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कांग्रेस की खोखली जिद

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यह लेख संविधान की मीन-मेख करने से संबंधित नहीं है। लेकिन, संदर्भ के तौर पर, इतना कहना आवश्यक है कि संविधान निर्माताओं ने संभवत: उन परिस्थितियों की कल्पना नहीं की होगी, जो परिस्थितियां पनपती गईं और जिनका संविधान के पास कोई उत्तर नहीं है। ऐसी परिस्थितियों की लंबी सूची हो सकती है। वर्तमान में अपेक्षाकृत ज्यादा प्रासंगिक कुछ परिस्थितियां इस प्रकार हं लेख लिखे जाने से चंद घंटे पहले एक घोषित आतंकवादी को मृत्यु दंड मिलने को लेकर भारी नाटकीय स्थितियां बनी रहीं।..