‘‘कानून को आचरण में लाने के लिए धर्म का जाग्रत होना आवश्यक’’
   दिनांक 01-जनवरी-2019
 
कार्यक्रम को संबोधित करते श्री मोहनराव भागवत
‘‘समाज के लिए कानून बनाए जाते हैं। परन्तु जो कानून में है, उसे आचरण में लाने के लिए धर्म का जाग्रत होना आवश्यक है। समाज धर्म से चलता है। धर्म का अर्थ पूजा नहीं, बल्कि धर्म का अर्थ मानवता है।’’ उक्त बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कही। वे गत दिनों मुंबई स्थित नूतन गुलगुले फाउंडेशन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा, ‘‘धर्म सबको जोड़ता है, उन्नत करता है। कहीं भी अमंगल न करते हुए, हम पर सुख की वर्षा करता है। हाल ही में मुझे राजकोट में हुए साधु-सत्पुरुषों के एक सम्मेलन में उपस्थित रहने का अवसर मिला। वहां पर मेरे मन में जो भाव उत्पन्न हुए, उन्हीं का अनुभव मुझे आज यहां पर हो रहा है। अपनी कठिनाइयों को महत्व दिए बिना मेरे सामने बैठे व्यक्तियों ने अपना जीवन उन्नत किया है। साथ ही मानवता का धर्म निभाते समय समाज के अभावग्रस्त व्यक्तियों की उन्नति के लिए भी कष्ट उठाए हैं। तमसो मा ज्योतिर्गमय- यह प्रार्थना इन दिव्यांग व्यक्तियों ने सार्थक की है।’’ उल्लेखनीय है कि नूतन गुलगुले फाउंडेशन (एनजीएफ) ने विशेष उपलब्धि हासिल करने वाले दिव्यांगजन और दिव्यांगजन के लिए कार्यरत संस्थाओं को सम्मानित करने के उद्देश्य से यह समारोह आयोजित किया था। इस मौके पर 14 महानुभावों को सम्मानित किया गया।