Panchjanya - हेराल्ड हाउस हो सकता है जब्त, जमानत पर चल रहे राहुल और सोनिया की मुश्किलें बढ़ीं हेराल्ड हाउस हो सकता है जब्त, जमानत पर चल रहे राहुल और सोनिया की मुश्किलें बढ़ीं
हेराल्ड हाउस हो सकता है जब्त, जमानत पर चल रहे राहुल और सोनिया की मुश्किलें बढ़ीं
   दिनांक 09-अगस्त-2018
 
हेराल्ड मामले में कोर्ट से जमानत पर चल रहे राहुल गांधी और सोनिया गांधी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अखबारों में छपी रिपोर्ट के अनुसार आयकर विभाग ने नेशनल हेराल्ड पर 250 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने आयकर विभाग के नोटिस के बाद नोटिस जारी कर बिल्डिंग को खाली करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि यंग इंडिया कंपनी की जांच इनकम टैक्स द्वारा कराए जाने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे थे। कोर्ट ने उन्हें राहत देने से मना कर दिया था।
क्या है हेराल्ड मामला
एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड नेशनल हेराल्ड अखबार की मालिकाना कंपनी है। कांग्रेस ने 26 फरवरी 2011 को इसे 90 करोड़ का लोन दे दिया। इसके बाद 5 लाख रुपये से यंग इंडियन कंपनी बनाई गई। इस कंपनी में सोनिया गांधी और राहुल की 38-38 फीसदी व 24 फीसदी हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के पास थी।
इसके बाद 10-10 रुपये के नौ करोड़ शेयर 'यंग इंडियन ' को दे दिए गए और इसके बदले यंग इंडियन को कांग्रेस का लोन चुकाना था। 9 करोड़ शेयर के साथ यंग इंडियन को इस कंपनी के 99 फीसदी शेयर हासिल हो गए। इसके बाद कांग्रेस ने इस लोन को माफ कर दिया। इस हिसाब से यंग इंडिया को एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड का मालिकाना हक मिल गया। भाजपा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी 2012 में इस मामले को कोर्ट में ले गए। 26 जून 2014 को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी के अलावा मोतीलाल वोरा, सुमन दूबे और सैम पित्रोदा को समन जारी कर पेश होने को कहा। तब से यह मामला कोर्ट में चल रहा है।

 
हेराल्ड के शुरू होने से बंद होने तक की कहानी
हेराल्ड हाऊस का आवंटन राजधानी दिल्ली के आईटीओ स्थित प्रेस एंक्लेव में जिस उद्देश्य के लिए किया गया था, उसके लिए उसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। दरअसल, वहां समाचार पत्र प्रकाशित करने के लिए इसका आवंटन किया गया था, लेकिन पिछले 10 सालों से ऐसा नहीं किया जा रहा है। इसमें आवंटन नियमों का उल्लंघन किया गया है।
1937-38 में जवाहरलाल नेहरू ने ‘नेशनल हेराल्ड’ नाम से एक अखबार निकालने का विचार किया और इसके लिए उन्होंने देश के कई शहरों में सरकार से रियायती दर पर जमीन ले ली। इनमें लखनऊ, दिल्ली, मुम्बई, भोपाल, इन्दौर, पटना, पंचकुला जैसे शहर शामिल हैं। इस अखबार का पहला संस्करण 9 सितम्बर, 1938 को लखनऊ से प्रकाशित हुआ था और इसके प्रथम सम्पादक थे जवाहरलाल नेहरू। इसके कुछ वर्ष बाद दिल्ली संस्करण भी निकला। मजे की बात है कि लखनऊ और दिल्ली संस्करणों के अलावा और कहीं से भी नेशनल हेराल्ड का संस्करण नहीं निकला। लेकिन जहां भी सरकार से जमीन ली गई वहां आलीशान भवन जरूर बनाए गए। आज ये सारे भवन किराए पर चढ़े हुए हैं और इन सबका लाभ प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से ‘परिवार’ को मिल रहा है। 1942 से 1945 तक नेशनल हेराल्ड बन्द रहा। जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्री बनने के बाद नेशनल हेराल्ड के सम्पादक रामाराव बनाए गए। नेशनल हेराल्ड को हिन्दी में ‘नवजीवन’ और उर्दू में ‘कौमी आवाज’ के नाम से निकाला जाता था। इन तीनों अखबारों को आप विशुद्ध रूप से कांग्रेसी अखबार कह सकते हैं। 1977 के लोकसभा चुनाव में जब इन्दिरा गांधी हार गर्इं तो नेशनल हेराल्ड को 2 वर्ष के लिए बन्द कर दिया गया। इन्दिरा गांधी के बाद राजीव गांधी ने इस अखबार को संभालने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत कुछ बदल गया था। अखबार निकालने वाली कम्पनी लगातार घाटे पर जा रही थी। इस कारण 1988 में लखनऊ संस्करण को बन्द कर देना पड़ा। केवल दिल्ली संस्करण लगभग 10 वर्ष तक निकलता रहा, लेकिन 1 अप्रैल, 2008 को अचानक दिल्ली संस्करण को भी बन्द करने की घोषणा की गई। वरिष्ठ भाजपा नेता एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी का आरोप है कि नेशनल हेराल्ड की सम्पत्ति को कब्जाने के लिए ही यंग इंडिया कंपनी का गठन किया गया था।