दोनों हाथों से लिखते हैं इस गुरू के छात्र
   दिनांक 05-सितंबर-2018
                                                                                                                                                                    - पूनम नेगी
मध्य प्रदेश में सिंगरौली जिले के एक छोटे से गांव बुधेला के वीणा वादिनी पब्लिक स्कूल के बच्चे जब दोनों हाथों से एक साथ लिखते हैं। इसका श्रेय जाता है वीरंगत सिंह को। उन्होंने अपने स्कूल के बच्चों को यह हुनर सिखाया है। हिंदी नहीं अंग्रेजी और संस्कृति में भी उनके बच्चे दोनों हाथों से लिख लेते हैं
दो हाथों से लिखने की कला 
किसी स्कूल में बच्चे सिर्फ पढ़ने-लिखने ही नहीं जाते बल्कि जीवन के अन्य बहुत से गुर सीखने भी जाते हैं। हम सभी ने अपने स्कूलों में पढ़ना-लिखना, सोचना-समझना, खेलकूद व शारीरिक शिक्षा जैसी तमाम चीजें सीखी हैं लेकिन दोनों हाथों से एक साथ लिखने का हुनर! यह वाकई लाजवाब है। तिस पर एक दो नहीं, बल्कि स्कूल के सारे बच्चे दोनों हाथों से लिखते हैं। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के एक छोटे से गांव बुधेला के वीणा वादिनी पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले 150 बच्चों की यह कला किसी को भी हैरत में डाल सकती है। इस पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राएं इस हुनर में इतने पारंगत हैं कि जिस लेखन कार्य को सामान्य बच्चे आधे घंटे में पूरा कर पाते हैं, उसे ये कुछ ही मिनटों में पूरा कर लेते हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि लगातार अभ्यास से बच्चे इतने कुशल हो चुके हैं कि मात्र हिन्दी ही नहीं, अंग्रेजी, गणित व संस्कृत भाषा में भी यह करिश्मा कर लेते हैं। बच्चों के इस हुनर के पीछे स्कूल के संस्थापक और स्थानीय निवासी वीरंगद शर्मा की रोचक सोच तथा मेहनत है। बीते 18 साल से इस स्कूल का संचालन कर रहे वीरंगद ने 8 जुलाई, 1999 को इस स्कूल की बुनियाद रखी थी। यहां पर प्रवेश लेने वाले हर बच्चे को इस तरह तैयार किया जाता है कि वह दोनों हाथों से लिख सके और वह भी कई भाषाओं में। अपने यहां प्रवेश लेने वाले बच्चे को पहले वे एक हाथ से लिखना सिखाते हैं और फिर उसके दूसरे हाथ में कलम थमा देते हैं। स्कूल में 45 मिनट की कक्षा में हर बच्चा 15 मिनट दोनों हाथों से लिखने का अभ्यास करता है। स्कूल के बच्चों की मानें तो इस हुनर के कारण वे दो घंटे से अधिक का प्रश्न पत्र एक घंटे में ही हल कर सकते हैं।

 
स्कूल के बच्चों के साथ वीरंगद सिंह 
बकौल शर्मा, इस स्कूल को शुरू करने से पहले वे सेना में थे। जबलपुर में सैन्य अभ्यास के दौरान उन्होंने एक पुस्तक में पढ़ा कि देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद दोनों हाथ से लिखते थे। ऐसा कैसे हो सकता है, इस जिज्ञासा ने और खोजबीन करने की प्रेरणा दी। खोजने पर उन्हें ज्ञात हुआ कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय में छात्र औसतन प्रतिदिन 32,000 शब्द लिखने की क्षमता रखते थे। इस पर पहले भरोसा करना कठिन था लेकिन इतिहास खंगाला तो कई जगह दोनों हाथों से लिखने की कला का उल्लेख मिला। बस इसी सोच के साथ स्कूल की नींव पड़ गयी। वीरगंद बताते हैं, ‘मैंने पहले खुद दोनों हाथों से लिखने का प्रयास किया फिर बच्चों को सिखाया।’ 47 साल के वीरंगद के स्कूल के बच्चे एक से 100 तक की गिनती उर्दू में 45 सेकंड में, एक मिनट में रोमन में, एक मिनट में देवनागरी लिपि में लिख लेते हैं। बच्चे एक मिनट में दो भाषाओं के 250 शब्दों का अनुवाद कर देते हैं। एक मिनट में 17 तक का पहाड़ा लिख लेते हैं। वीरंगद के मुताबिक इस हुनर में ध्यान व योग की अहम भूमिका है। इसीलिए स्कूल में प्रतिदिन डेढ़ घंटे ध्यान और योग की भी कक्षा लगायी जाती है।