'राम मंदिर हम ही बनवाएंगे कोई दूसरा नहीं'
   दिनांक 03-जनवरी-2019
भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और भारत के युवाओं में अपार ऊर्जा है। युवाओं से मैं कहना चाहता हूं कि यह ऊर्जा सकारात्मक रूप से राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में लगनी चाहिए
 युवा कुंभ में अपने विचार रखते योगी आदित्यनाथ 
2015-16 में नासिक और उज्जैन में कुम्भ लगा था। कुछ लोगों ने उस पर भी दुष्प्रचार का प्रयास किया। वह दुष्प्रचार पहली बार नहीं था। यह वही दुष्प्रचार था कि आर्य भारत के नहीं हैं। आर्य बाहर से आये थे। आर्योें को बाहर से आया हुआ आक्रान्ता बताया गया।
जिन लोगों ने भारत की परम्परा को लांछित करने का प्रयास किया, यह बताने का प्रयास किया कि आर्य तो बाहर से आये हैं, यह देश उनका नहीं है, उन्हीं लोगों ने यह दुष्प्रचार किया कि यह कुम्भ का आयोजन सामाजिक विद्वेष को बढ़ावा देने वाला है। विचार परिवार ने उन्हीं मुद्दों को लेकर वैचारिक कुम्भ का आयोजन किया। हमने मनुष्यों, जीव- जन्तुओं का ही नहीं, संपूर्ण ब्रह्माण्ड का सम्मान किया है। नारी का सम्मान, समाज का सम्मान, यह सब भारतीय समाज के अलावा कहां मिल सकता है। धरती को हम मां कहते हैं। गाय को गोमाता कहते हैं। गंगा जी को मां गंगा मानते हैं। मगर फिर भी दुष्प्रचार करने का प्रयास किया गया।
कुम्भ में भाषा, क्षेत्र आदि किसी भी आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता है। अतीत से भटका हुआ व्यक्ति वर्तमान का त्रिशंकु हो जाता है। भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और इस भारत देश का सबसे युवा प्रदेश, उत्तर प्रदेश है। युवा ऊर्जा को हम राष्ट्रीय अभियान में लगा सकें इसके लिए यहां विचार मंथन हुआ। प्रयागराज में आयोजित होने वाला कुम्भ कई मायने में नया है। यह पहला कुम्भ है, जिसे यूनेस्को ने सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी है। अभी कुछ दिन पहले 70 देशों के राजनयिक प्रयाग गए थे। ये लोग वहां पर लगने वाले कुम्भ कुंभ की तैयारियों को देख कर आये हैं। इन लोगों ने अपनी आंखों से देखा कि किस तरह संगम तट पर एक नगर बस रहा है। सामाजिक समता का इससे बड़ा कोई उदाहरण नहीं हो सकता।
साढ़े चार सौ वर्ष से अक्षयवट का दर्शन बंद हैं। अक्षयवट का दर्शन आम जनमानस के लिए हम खोलने जा रहे हैं। सरस्वती कूप का दर्शन भी श्रद्धालुओं के लिए बंद था। वह भी दर्शन के लिए खोला जा रहा है। कुम्भ के बाद भी प्रत्येक दिवस में हर कोई दर्शन कर सकेगा।
किसी का इतिहास एक हजार साल पुराना है, किसी का दो हजार साल पुराना है। दो हजार वर्ष से ज्यादा प्राचीन इतिहास वाले लोग आप को नहीं मिलेंगे मगर प्रयागराज का इतिहास तो हजारों साल पुराना है। वहां पर भारद्वाज ऋषि का आश्रम है, हम उनकी भव्य प्रतिमा लगाने जा रहे हैं। मां सरस्वती की भव्य प्रतिमा लगाने की भी तैयारी चल रही है। बेणी माधव मंदिर को भव्य स्वरूप दिया जा रहा है। इसके साथ हम सभी आश्रमों में श्रद्धालुओं को ठहरने की सुविधा दे रहे हैं। जल, थल और नभ मार्ग से प्रयाग को जोड़ा जा रहा है। अभी कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री द्वारा प्रयाग में सिविल टर्मिनल का उद्घाटन किया गया। हर बड़े महानगर से प्रयागराज को जोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री के कथनानुसार हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज पर चले, इस दिशा में हमारी सरकार काम कर रही है। बनारस से प्रयागराज तक मोटर बोट से भी यात्रा जल्द ही शुरू हो जायेगी। 3,200 हेक्टेयर में बसने वाले कुम्भ मेला नगर में 1,22,000 इको फ्रेंडली शौचालय बनाये जायेंगे। 192 देशों के प्रतिनिधि इस कुम्भ में आएंगे। प्रयागराज में जब 12 से 15 करोड़ लोग आयेंगे, वह प्रेरणादायी अवसर होगा। इस युवा कुम्भ के अवसर पर मैं कहना चाहता हूं कि युवाओं में अपार ऊर्जा है। यह ऊर्जा राष्ट्र के निर्माण में लगनी चाहिए। अगर यह ऊर्जा नकारात्मक दिशा में जायेगी तो पतन के गहरे नरक में जाने में देर नहीं लगेगी। जब मैं यहां बोलने के लिए आया तो नारा लग रहा था- ‘जो मंदिर बनवाएगा वोट उसी को जाएगा’, आप लोग यह जान लीजिए कि यह कार्य हम ही करेंगे और कोई दूसरा नहीं करेगा। जो भगवान राम और कृष्ण को मिथक मानते थे आज वे जनेऊ दिखाने को विवश हैं।