नारद

अपने गिरेबां में कब झांकेगा मीडिया ?

खबरों को को गलत रंग देकर भारतीय मीडिया अपनी नई पहचान गढ़ रहा है जाति, धर्म और राजनीतिक विचारधारा से जुड़े मामलों में मुख्यधारा मीडिया का दोहरा रवैया अब रोजमर्रा की बात है। ऐसा पहले कभी-कभी होता था लेकिन अब अखबार, चैनल और समाचार पोर्टल इसे अपनी पहचान बना चुके हैं। चाहे इसके लिए उन्हें खबरों को तोड़ना-मरोड़ना या तथ्यों को छिपाना ही क्यों न पड़े।..

टीआरपी की होड़ में अधिकांश चैनलों ने संवेदनशील मुद्दों से पल्ला झाड़ा

मुख्यधारा मीडिया का एक बड़ा वर्ग अपने ‘पसंदीदा दल’ को सत्ता में वापस लाने के लिए कितना उतावला है, इसके ढेरों उदाहरण बीते हफ्ते देखने को मिले। गुजरात में उत्तर भारतीयों पर हमलों की कवरेज इसकी सबसे बड़ी मिसाल रही। ज्यादातर चैनलों और अखबारों ने इसे महज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की तरह दिखाया। ..

मुख्यधारा मीडिया द्वारा परोसी जा रही खबरें विश्वसनीय नहीं रहीं

घटना कोई भी हो, उसे अपने मूल एजेंडे से कैसे जोड़ना है यह कोई सेकुलर मीडिया से सीखे। लखनऊ में एक व्यक्ति की पुलिस की गोली से मौत हो गई। कायदे से यहां पुलिस और प्रशासन पर सवाल उठने चाहिए। यह देखा जाना चाहिए कि सरकार दोषियों को सजा दिलाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कितनी गंभीर है।..

झूठ फैलाना ही मीडिया के एक धड़े का काम

क्या आप यह कल्पना कर सकते हैं कि देश के किसी राज्य में पुलिस स्कूली बच्चों पर गोलियां चलाए? 2 छात्रों की मौत छाती और पेट में गोली लगने से हो और देश के मीडिया में इतनी बड़ी घटना की कोई चर्चा तक न हो? पर मामला बंगाल, केरल जैसे किसी वामपंथी या कांग्रेस शासित प्रदेश का हो तो ऐसा बिल्कुल संभव है। बंगाल के उत्तर दिनाजपुर के एक स्कूल में उर्दू थोपने के विरोध में बच्चों ने जब प्रदर्शन किया तो उन्हें गोलियां मिलीं।..

समाचार की आड़ में विचार परोसता सेकुलर मीडिया

बीते दिनों राफेल सौदे को लेकर राहुल गांधी ने कई बयान दिए। उन्होंने हर जगह विमान का अलग-अलग दाम बताया। इसी तरह बैंकों के डूबे हुए ऋण और उद्योगपतियों के कर्जों की तथाकथित माफी पर भी राहुल गांधी जितनी जगह बोले, उतनी प्रकार के आंकड़े दिए। ..

पादरियों और मुल्ला मौलवियों की नकारात्मक खबरों को दबाता है मीडिया

इस स्तंभ में हम ऐसी खबरों के बारे में बताते हैं जिनसे साबित होता है कि मुख्यधारा मीडिया का एक बड़ा वर्ग भारतीय संस्कृति और धर्म के खिलाफ अभियान चला रहा है। साथ ही इस्लाम व ईसाइयत का महिमामंडन किया जा रहा है। यही कारण है कि हिंदू साधु-संतों के खिलाफ कोई नकारात्मक खबर बहुत बड़ी बन जाती है, जबकि पादरियों, बिशपों व मुल्ला-मौलवियों से जुड़ी ऐसी खबरें दबा दी जाती हैं।..

पीएम की हत्या की साजिश करने वालों के पकड़े जाने पर क्यों बौखलाया है सेकुलर मीडिया

अभी हाल में प्रधानमंत्री की हत्या का षड़यंत्र रचने के आरोप में कुछ नक्सली पकड़े गए, लेकिन मीडिया का एक बड़ा वर्ग उन्हें 'मानवाधिकार कार्यकर्ता', 'वकील' और 'लेखक' के तौर पर संबोधित कर रहा है। उनके कृत्य को वैचारिक विरोध ठहराया जा रहा है। उन्हें रोकने को 'सरकार की बदले की कार्रवाई' बताया जा रहा है। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज चौहान की गाड़ी पर पथराव किया गया।..

