Panchjanya - समाज के प्रति हो पीड़ा और संवेदना का भाव समाज के प्रति हो पीड़ा और संवेदना का भाव
समाज के प्रति हो पीड़ा और संवेदना का भाव
   दिनांक 08-अगस्त-2018
 
मंच पर (बाएं से) श्री भैयाजी जोशी एवं श्री विरेन्द्रजीत सिंह 
गत दिनों चित्रकूट में वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को लेकर कार्य कर रहे दीनदयाल शोध संस्थान की ‘प्रबन्ध समिति एवं साधारण सभा’ की दो दिवसीय बैठक संपन्न हुई। समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी उपस्थित थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की दृष्टि को राष्ट्र ऋषि नानाजी ने व्यावहारिक धरातल पर उतारा। नानाजी के मन में अपने राष्ट्र एवं समाज के प्रति पीड़ा एवं संवेदना का भाव था। इसीलिए उन्होंने अपने अभिन्न सखा उपाध्याय जी के विचारों को उन्हीं के नाम से दीनदयाल शोध संस्थान की स्थापना कर उनकी अकाल मृत्यु के बाद संस्थान के विभिन्न प्रकल्पों के माध्यम से व्यावहारिक धरातल पर उतारने का कार्य किया। हमारे देश में जितने भी महापुरुष हुए हैं, उनके जीवन संदेश में कहीं भी अहम् नहीं वरन् वयम् आया है। वयम् की व्याख्या अति विस्तृत है, जिसके अन्तर्गत व्यक्ति का नहीं, विचारों का काम होता है। मैं साधन मात्र हूं, यह ध्यान में रखना पड़ता है। दायित्व के साथ कर्तव्य भी जुड़ता है। काम करते समय समाज के प्रति अपनत्व का भाव भी कर्तव्य है। अपनत्व के साथ दूसरा बिन्दु आता है संवेदना। राष्ट्र ऋषि नानाजी संवेदना के कारण ही राजनीति छोड़कर समाज कार्य के क्षेत्र में आए। कार्य करते समय हम सबको अपनी कुल-परम्पराओं का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। कुल-परम्पराओं के अन्तर्गत बाल्यकाल से ही संस्कार मिलते हैं जो समाज को जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि कार्य करते समय नवीन सहयोगी, परस्पर पूरकता के आधार पर बनते जाएं, इस दिशा में विशेष प्रयास सतत् चलते रहना चाहिये। बैठक के समापन सत्र में दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव श्री अतुल जैन ने देश-विदेश से आए कार्यकर्ताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया।