‘‘समस्या का धैर्य से सामना करना गीता की पहली सीख’’
   दिनांक 01-जनवरी-2019

दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते श्री मोहनराव भागवत
‘‘समस्या सामने आने पर पीठ नहीं दिखाना, यह श्रीमद्भगवद्गीता की पहली सीख है। गीता को जन-जन तक पहुंचाना होगा। अगर श्रीमद्भगवदगीता घर-घर तक पहुंचे और उस पर सच्चे अर्थों में आचरण हो तो भारत आज की तुलना में सौ गुना सामर्थ्य के साथ विश्वगुरु के रूप में सामने आ सकता है।’’ उक्त बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कही। वे पिछले दिनों पुणे स्थित गीता धर्म मंडल संस्था द्वारा प्रकाशित ‘गीता दर्शन’ मासिक पत्रिका के स्वर्णोत्सव वर्षारंभ कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति को जीवन किस प्रकार व्यतीत करना चाहिए, गीता इसका निर्देशन करती है। इसलिए श्रीमद्भगवदगीता का अध्ययन और आचरण महत्वपूर्ण है। भगवदगीता को सब तक पहुंचाने का प्रयास करना आवश्यक है। भारत को राष्ट्र के रूप में उभारने के लिए गीता के मार्ग पर चलना होगा। यह कार्य किसी भी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि समाज का है। समाज गीता का आचरण सच्चे अर्थों में जब करेगा, तभी यह अपेक्षित राष्ट्र उभरकर आएगा। उन्होंने आगे कहा कि कर्तव्य उपस्थित होने पर पीठ नहीं दिखाना, यह गीता का पहला पाठ है। इसलिए श्रीमद्भगवदगीता कहती है, समस्या से मुंह नहीं मोड़ना है, बल्कि समस्या पर विचार करते-करते उसी से राह निकालनी है। अर्जुन को जो संभ्रम हुआ था, वह भय से नहीं बल्कि विवेक के कारण हुआ था। इस अवसर पर गीता धर्म मंडल के कार्याध्यक्ष ड़ॉ. मुकुंद दातार ने भी अपने विचार रखे।