राहुल गांधी ने विदेश में किया भारत का अपमान
   दिनांक 06-सितंबर-2018
                                                                                                                                                              -प्रशांत बाजपेई
यूरोप में भारत के प्रमुख राजनैतिक दल के मुखिया के नाते राहुल गांधी ने जिस तरह से भारत को अपमानित किया है वह उनकी और उनकी पार्टी की सोच दिखाता है, मजहबी जिहाद के प्रति उनके नरम रुख का परिचायक है
 
जब दुनियाभर के रक्षा विशेषज्ञ इस्लामिक स्टेट (आईएस) के खलीफा अबूबकर अल बगदादी के जिंदा होने की अफवाहों का विश्लेषण कर रहे हैं, ठीक उसी समय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बगदादी और उसके अनुयायी जिहादियों को सहानुभूति का मरहम लगाया है। विदेश दौरे पर निकले राहुल के लिए उनकी पार्टी छोटे-छोटे समूहों में श्रोताओं का जुगाड़ कर रही है। जर्मनी में ऐसे ही एक कार्यक्रम में बोलते हुए राहुल ने भारत में ‘असहिष्णुता, उत्पीड़न और भेदभाव’ का जिक्र किया। अपनी छवि गढ़ने निकले राहुल बड़ी बेदर्दी से देश की छवि को तार-तार कर रहे हैं, और इस्लामिक स्टेट की छवि चमका रहे हैं। गत 23 अगस्त को जर्मनी के हैमबर्ग के एक विद्यालय में राहुल ने कहा कि ‘‘वे (भारत सरकार) मानते हैं कि दलित, अल्पसंख्यक और जनजातीय लोगों को समान लाभ नहीं मिलने चाहिए...। इस भेदभाव से बेरोजगारी पैदा होती है और इस्लामिक स्टेट जैसे संगठन बेरोजगारी के कारण पैदा होते हैं।’’ कहने की जरूरत नहीं राहुल गांधी के इस बयान को तथ्यों की कसौटी पर कसा जाना चाहिए।
इस्लामिक स्टेट ने आज तक यह बयान नहीं दिया है कि वे रोजगार पाने के लिए शियाओं, यहूदियों, यजीदियों और अन्य गैर मुस्लिमों के गले चाकुओं से रेत रहे हैं। संभवत: बगदादी ने राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से बताया हो कि रोजगार उत्पन्न करने के लिए उसने अपने जीते गए इलाकों में इस्लामी खिलाफत और शरिया कानून कायम किया है। बेरोजगारी दूर करने के लिए आठ-दस साल की हजारों यजीदी बच्चियों और महिलाओं से बलात्कार किया गया। समलैंगिकों को हाथ-पैर बांधकर ऊंची इमारतों से फेंक दिया गया। बुर्का न पहनने के अपराध में महिलाओं को और दाढ़ी न रखने के गुनाह में पुरुषों को गोली मार दी गई। इतना ही नहीं, इस्लामिक स्टेट के इस ‘बेरोजगारी हटाओ अभियान’ के अंतर्गत दरगाहों, मकबरों, यजीदी व यहूदी उपासना स्थलों, पुस्तकालयों, अभिलेखागारों और प्राचीन इमारतों को डाइनामाइट लगाकर उड़ा दिया गया।
जिहाद ही मकसद
राहुल गांधी के बेरोजगारी तर्क का विश्लेषण आवश्यक है। इस्लामिक स्टेट,अलकायदा, तालिबान, बोकोहराम, हरकत उल मुजाहिदीन, सिमी, लश्करे-तोयबा, इंडियन मुजाहिदीन, हूजी, मुस्लिम यूनाइटेड लिबरेशन आॅफ असम, जेकेएलएफ आदि सभी जिहादी संगठनों ने अपना उद्देश्य घोषित किया है-इस्लामी राज्य कायम करना और सारी दुनिया के गैर मुस्लिमों से इस्लाम कुबूल करवाना। सनद रहे कि इनमें से हरेक की गैर मुस्लिम की परिभाषा में उनके अपने-अपने फिरके को छोड़कर शेष सभी मुस्लिम भी आते हैं। सो, इस्लामी खिलाफत के अतिरिक्त इनका कोई मुद्दा नहीं हैं। जहां तक बेरोजगारी की बात है, तो ओसामा बिन लादेन अत्यंत धनाढ्य परिवार से आने वाला सिविल इंजीनियर था। अलकायदा का वर्तमान प्रमुख अल जवाहिरी शल्य चिकित्सक है। बगदादी मिस्र के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से पीएचडी है। हाफिज सईद इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर रहा है। मुंबई बम धमाकों के लिए फांसी की सजा पाने वाला याकूब मेमन चार्टर्ड अकाउंटेंट था। अफजल एक दवा कंपनी का क्षेत्रीय प्रबंधक था। मई 2018 में कश्मीर में मारा गया हिज्बुल का आतंकी मोहम्मद रफी भट्ट प्रोफेसर था। इस्लामिक स्टेट का हिस्सा बनने मुंबई से भागे मुस्लिम युवक इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। डेविड हेडली एक पाकिस्तानी राजनयिक का बेटा है। ये सब चंद अपवाद नहीं हैं।
