गोकशी रोकने पर हो रही साधुओं की हत्याएं, पुलिस पर भी हो रहे हमले

गोरक्षा के नाम पर गोरक्षकों पर अंगुलियां उठाने वाले वामपंथी मीडिया के लोग और कथित बुद्धिजीवी गोकशी का विरोध करने पर हो रही हत्याओं पर चुप हैं।

साधुओं की हत्या करने वाले पांच आरोपी पुलिस की गिरफ्त में 

मंदिरों में साधुओं की निर्ममता से हत्याएं हो रही हैं। गोकशी रोकने पहुंची पुलिस पर पथराव किया जा रहा है लेकिन यह खबरें मीडिया की सुर्खियों में नहीं हैं, न ही सोशल साइटों पर ऐसी घटनाओं को लेकर बहस छिड़ी हुई है। गोकशी का विरोध करने पर जहां साधुओं की हत्याएं हो रही हैं वहीं ईद के दिन झारखंड में गोकशी रोकने गई पुलिस पर भी जानलेवा हमला किया गया।

हाल ही में करनाल और उत्तर प्रदेश की सीमा पर मंगलोरा गांव के पास बने भाई—बहन के मंदिर में लाठी डंडों से पीट पीटकर मंदिर के महंत और एक पुजारी की निर्मम हत्या कर दी। तीन सेवादारों को भी बंधक बनाकर पीटा गया। उनकी जीभ काट दी गई। इससे पहले 20 अगस्त को इलाहाबाद के करेलाबाग सुब्बनघाट पर एक मंदिर में कैलाश गिरी नाम के साधू को पेड़ से लटकाकर मार दिया गया। साधुओं की हत्या का यह सिलसिला उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से शुरू हुआ और 12 अगस्त की रात शिवमंदिर के पुजारी और महंत की सोते वक्त पीट-पीटकर हत्या की गई। इसके बाद 14 अगस्त को उत्तर प्रदेश के ही औरैया जिले में पिछले दिनों बिधूना थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कुदरकोट गांव के भयानकनाथ मंदिर में दो साधुओं की गला रेत कर हत्या कर दी गई। जबकि एक अन्य साधु रामशरण को मरणासंन्न अवस्था में छोड़कर फरार हो गए। इसे नृशंसता की पराकाष्ठा ही कहेंगे कि इसमें एक साधु लज्जाराम की हत्यारों ने जीभ तक काट ली। तीनों संन्यासी क्षेत्र में हो रही गोकशी का लगातार विरोध कर रहे थे।

इन साधुओं ने कुछ दिन पहले क्षेत्र में हो रही गोकशी की शिकायत पुलिस से की थी। साधु लज्जाराम की शिकायत पर पुलिस ने दो गोतस्करों को छापा मारकर पकड़ा था। इसका बदला लेने के लिए गोतस्करों ने तीनों साधुओं की हत्या का मन बनाया और 14 अगस्त की रात को वारदात को अंजाम दिया।

पहले गो तस्कर गायों को निशाना बनाते थे अब उनके निशाने पर गोरक्षक आ गए हैं। वहीं तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग और मीडिया का एक खास धड़ा गोरक्षकों को आतंकवादी बताकर गोतस्करों का समर्थन करते आया है। बहरहाल ‘मॉब लिंचिंग’ को लेकर लगातार आवाज मुखर करने वाला तबका इन हत्याओं पर मौन है। साधु संतों की तालिबानी अंदाज़ में हत्याएं हो रहीं हैं लेकिन कोई कुछ नहीं बोल रहा। टीवी चैनलों पर डिबेट भी नहीं हो रही।

 

22 अगस्त ईद के दिन झारखंड के पाकुड़ जिले के महेशपुर थाना से मात्र 500 मीटर दूर गोकशी किए जाने की सूचना पर जब पुलिस पहुंची तो मुसलमानों की भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया। गोकशी की सूचना पर बुधवार सुबह 11.30 बजे डीडीओ सह सीओ उमेश मंडल, एसडीपीओ शशिरंजन और महेशपुर थाना प्रभारी उमेश प्रसाद के नेतृत्व में पुलिस टीम छापेमारी करने गई थी। टीम ने देखा कि गांव की मुख्य सड़क से ठीक नीचे कुछ लोग गोकशी कर रहे हैं टीम ने कार्रवाई शुरू की तभी मुसलमानों ने लाउडस्पीकर से अनांउस करके और लोगों को बुला लिया।

इस बीच भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया। हमले में महेशपुर थाना प्रभारी उमेश प्रसाद, एक एएसआई व चार पुलिस कर्मी घायल हो गए। इसमें से दो की हालत गंभीर है।  पुलिस मौके से करीब एक क्विंटल मांस बरामद कर वापस लौटी तो भीड़ ने थाने से 300 मीटर की दूरी पर मजमा लगाकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

एसडीओ ने तत्काल प्रभाव से धारा 144 लागू कर मुसलमानों की भीड़ से कहा कि सभी अपने घर लौट जाएं लेकिन इस दौरान पत्थरबाजी शुरू हो गई। डीसी को भी दो पत्थर आकर लगे। भीड़ ने पुलिस पर बम, गोली और पत्थरों से हमला शुरू कर दिया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं और आंसू गैस के गोले छोड़े। करीब आधे घंटे तक चले संघर्ष के बाद जब दो ग्रामीणों को गोली लगी तब जाकर भीड़ वहां से तितर—बित्तर हुई। पाकुड़ के पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र प्रसाद वर्णवाल ने बताया कि भीड़ ने एकजुट होकर पुलिस पर हमला बोला। जवाबी कार्रवाई में हमें आंसू गैसे के गोले छोड़ने पड़े। पुलिस पर हमला करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे पुलिस लगातार हमला करने वालों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।