जीवन का उत्थान केवल भौतिक साधनों से नहीं

 

 समारोह को संबोधित करते श्री भैयाजी जोशी। मंच पर (दाएं) प्रसिद्ध लोकगायिका श्रीमती मालिनी अवस्थी एवं अन्य

गत दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी ने नई दिल्ली स्थित दीनदयाल शोध संस्थान के नवसृजित भवन मुखारविंद का लोकार्पण किया। इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केन्द्रीय संस्कृति मंत्री डॉ़ महेश शर्मा तथा दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर श्री भैयाजी जोशी ने कहा कि हम सबके लिए 15 अगस्त का यही संदेश है कि जो खोया है उसका हमें स्मरण रहे। सन् 1947 में देश फिर एक बार अपने पैरों पर चलने के लिए खड़ा हो गया, पर क्या देश सही दिशा में चल रहा है? हमारे मनीषियों ने जिस प्रकार का भारत सोचा था, उस दिशा में हम लोग क्या चल पड़े हैं? 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता मिली,भारत के लोगों की सरकार बनी लेकिन अपने तंत्र से चलाने के लिए जो ऊ र्जा-शक्ति चाहिए होती है, उसमें कुछ कमी रह गई। सुराज्य की दिशा में हम शायद थोड़ा चल पड़े हैं। विकास के नाम पर आज जितने एजेंडे हम देखते हैं, आवागमन, विज्ञान, सूचना तकनीक आदि मामलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी तुलना कर सकते हैं। हां, बहुत सारी चीजों में अवश्य तरक्की हुई है, परन्तु क्या इसके लिए ही स्वतंत्रता का संघर्ष किया था। देश के लिए शहीद हुए स्वतंत्रता सेनानी, भारतीय ऋषि परंपरा से जुड़े संतों ने देश के लिए जिस प्रकार की कल्पना की थी, उस ‘स्वराज्य’ की दिशा पर हम चल पाए क्या?, जबकि भारत में विद्वता और प्राकृतिक संसाधनों की कोई कमी नहीं है, सामर्थ्य की भी कोई कमी नहीं है, पुरुषार्थ की भी कोई कमी नहीं। परन्तु इन सारी शक्तियों को सही दिशा में ले जाने के लिए जो करना चाहिए था, वह हुआ क्या, यह सोचने का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि दीनदयाल शोध संस्थान का यह भवन जिस व्यक्तित्व से जुड़ा हुआ है, उन दीनदयाल उपाध्याय ने यह देश स्वराज्य की सही दिशा में चले, इसके लिए एकात्म मानवदर्शन दिया। उस दिशा में चलने की प्रेरणा दीनदयाल शोध संस्थान के इस भवन में आकर प्राप्त होती है। अत: यह निर्जीव वस्तुओं से बना स्मारक नहीं है, यहां पर जीता-जागता कुछ अस्तित्व है, जो सामान्य व्यक्ति को भी भारतीय ऋषि परम्परा के सिद्धान्तों पर चलने को प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि कभी-कभी लोगों को लगता है सिद्धान्त कागजों, पुस्तकों, ग्रंथों में ठीक हैं, व्यवहार में लाने की बात नहीं। लेकिन दीनदयाल जी ने जो दर्शन दिया, नानाजी देशमुख उसे व्यवहार में लाए। दीनदयाल जी ने अपनी ख्याति के लिए एकात्म मानव दर्शन नहीं बनाया, उस दर्शन की भावना को समझ कर उस दिशा में कौन चलेगा, यह सोचकर बनाया। श्री जोशी ने कहा कि जीवन का उत्थान केवल भौतिक साधनों से नहीं हो सकता। यह सही है कि भूखे पेट गोपाल का भजन नहीं होता। परन्तु हम पेट भरने की व्यवस्था में ही सिमट कर रह गए और गोपाल को भूल गए। इसलिए भौतिकता के उत्थान में जीवन का उत्थान भी स्मरण रखकर चलना पड़ेगा। इस अवसर पर पूर्व सह सरकार्यवाह श्री मदनदास देवी, प्रसिद्ध विचारक के़ एन. गोविंदाचार्य, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन एवं भाजपा महासचिव श्री रामलाल उपस्थित रहे।