अटल जी जैसे लोग युगों में पैदा होते हैं

 - एस. एम. खान    

 - एस. एम. खान    

अटल जी से मेरा परिचय उस समय से था जिस समय मैं 11वीं कक्षा का छात्र था। मेरा घर खुर्जा में था वह हमारे निवास स्थान पर आए थे। मेरे ताऊ स्वर्गीय श्री आफताब मोहम्मद खान शहर के प्रतिष्ठित सामाजिक तथा राजनैतिक व्यक्ति थे और उन्होंने उनको चाय पर आमंत्रित किया था और उनके सम्मान में कार्यक्रम रखा था ! जिसमें लगभग 500 प्रतिष्ठित व्यक्ति सम्मलित हुए ! वाजपेयी जी उस दिन उत्तर प्रदेश विधान सभा के चुनाव मे भारतीय जन संघ के उम्मीदवार का प्रचार करने आये थे और उनका ओजस्वी भाषण हुआ था जिसमें मैं भी सम्मलित हुआ ! इस प्रोग्राम का वर्णन मैं इसलिए भी कर रहा हूं की उसी दिन वाजपेयी जी हमारे घर पर अपने ग्वालियर के स्कूल के शिक्षक मास्टर रियाजुद्दीन से काफी समय बाद मिले! जिन्होंने उनको ग्वालियर के स्कूल मैं गणित पढ़ाया था! मास्टर साहब मूलतः खुर्जा के रहने वाले थे और उस समय वह ग्वालियर से खुर्जा आये थे वाजपेयी जी को यह नहीं बताया गया था की मास्टर रियाज़ भी वहां उपस्थित होंगे मुझे आज भी वह लम्हा याद है की जब वाजपेयी जी मास्टर साहब से रूबरू हुए जो उनके लिए एक आश्चर्यचकित लम्हा था उन्होंने तुरंत उनके पैर छुए और कहा आप यहां ! उसके बाद उन्होंने लम्बी गुफ्तगू मास्टर साहब से की ! इस लम्हे में भारतीय संस्कृति की गुरु शिष्य परंपरा साफ़ नज़र आ रही थी !

मैं जब 1983 मेँ केंद्रीय सरकार की सेवा मेँ दिल्ली आया तो यदा—कदा वाजपेयी जी से मिला ओर उनका आशीर्वाद लिया परन्तु लगातार संपर्क जब हुआ जब मेँ 2002 में राष्ट्रपति श्री ए पी जे अब्दुल कलाम का प्रेस सचिव नियुक्त हुआ ! मेरी नियुक्ति के दूसरे दिन ही वह श्री कलाम से मिलने राष्ट्रपति भवन आए और मुझे देखते ही कहा 'सीबीआई से राष्ट्रपति भवन.

श्री वाजपेयी जी के डॉ. कलाम से बहुत प्रगाढ़ सम्बन्ध थे ! वह दोनों बहुत अच्छे मित्र थे। दोनों के संबंध उस समय से थे जब डॉ. कलाम प्रधानमंत्री वाजपेयी के वरिष्ठ साइंटिफिक एडवाइजर रहे ! डॉ. कलाम राष्ट्रपति पद के लिए वाजपेयी जी की पहली पसंद थे और इसके लिए उन्होंने स्वयं डॉ. कलाम से संपर्क किया तथा उनके नाम पर आम सहमति बनाई वह डॉ. कलाम को अपने मंत्रिमंडल में भी लेना चाहते थे परन्तु डॉ. कलाम ने यह कह कर क्षमा मांग ली कि वह कई वैज्ञानिक कार्यक्रमों में व्यस्त हैं।

डॉ. कलाम सदैव ही हमको बताते थे की वाजपेयी जी की दूरदृष्टि तथा दृढ़ निश्चय के कारण ही 1998 का न्यूक्लिअर परिक्षण हो सका ! डॉ. कलाम उस टीम के अगुआ थे जिसने भारत को परमाणु शक्ति बनाने के लिए वाजपेयी जी के संरक्षण में काम किया था

जब डॉ. कलाम ने 25 जुलाई 2002 को राष्ट्रपति का पद भार संभाला तभी उन्होंने वाजपेयी जी को भारत को 2020 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के अपने प्रोग्राम के बारे में बताया और कहा कि वह कैबिनेट के समक्ष इस प्रोग्राम का पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन करना चाहते हैं ! श्री वाजपेयी ने बड़ी आत्मीयता से डॉ. कलाम से कहा कि प्रोटोकॉल के अनुसार यह उचित नहीं होगा कि राष्ट्रपति कैबिनेट की मीटिंग में जाकर पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन दे ! उन्होंने कहा कि वह स्वयं ही सभी वरिष्ठ मंत्रियों को राष्ट्रपति भवन लेकर आएंगे और डॉ. कलाम के विजन 2020 के बारे में विस्तृत चर्चा करेंगे। श्री वाजपेयी जी ने ऐसा ही किया।

मैं जब भी वाजपेयी जी से मिला और उनसे बात करने का अवसर प्राप्त हुआ तो हर बार मैंने महसूस किया कि उनमें भारत को आगे ले जाने की एक उत्सुकता हमेशा रहती है। वह सदैव कहते थे कि यह कार्य सबको साथ लेकर ही हो सकता है ! हमेशा भारत की विभिन्ता में एकता तथा एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की परंपरा को कायम रखने की बात करते थे ! मुझे याद है कि एक बार उन्होंने अपने सरकारी निवास स्थान 7 RCR पर ईद मिलन का प्रोग्राम रखा जिसमें राष्ट्रपति डॉ. कलाम भी शामिल हुए थे।

(लेखक पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम के प्रेस सचिव रह चुके हैं)