मोदी की हत्या की साजिश और माओवादी कनेक्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्‍या की साजिश किए जाने वालों के साथ संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार हुए पांच बुद्धिजीवियों का मामला सर्वोच्च न्यायालय में पहुंच गया है। तमाम बुद्धिजीवी इनके पक्ष में खड़े हो गए हैं। इससे पहले वामपंथी रूझान वाले दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जीएन साई बाबा को जब पुलिस ने गिरफ्तार किया था तो तब भी उनके पक्ष में तमाम वामपंथी रूझान वाले बुद्धिजीवियों ने आवाज बुलंद की थी बाद में वह माओवादियों द्वारा अंजाम दी गई आतंकी घटनाओं में दोषी पाए गए और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई। पुलिस ने एक बार फिर कुछ बुद्धिजीवियों को पकड़ा है जिसमें प्रोफेसर, कवि, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। इन लोगों के पक्ष में तमाम वामपंथी रूझान वाले बुद्धिजीवी आ खड़े हुए हैं और सरकार पर अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोटने का आरोप लगा रहे हैं

ये हैं पुलिस द्वारा पकड़े गए नक्सलियों से संबंध रखने वाले बुद्धिजीवी सुधा भारद्वाज कानपुर से आइआइटी क्लीयर करने वाली सुधा बीते 30 वर्षों से ट्रेड यूनियनों और श्रमिकों के लिए काम करती रही हैं। वह भिलाई के श्रमिक नेता शंकर गुहा नियोगी के साथ जनमुक्ति मोर्चा में भी सक्रिय रहीं। उनकी मां कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर थीं। सुधा ने 18 वर्ष की उम्र में अमेरिका की नागरिकता छोड़ दी और भारत चली आईं। वर्तमान में वह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली में बतौर विजिटिंग प्रोफेसर कार्यरत हैं। वरवर राव तेलंगाना के वरवर राव 1957 वामपंथी विचारक और कवि हैं। उन्हें सबसे पहले 1973 में मीसा के तहत गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें 1975 से लेकर 1986 तक कई मामलों में गिरफ्तार किया गया। 1986 के रामनगर षड्यंत्र मामले में गिरफ्तार होने के 17 साल बाद उन्हें 2003 में रिहाई मिली। 19 अगस्त 2005 को आंध्र प्रदेश सार्वजनिक सुरक्षा कानून के तहत उन्हें फिर से गिरफ्तार करके हैदराबाद स्थित चंचलगुडा जेल भेजा गया। बाद में 31 मार्च 2006 को सार्वजनिक सुरक्षा कानून के खत्म होने सहित राव को अन्य सभी मामलों में जमानत मिल गईगौतम नवलखा दक्षिण दिल्ली के नेहरू विहार निवासी गौतम नवलखा सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वर्तमान में नवलखा अंग्रेजी पत्रिका इकोनॉमिक एंड पोलिटिकल वीकली (ईपीडब्ल्यू) में सलाहकार संपादक के तौर पर भी काम कर रहे हैं।अरुण फरेरा मुंबई स्थित सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओ) की संचार और प्रचार इकाई के प्रमुख है। वेरनन गोंजाल्विस मुंबई विश्वविद्यालय के गोल्ड मेडलिस्ट और रूपारेल और एचआर कॉलेज के पूर्व प्रवक्ता रहे हैं

ये हैं पुलिस द्वारा पकड़े गए नक्सलियों से संबंध रखने वाले बुद्धिजीवी

 

सुधा भारद्वाज

कानपुर से आइआइटी क्लीयर करने वाली सुधा बीते 30 वर्षों से ट्रेड यूनियनों और श्रमिकों के लिए काम करती रही हैं। वह भिलाई के श्रमिक नेता शंकर गुहा नियोगी के साथ जनमुक्ति मोर्चा में भी सक्रिय रहीं। उनकी मां कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर थीं। सुधा ने 18 वर्ष की उम्र में अमेरिका की नागरिकता छोड़ दी और भारत चली आईं। वर्तमान में वह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली में बतौर विजिटिंग प्रोफेसर कार्यरत हैं।

वरवर राव

तेलंगाना के वरवर राव 1957 वामपंथी विचारक और कवि हैं। उन्हें सबसे पहले 1973 में मीसा के तहत गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें 1975 से लेकर 1986 तक कई मामलों में गिरफ्तार किया गया। 1986 के रामनगर षड्यंत्र मामले में गिरफ्तार होने के 17 साल बाद उन्हें 2003 में रिहाई मिली। 19 अगस्त 2005 को आंध्र प्रदेश सार्वजनिक सुरक्षा कानून के तहत उन्हें फिर से गिरफ्तार करके हैदराबाद स्थित चंचलगुडा जेल भेजा गया। बाद में 31 मार्च 2006 को सार्वजनिक सुरक्षा कानून के खत्म होने सहित राव को अन्य सभी मामलों में जमानत मिल गई

गौतम नवलखा

दक्षिण दिल्ली के नेहरू विहार निवासी गौतम नवलखा सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वर्तमान में नवलखा अंग्रेजी पत्रिका इकोनॉमिक एंड पोलिटिकल वीकली (ईपीडब्ल्यू) में सलाहकार संपादक के तौर पर भी काम कर रहे हैं।

अरुण फरेरा

मुंबई स्थित सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओ) की संचार और प्रचार इकाई के प्रमुख है।

 

वेरनन गोंजाल्विस

मुंबई विश्वविद्यालय के गोल्ड मेडलिस्ट और रूपारेल और एचआर कॉलेज के पूर्व प्रवक्ता रहे हैं