दुनियाभर के जिहादी आतंकियों पर 2007 में एक महत्वपूर्ण अध्ययन हुआ। ‘इम्युनाइजिंग दि माइंड’ नामक इस शोध में डिएगो गैम्बेत्ता बताते हैं कि जिहादी आतंकियों में उच्च शिक्षितों और पेशेवरों की संख्या काफी ज्यादा है। यहां तक कि अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप से शामिल होने वाले आतंकियों में 44 प्रतिशत तो सिर्फ इंजीनियर हैं। इतना ही नहीं, पेशेवर चिकित्सक और वैज्ञानिक भी जिहादी समूहों में खासा प्रतिनिधित्व रखते हैं। ब्रिटिश खुफिया डॉजियर में जिहादियों को ‘तीव्रबुद्धि और जिज्ञासु’ बताया गया है, जो सोच-समझकर ठंडे दिमाग से हत्याएं कर रहे हैं। अमेरिका में 45 चिकित्सक वहां के शहरों पर राकेट हमले की योजना बनाते गिरफ्तार हुए। आॅस्ट्रेलिया के एक चिकित्सक तारेक कमलेह का वीडियो सामने आया है जो अपनी डॉक्टरी छोड़कर सीरिया जा पहुंचा और इस्लामिक स्टेट की तरफ से बन्दूक उठा ली। अगस्त 2018 में कश्मीर के पुलवामा में सुरक्षाबलों से मुठभेड़ में मारे गए एक आतंकी की पहचान खुर्शीद अहमद मलिक के रूप में हुई, जिसका पुलिस में सब इंस्पेक्टर के रूप में चयन हो चुका था। यह सूची अंतहीन है। अलग-अलग पेशे से आए इन सबलोगों ने एक बात समान रूप से पाई गई-गैर मुस्लिमों से नफरत और सारी दुनिया में शरिया कानून लागू करने का जुनून।

 
‘विजन’ के पीछे की प्रेरणा
राहुल गांधी ने कहा कि ‘भारत सरकार अल्पसंख्यकों को सही विजन नहीं दे पा रही है, जिसके कारण आतंक बढ़ता है’। ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं, उनका और उनकी मां के नेतृत्व में कांग्रेस का जिहादी आतंक के लिए क्या ‘विजन’ रहा है, उसकी बानगियां चारों तरफ फैली हुई हैं। बाटला हाउस मुठभेड़ के लिए बहाए गएसोनिया गांधी के आंसू, कांग्रेस नेताओं की जिहादी जाकिर नाइक से नजदीकियां और नाइक द्वारा राजीव गांधी ट्रस्ट को 50 लाख रु. का चंदा, कांग्रेस नेता और तत्कालीन गृह मंत्री द्वारा ‘हाफिज सईद साहेब’ और दिग्विजय सिंह द्वारा ‘ओसामा जी’ का संबोधन, 26/11 के मुंबई हमले का आरोप भारत की सुरक्षा एजेंसियों और रा. स्व. संघ पर मढ़ने वाली किताब का दिग्विजय सिंह द्वारा विमोचन, स्वयं राहुल गांधी द्वारा ‘हिंदू आतंकवाद’ को लश्करे तोयबा से भी ज्यादा खतरनाक बताना(विकीलिक्स) आदि, यह फेहरिस्त बहुत लम्बी है। कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित द्वारा सेना प्रमुख को ‘सड़क का गुंडा’ कहना, गुलाम नबी आजाद का बयान कि कश्मीर में सेना आतंकियों को कम और नागरिकों को ज्यादा मार रही है, कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज का कहना कि कश्मीर आजादी चाहता है, सोनिया गांधी के करीबी और गुजरात कांग्रेस के नेता अहमद पटेल के अस्पताल में इस्लामिक स्टेट के आतंकी का पकड़ा जाना, मणिशंकर अय्यर का पाकिस्तान जाकर कहना कि ‘आप मोदी सरकार को हटाने में हमारी मदद करें’, तीन तलाक के मुद्दे पर दोगलापन, 80 करोड़ हिंदुओं को मिटाने की बात करने वाले अकबरुद्दीन ओवैसी से राजनैतिक गठबंधन...गिनते चले जाइए, राहुल ‘विजन’ स्पष्ट होता चला जाएगा।
तिस पर राहुल गांधी का ताजा बयान लाखों निर्दोषों के खून और हजारों यजीदी महिलाओं और बच्चियों के आंसुओं पर धूल डालने की कोशिश है। ये आतंक के खिलाफ भारत की लड़ाई को कमजोर करने की भी बात है। वोटों के गणित में मजहबी कट्टरपंथ को हवा देने के दांव को हल्के में नहीं लिया जा सकता। न ही देश के विकृत चित्रण को हवा में उड़ाया जा सकता है।
राहुल सरकार की नीतिगत आलोचना कर सकते थे। लेकिन उन्होंने सारे देश को कठघरे में खड़ा कर दिया और वहशी आतंकियों को सहानुभूति का कवच प्रदान किया। राहुल गांधी की बातों के निहितार्थ पर विचार करें तो ध्यान आता है कि यूरोप के श्रोताओं के सामने भारत के एक प्रमुख राजनैतिक दल का मुखिया कह रहा है कि भारत की जनता ने भेदभाव करने वाले लोगों को प्रचंड बहुमत देकर सत्ता में बैठाया है और अब भारत सरकार अपने ही नागरिकों के साथ भेदभाव कर रही है। यह बेहद गंभीर बात है।