जिहादियों से जुड़ा संगठन है पीएफआई
   दिनांक 04-जनवरी-2019
पीएफआई से जुड़े अनेक युवा कुख्यात आतंकवादी संगठन आईएसआईएस में शामिल हो चुके हैं। इसके बावजूद पी.एफ.आई. खुद को सामाजिक संस्था कहता है
एक कार्यक्रम में शामिल पीएफआई के कार्यकर्ता। इसमें बच्चे भी शामिल थे, जिनमें कट्टरता का बीज बोया जा रहा है 
 अनेक ऐसे आतंकवादी गुट हैं, जिनके तार दक्षिण भारत से जुड़ते हैं। 4 दिसंबर, 2018 को तब एक बार फिर से इसकी पुष्टि हुई जब फ्रांस की पुलिस एक आतंकवादी को पकड़ने के लिए केरल पहुंची। उल्लेखनीय है कि नवंबर, 2015 में पेरिस में दो आतंकवादी हमले हुए थे, जिनमें 130 लोग मारे गए थे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अपनी जांच में यह पाया है कि केरल के त्रिशूर जिले के निवासी 30 वर्षीय सुभानी हजा मोईउद्दीन उर्फ अबु जैसमीन ने पेरिस हमलों में शामिल दो आतंकवादियों के साथ हथियार चलाने का प्रशिक्षण लिया था। सुभानी ने 2015 में केरल के अलग-अलग हिस्सों में आतंकवादी हमलों की साजिश रची थी। 2015 में ही वह आईएसआईएस में शामिल होने के लिए इराक चला गया। वहीं उसकी मुलाकात अब्देलहमीद अबौद और सलाह अब्देस्सलाम से हुई। ये दोनों पेरिस हमले में शामिल थे।
यह भी कहा जा रहा है कि केरल में आईएसआईएस का एक गुट सक्रिय है, जिसका नाम है ‘ओमार-अल-हिंदी’। 2 अक्तूबर, 2018 को इस संगठन के छह गुर्गों को कन्नूर जिले से गिरफ्तार किया गया था। ये लोग देशभर में महत्वपूर्ण व्यक्तियों और ठिकानों को निशाना बनाने की फिराक में थे। गौर करने वाली बात यह है कि इंडियन मुजाहिद्दीन प्रतिबंधित संगठन सिमी की पैदावार था और सिमी ने बाद में पॉपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया (पी.एफ.आई.) का रूप धारण कर लिया। यह भी साफ हो चुका है कि दक्षिण भारतीय जिहादी कश्मीर में भी युद्ध लड़ रहे हैं। इसका पहला उदाहरण 2008 में ही मिला था। उत्तरी कश्मीर के लोलाब में एक मुठभेड़ में केरल के कोवलम का निवासी शकील मोहम्मद मारा गया था। यह भी जानकारी मिली है कि पहले इसका संबंध सिमी से था। दूसरा उदाहरण 11 मार्च, 2018 का है। इस दिन कश्मीर के अनंतनाग जिले में हुई एक मुठभेड़ में तेलंगाना के भद्रादरी कोठागुडेम जिले का निवासी मोहम्मद तौफीक मारा गया था। यह रहस्योद्घाटन ‘अंसार-ए-गजवतुल-हिंद’ ने अपने मुखपत्र ‘अल-नसर’ में किया था।
इंडियन मुजाहिद्दीन का संस्थापक दक्षिण भारतीय है। रियाज भटकल, इकबाल भटकल और यासीन भटकल कर्नाटक के एक तटीय शहर भटकल के निवासी हैं। आईबी का कहना है कि कई अतिवादी संगठनों का जन्म दक्षिण में ही हुआ है। उदाहरण के लिए ‘बेस मूवमेंट’ के रूप में चर्चित संगठन को ले सकते हैं। यह अलकायदा की एक शाखा है और इसकी जड़ें कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु तक फैली हैं। जानकारों का कहना है कि इन सबको मजबूत करने में पीएफआई की भूमिका महत्वपूर्ण है।
