दिशाबोध

दिशाबोध

क्यों है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गुरु 'भगवा ध्वज' ?

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के समय भगवा ध्वज को गुरु के रूप में प्रतिष्ठित किया। इसके पीछे मूल भाव यह था कि व्यक्ति पतित हो सकता है पर विचार और पावन प्रतीक नहीं। विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन गुरु रूप में इसी भगवा ध्वज को नमन करता है।     पर्वों, त्योहारों और संस्कारों की भारतभूमि पर गुरु का परम महत्व माना गया है। गुरु शिष्य की ऊर्जा को पहचानकर उसके संपूर्ण सामर्थ्य को विकसित करने में सहायक होता है। ..

हम क्यों खोते जा रहे हैं अपने शब्दों को, ऐसे तो विलुप्त हो जाएंगे हमारे शब्द

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अपनी भाषा, बोली और अपने शब्दों का उपयोग न करने या उन्हें प्रचलन में न रखने पर वे मृत हो जाते हैं। ‘भाषा किसी भी व्यक्ति एवं समाज की पहचान का एक महत्वपूर्ण घटक तथा उसकी संस्कृति की सजीव संवाहिका होती है।’’ आज विविध भारतीय भाषाओं व बोलियों के चलन तथा उपयोग में आ रही कमी, उनके शब्दों का विलोपन तथा विदेशी भाषाओं के शब्दों से प्रतिस्थापन एक गंभीर चुनौती बन कर उभर रही है। अनेक भाषाएं व बोलियां विलुप्त हो चुकी हैं और कई अन्य का अस्तित्व संकट में है। यह कितना विदारक है ! डॉ. मनमोहन वैद्य ..

शत नमन माधव चरण में ...

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संघ के संस्थापक डा. हेडगेवार ने अपने देहान्त से पूर्व जिनके समर्थ कंधों पर संघ का कार्यभार सौंपा, वह थे श्री माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर, जिन्हें हम सब प्रेम से श्री गुरुजी कहकर पुकारते हैं। ‘परंम् वैभवम नेतुमेतत्वस्वराष्ट्रं’ यानी राष्ट्र को परम वैभव की ओर ले जाने के लिए संघ कार्य को अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले श्री गुरुजी की आज पुण्य तिथि है। ..

महात्मा गांधी, बाबा साहेब आंबेडकर और जनरल करिअप्पा भी आ चुके हैं संघ के वर्ग में

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प्रणब मुखर्जी का संघ के तृतीय वर्ष वर्ग के समापन में जाना कांग्रेसियों और वामपंथियों को खासा परेशान करना वाला है। संभवत: इसलिए अभी तक किसी ने इस बात पर कोई टिप्पणी भी नहीं की है। जहां तक प्रणब दा की बात है तो इंदिरा गांधी के बाद के दौर में प्रणब मुखर्जी, कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में गिने जाते रहे हैं। ..

चिन्तन - समरसता और संघ विचार

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हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने संविधान सभा और डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की भूमिका पर नई रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि बाबासाहेब ने स्वातंत्र्य, समता, बंधुता की तत्वत्रयी की प्रेरणा फ्रांसीसी राज्य क्रांति के बजाय तथागत ब..

साक्षात्कार सरसंघचालक : एक है हिन्दुत्व

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रा.स्व.संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा यानी संघ से जुड़ा वर्ष का सबसे बड़ा आयोजन। समाज में संघ कार्य की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है।  विविध क्षेत्रों में संघ के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने की उत्कंठा है। 2018 के अवसर पर रेशिम बाग, नागपुर में सरस..

संघ को किसी भी रूप में चातुर्वर्ण्य व्यवस्था स्वीकार नहीं—बालासाहब देवरस

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वरिष्ठ पत्रकार दिनकर विनायक गोखले ने डॉ. हेडगेवार भवन में बालासाहब का साक्षात्कार  लिया था। उस समय बालासाहब के निजी सचिव डॉ. आबाजी थत्ते और महाराष्ट्र टाइम्स के नागपुर प्रतिनिधि केशवराव पोतदार उपस्थित थे। यह साक्षात्कार अगस्त 1973 के किर्लोस्कर मासिक..