विश्व हिंदू कांग्रेस: हिंदू दर्शन के प्रति भ्रांतियां दूर करने में सहायक होगी--स्वामी विज्ञानानंद

                                                                                                   - पाञ्चजन्य प्रतिनिधि, शिकागो (अमेरिका ) से

विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त सचिव स्वामी  विज्ञानानंद  का कहना है कि शिकागो हिंदू कांग्रेस में भारत वंशी समुदाय में हिंदू दर्शन के प्रति भ्रांतियां दूर होंगी और दुनिया में उनकी अमिट छाप बनने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका में अप्रवासी समुदायों में भारतवंशी हिंदू समुदाय उच्च शिक्षित, कुशल और सम्पन्न हैं। इनमें से अनेक उच्चतम पदों पर भी आसीन हैं। एक बड़ा समुदाय डांडिया, गर्बा और भंगड़ा नृत्य से ऊपर उठ कर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विपुल उपलब्धियों की पहचान बनाने के लिए आतुर है।

विज्ञानानंद 

विज्ञानानंद 

विज्ञानानंद 

बनारस में जन्मे, खड़गपुर आई आई टी से स्नातक स्वामी विज्ञानानंद की ही यह सोच है कि हिंदू समाज के विभिन्न वर्गों में अलग-अलग सम्मेलन हो और फिर हर चार के पश्चात बड़े स्तर सभी एक साथ मिलें। उन्होंने कहा कि बेशक सभी सात सम्मेलनों में आर्थिक और शिक्षा सम्मेलन महत्वपूर्ण हैं। शिकागो में 7 से 9 सितंबर के बीच आयोजित द्वितीय विश्व हिंदू कांग्रेस के विभिन्न सत्रों में 50 देशों से 250 वक़्ता भाग लेंगे। इन में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, तिब्बत धर्म गुरू दलाई लामा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, श्री श्री रवि शंकर सहित विशिष्ट प्रतिनिधि सम्मेलन के प्रारंभिक और अंतिम सत्र को संबोधित करेंगे।

 

शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में एक हिंदू प्रवर्तक के रूप में ‘’ब्रदर्स और सिस्टर्स’’ के मर्मस्पर्शी उद्बोधन के साथ अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले स्वामी विवेकानंद की 125वीं वर्ष गांठ के बाद शिकागो में यह दूसरा मौक़ा है, जब दुनिया भर के साधु, संत, राजनेता और शिक्षाविदों के साथ दो हज़ार से अधिक प्रतिनिधि अमेरिका पहुंच रहे हैं। स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर 1883 में इसी स्थान पर विश्व बंधुत्व का संदेश दिया था और हिंदू दर्शन का मर्म प्रस्तुत किया था। स्वामी विज्ञानंद ने इस बात को रेखांकित किया कि हिंदू धर्म सत्य पर आधारित है। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में हिंदू धर्म कमज़ोर नहीं, हिंदू आंदोलन सक्रिय नहीं था। हिंदुओं के प्रति आक्रामक रवैए में बदलाव आया है। आज गणेश उत्सव हैदराबाद से तमिलनाडु के दूर दराज़ क्षेत्रों में मनाया जा रहा है।

 

स्वामी विज्ञानानंद ने माना कि भारत में हिंदुओं के अनेकानेक गढ़ हैं और उनमें एकात्मता होनी चाहिए, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि सिविल सोसाइटी में विभिन्न पदों हिंदू समाज का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है। यहां गौ मांस पर पूर्ण प्रतिबंध लगना ही चाहिए। उन्हें कृत्रिम जीन से अधिकाधिक तैयार पैदावार लेने की चाह से भी गुरेज़ है।