'खबर का चयन सोझ समझकर करें'

भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के फाउंडेशन डे पर वरिष्ठ पत्रकार और शिक्षाविद महादेव दास नालापत ने अपने विचार रखे। वर्तमान में वह आईटीवी समूह के एडिटोरियल डायरेक्टर हैं। उन्होंने फेक न्यूज (झूठी खबरों) को देश में नासूर की तरह बताया। उन्होंने पत्रकारों की भूमिका राष्ट्र के लिए कैसी होनी चाहिए इसे बड़े सुंदर तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि जिस तरह मानव शरीर में किडनी की बड़ी की भूमिका होती है। वह रक्त को साफ करती है और शरीर के अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालती है। उसी तरह पत्रकार की देश के लिए भी बड़ी जिम्मेदारी होती है।

 

पत्रकार देश में मौजूद समस्याओं, भ्रष्टाचार, अपराधिक घटनाओं को देश के सामने लाता है। समाज को एक तरह से शिक्षित करता है। इसलिए पत्रकारों की भूमिका बड़ी अहम होती है। आज फेक न्यूज एक नासूर की तरह है। झूठी खबरों से बहुत सारी समस्याएं आती हैं। देश के कई राज्यों यहां तक कि विदेशों में भी झूठी खबरों के चलते बहुत नुकसान हो चुके हैं। झूठी खबरों से अफवाहें फैलती हैं, बड़े पैमाने पर नुकसान होता है। नुकसान भी ऐसा जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। एक अफवाह युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न कर सकती है। हमें समाचारों को लेकर बहुत सजग रहने की जरूरत है कि कौन सी न्यूज झूठी है और कौन सी सच ? इसलिए खबरों का चयन करने से पहले बहुत जरूरी है कि इसका पूरा ध्यान रखा जाए।

 

आईआईएमसी के निदेशक केजी सुरेश ने कहा कि फेक न्यूज समाज के लिए, राष्ट्र के लिए बहुत घातक है। कुछ लोग अपने वेबसाइट पर ट्रैफिक बढ़ाने के लिए झूठी खबरों का सहारा लेते हैं। कुछ लोग सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के उद्देश्य से विद्वेष फैलाने के उद्देश्य से झूठी खबरों का सहारा लेते हैं। सरकार झूठी खबरों पर रोक लगाने के बहुत काम कर रही है लेकिन मैं समझता हूं कि यह सिर्फ सरकार का काम नहीं है। समाज के पढ़े—लिखे तबके को इसके बारे में जानकारी रखना बहुत जरूरी है।