बच कर यहां के जंगलों में आकर छुपे थे।
उत्तराखण्ड में इस विधेयक को भारतीय धर्मांतरण नियम और पंजीकरण विधेयक ,उत्तराखंड कहा जायेगा।
इस विधेयक पर विश्व हिंदू परिषद की सिफारिश पर उत्तराखंड सरकार ने संज्ञान लिया है,
विहिप से जुड़े अधिवक्ता वैभव कांडपाल ने इस मामले में हाईकोर्ट में लड़ाई लड़ी ,जिस पर हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को कन्वर्जन रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

 
 अधिवक्ता वैभव कांडपाल
अधिवक्ता वैभव कांडपाल कहते है उत्तराखंड चीन और नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़ा हुआ है,संवदेनशील राज्य है ,पूर्वोत्तर राज्यों में कन्वर्जन की घटनाओं ने हम सभी को चिंतित किया है, ईसाई मिशनिरियों ने वहां क्या क्या किया किसी से छिपा नही, इन मिशनरियो का अगला लक्ष्य उत्तराखण्ड है लिहाजा इन पर नकेल कसना जरूरी है, श्री कांडपाल कहते है उत्तराखण्ड बनने के बाद पहाड़ी जिलो में हिन्दू परिवारों की लड़कियों को दूसरे समुदाय के लड़के बहला फुसला कर ले जारहे है इस पर रोक लगानी जरूरी है अब कानून बन गया है सरकार सख्त कदम उठा सकती है।
कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए,वित्त संसदीय मंत्री प्रकाश पंत कहते है जिस तरह से धर्म की आड़ लेकर देव भूमि उत्तराखंड में कुछ घटनाएं हुई है वो चिंता पैदा करती है, सरकार ने उत्तराखण्ड हाई कोर्ट के आदेशों का पालन किया है और कानून भी बना दिया है, श्री पन्त कहते है कि धर्म परिवर्तन रोकने के लिए उत्तराखण्ड सरकार ने सबसे सख्त नियमावली बनाई है जो अभी तक। किसी अन्य राज्य में नहीं है।
बरहाल उत्तराखण्ड में इस विधेयक नियमावली आने से हर धर्म का भी सम्मान होता है बशर्ते वो अपने दायरे में या कहें मर्यादा में रहे।