विदेशी चंदे पर पलता पूर्वाग्रही मीडिया

भारतीय मीडिया के चरित्र को लेकर अक्सर चिंता जताई जाती है, लेकिन यह समस्या वास्तव में कितनी गंभीर है। इसका अंदाजा अब लग गया होगा। पुणे में पिछले साल हुई हिंसा की जांच कर रही पुलिस को कुछ तथ्य हाथ लगे, जिसके आधार पर उन्होंने कुछ नक्सली नेताओं को गिरफ्तार किया।..

केरल आपदा और मीडिया का परदा

दिल्ली का मीडिया ढिंढोरा पीट रहा था कि केरल में बारिश और बाढ़ से निपटने के विश्वस्तरीय इंतजाम हैं। अब उसी मीडिया का एक बड़ा वर्ग राज्य सरकार के निकम्मेपन पर परदा डालने में जुटा है..

राजनीतिक चश्मे से देखता है मीडिया

मुख्यधारा मीडिया को बंगाल में दुर्गा पूजा पर राज्य सरकार की पाबंदियां नहीं दिखतीं, पर भाजपा अध्यक्ष जब रैली में यह मुद्दा उठाते हैं तो उसे वह ‘हिंदू कार्ड’ दिखता हैसामयिक मुद्दों पर मीडिया के रुख और रुखाई की परतें खंगालता यह स्तंभ समर्पित है विश्व के पहले पत्रकार कहे जाने वाले देवर्षि नारद के नाम। मीडिया में वरिष्ठ पदों पर बैठे, भीतर तक की खबर रखने वाले पत्रकार इस स्तंभ के लिए अज्ञात रहकर योगदान करते हैं और इसके बदले उन्हें किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाता।मुख्यधारा मीडिया ने बीते ..

मीडिया के ये 'कुकर्म' जनता की नजरों से छिपे नहीं

कल्पना कीजिए कि स्कूल के आगे इस्लामिया की जगह किसी ने ‘हिंदू’ शब्द जोड़ा होता तो इसी मीडिया की क्या प्रतिक्रिया होतीबड़े-बड़े अखबार और चैनल बेशर्मी के साथ झूठी खबरें देने लगें तो इसे क्या कहेंगे? ‘टाइम्स आॅफ इंडिया समूह’ फर्जी खबरों की इस दौड़ में सबसे आगे है। बीते सप्ताह इसकी वेबसाइट ने खबर दी कि भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने राफेल सौदे पर सवाल खड़े किए हैं और अदालत जाने की बात कही है। यह फर्जी खबर थी। स्वामी ने जब टाइम्स समूह को न्यायालय में घसीटने की धमकी दी तो उन्होंने ..

क्या पक्षपात सेकुलर मीडिया का एजेंडा है!

घटनाओं एवं खबरों को मनचाहा मोड़ दे मीडिया अपना ही नुक्सान कर रहा है। अभी हाल में राहुल गांधी ने चोरी-छिपे कुछ मुस्लिम नेताओं से मुलाकात की। ..

पत्रकारिता से गायब होती नैतिकता

 यह कटु सच है कि सेकुलर मीडिया गैर-जिम्मेदार संस्था बन चुका है, ऐसी स्थिति में जनता और सरकार को यह जिम्मेदारी संभालनी होगी और उन्हें सही रास्ते पर लाने के लिए दबाव बनाए रखना होगा ऐसे समय में जब तथाकथित राष्ट्रीय मीडिया नए-नए बनावटी मुद्दे खड़े करने में पूरी ऊर्जा लगा रहा है, क्षेत्रीय समाचार पत्र और चैनल एक उम्मीद बनकर उभरे हैं। खासतौर पर भारतीय भाषाओं से जुड़ा मीडिया देश के मुद्दों की ज्यादा वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत कर रहा है। रांची के ‘मिशनरीज आॅफ चैरिटी’ में जब बच्चों को बेचे ..