भारत में आईएसआईएस के जन्म से जुड़ी गौर करने वाली बात यह है कि इससे संबंधित पहला मामला दक्षिण भारत से ही सामने आया था। तमिलनाडु निवासी हजा फकरुद्दीन ने भारतीय जिहादियों को आईएसआईएस में शामिल होने की व्यवस्था की थी। एनआईए ने अपने आरोपपत्र में बताया है कि किस तरह हजा ने बैठकें आयोजित कीं और लोगों को इस संगठन में शामिल होने के लिए उकसाया। इसका प्रभाव महाराष्ट्र तक महसूस किया गया। वहां के चार जिहादी आईएसआईएस में शामिल होने के लिए सीरिया पहुंच गए थे। यहां तक कि आईएसआईएस से संबंधित सबसे बड़ा मामला भी दक्षिण भारत से ही सामने आया। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले केरल के करीब 23 युवा अचानक गायब हो गए थे। जांच से पता चला कि वे अफगानिस्तान में आईएसआईएस में शामिल हो गए हैं। इस संगठन की अफगान शाखा बड़ी संख्या में भारतीय जिहादियों की भर्ती कर रही है, और उसका लक्ष्य हमेशा दक्षिण, खासकर केरल रहा है। 2016 में हफीजुद्दीन हकीम नामक एक जिहादी अपने परिवार को छोड़कर अफगानिस्तान चला गया और वहां आईएस में शामिल हो गया। वहां से उसने अपने परिवार के लिए एक वीडियो भेजा, जिसमें कहा गया है, ‘‘हम अपने ठिकाने पर पहुंच गए हैं। पुलिस को सूचना देने की कोई जरूरत नहीं है। अल्लाह के पाक रास्ते से लौटने का भी कोई इरादा नहीं है।’’
केरल पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि 10 जिहादी दक्षिण भारत से जाकर अफगानिस्तान में आईएसआईएस में शामिल हो गए हैं। उनमें से कई लोगों के पीएफआई से भी संबंध रहे हैं। पुलिस के अनुसार के़ सज्जाद और अनवर पुथापारा ने 19 नवंबर, 2018 को मैसूर जाने के नाम पर घर छोड़ा। दोनों अभी तक लापता हैं। कन्नूर जिले का टी़ पी़ निसम भी गायब है। पुलिस को उम्मीद है कि वह भी आईएसआईएस में भर्ती हो गया है।
केरल के छोटे से शहर पप्पीनिस्सेरी का रहने वाला शमीर अपने दो बेटों सलमान और सफवान के साथ आईएस में शामिल होने के उपरांत सीरिया में मारा जा चुका है। शमीर पीएफआई का सक्रिय सदस्य था। कहा जा रहा है कि उसी ने अब्दुल रजाक, अब्दुल मनाफ, मुहम्मद शाजिल और अब्दुल कयूम को आईएसआईएस में शामिल होने के लिए प्रेरित किया था। ये सभी पीएफआई के सदस्य थे।
हालांकि ऐसे मामलों से पी.एफ.आई. अपने आपको किनारे कर लेती है। वह बार-बार यही कहती है, ‘‘जो लोग आईएसआईएस में शामिल हुए हैं, उन्होंने बहुत पहले ही पीएफआई को छोड़ दिया था या उन्हें निकाल दिया गया था।’’ यह पीएफआई की रणनीति का एक हिस्सा है। 4 जुलाई, 2010 को केरल में प्रो़ टी.जोसेफ का हाथ काट लिया गया था। इसका आरोप पीएफआई पर लगा था। प्रो. जोसेफ पर एक प्रश्नपत्र तैयार करने के दौरान मुसलमानों की भावनाएं आहत करने वाला सवाल रखने का आरोप था। पीएफआई हमेशा अपने पर लगे आरोपों को नकारता रहा। लेकिन कुछ दिन पहले इंडिया टुडे टीवी चैनल द्वारा किए गए स्टिंग आॅपरेशन में पीएफआई के संस्थापक सदस्य और उसके मुखपत्र ‘तेजस’ के संपादक ने कैमरे के समक्ष स्वीकार किया था, ‘‘प्रो. जोसेफ के हाथ काटने की घटना को पीएफआई के कार्यकर्ताओं ने इसलिए अंजाम दिया था, क्योंकि भारत का कानून प्रो. जोसेफ की गलती की सजा देने में असफल साबित हुआ था।’’
अमेरिकी अखबार ‘वाशिंगटन पोस्ट’ अखबार के अनुसार अभी तक 100 से ज्यादा भारतीय सीरिया, इराक और अफगानिस्तान सहित कई देशों में आईएसआईएस में शामिल हो चुके हैं। केरल जैसे साक्षर राज्य से आतंकवादी संगठनों के प्रति आकर्षण इस धारणा को मिथ्या साबित करता है कि आतंकवाद का संबंध निरक्षरता और बेरोजगारी से है। पीएफआई और एसडीपीआई ने हाल के दिनों में अपने कार्यक्रमों में बच्चों को भी शामिल करना शुरू किया है। इन बच्चों में जो जहर बोया जाएगा उसका कुफल भारत को भोगना पड़ेगा, इसमें कोई दो राय नहीं है। इसलिए समय रहते चेतने और चेताने की जरूरत है।
(लेखक पी.एफ.आई. पर शोध कर रहे हैं)