जानते-बूझते होती है ऐसी ‘चूक’

मीडिया का भारतीयता विरोध धीरे-धीरे अपने चरम पर पहुंचने लगा है और सेकुलर पत्रकार अपना एजेंडा साधने लगे हैं। सामयिक मुद्दों पर मीडिया के रुख और रुखाई की परतें खंगालता यह स्तंभ समर्पित है विश्व के पहले पत्रकार कहे जाने वाले देवर्षि नारद के नाम। मीडिया में वरिष्ठ पदों पर बैठे, भीतर तक की खबर रखने वाले पत्रकार इस स्तंभ के लिए अज्ञात रहकर योगदान करते हैं और इसके बदले उन्हें किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाता।..

फर्जी खबरों का चलन खतरनाक

बीते कुछ समय से सेना निशाने पर है। किसी बाहरी दुश्मन के नहीं, बल्कि उस मीडिया के जो खुद को प्रगतिशील और स्वतंत्र होने का दावा करता है।..

सोशल मीडिया के युग में सच छिपाना आसान नहीं

कुछ दिन पहले तक विजय माल्या और नीरव मोदी के भागने पर बेहद चिंतित दिखने वाले मीडिया ने अचानक आंख-कान बंद कर लिए हैं। शायद इसलिए कि देश को लूटने वालों की धर-पकड़ का काम अब कांग्रेस नेता अहमद पटेल के दरवाजे तक जा पहुंचा है। मीडिया समूहों में पटेल की हैसियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके खिलाफ मुश्किल से कोई नकारात्मक खबर छपती है। चाहे वह सत्ता में हों या सत्ता से बाहर। तमाम बड़े चैनलों, अखबारों में उनकी सिफारिश पर भर्ती पत्रकार निष्पक्षता का मुखौटा लगाकर काम कर रहे हैं। यही वजह है कि अधिकांश ..

फर्जी खबरों के जश्न में डूबा मीडिया

फर्जी खबरों के जश्न में डूबा मीडिया..

खबर की परख में चूकती पत्रकारिता

खबर की परख में चूकती पत्रकारिता..

पत्रकारीय स्वतंत्रता बनाम आत्मनियंत्रण

सामयिक मुद्दों पर मीडिया के रुख और रुखाई की परतें ख्ांगालता यह स्तंभ समर्पित है विश्व के पहले पत्रकार कहे जाने वाले देवर्षि नारद के नाम। मीडिया में वरिष्ठ पदों पर बैठे, भीतर तक की खबर रखने वाले पत्रकार इस स्तंभ के लिए अज्ञात रहकर योगदान करते हैं और इसके बदले उन्हें किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाता।..

एजेंडे पर चलता मीडिया

बलात्कार की घटनाएं हों या कोई दूसरा अपराध, मीडिया के एक बड़े वर्ग को इन सब में अवसर नजर आ रहा है। यह अवसर देश को बदनाम करने और उसकी छवि को धूमिल करने का है। इसी तबके ने कठुआ कांड को 'अंतरराष्ट्रीय' बनाने का काम किया। ऐसे हर मामले में पहले से तय तरीका होता है। घटना के बाद एनजीओ के जरिए आंदोलन खड़ा किया जाता है।..

कब तक परोसते रहेंगे झूठी खबरें?

मीडिया को महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अपनी दोहरी मानसिकता बदलने की जरूरत सामयिक मुद्दों पर मीडिया के रुख और रुखाई की परतें खंगालता यह स्तंभ समर्पित है विश्व के पहले पत्रकार कहे जाने वाले देवर्षि नारद के नाम। मीडिया में वरिष्ठ पदों पर बैठे, भीतर तक की खबर रखने वाले पत्रकार इस स्तंभ के लिए अज्ञात रहकर योगदान करते हैं और इसके बदले उन्हें किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाता।..

खबरों में बेईमानी का खेल कब तक?

बीते दिनों असम के 9 मुस्लिम बहुल जिलों में बलात्कार की कई घटनाएं हुईं। अधिकांश में आरोपी मुसलमान और पीडि़त अल्पसंख्यक हिंदू लड़कियां हैं। ..

चौथा स्तम्भ / नारद-दोहरे चरित्र वाले मीडिया के मठाधीश सेकुलर

 मीडिया के मठाधीशों के कारनामे बाहर आने के साथ ही उनके दोहरे चरित्र भी सामने आ रहे हैंसामयिक मुद्दों पर मीडिया के रुख और रुखाई की परतें ख्ांगालता यह स्तंभ समर्पित है विश्व के पहले पत्रकार कहे जाने वाले देवर्षि नारद के नाम। मीडिया में वरिष्ठ पदों ..